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Rohtak News: ओपीडी में दोपहर 12 बजे बाद नहीं मिला मरीजों को इलाज, आज और बढ़ेगी परेशानी

Wed, 23 Nov 2022 11:24 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 23 Nov 2022 11:24 PM IST
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Patients did not get treatment in OPD after 12 noon, problems will increase today
रोहतक पीजीआई के ओपीडी में बॉन्ड पॉलिसी के खिलाफ बुधवार की दोपहर 12 से 2 बजे तक आरडीए ने विद्यार्थिय?
बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में धरने पर बैठे पीजीआई के एमबीबीएस विद्यार्थियों के समर्थन में आरडीए (रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन) ने बुधवार को दोपहर 12 बजे बाद पेन डाउन हड़ताल की। इसके चलते सैकड़ों मरीजों को बिना इलाज के ही घर लौटना पड़ा। प्रदेश के दूर-दराज इलाकों व अन्य प्रांतों से इलाज के लिए आए मरीजों को हड़ताल के कारण उपचार नहीं मिल पाया। वीरवार को आरडीए की ओपीडी, वार्ड व इलेक्टिव ओटी में पूरी तरह हड़ताल होने के चलते मरीजों की मुश्किलें और बढ़ना तय है। ऐसे में पीजीआई की पूरी व्यवस्था अब सीनियरों के भरोसे नजर आ रही है।
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बुधवार को पीजीआई की ओपीडी दोपहर 12 बजे तक सुचारु रूप से चली। यहां करीब 2000 नए व करीब इतने ही पुराने मरीज इलाज के लिए पहुंचे। मंगलवार को ओपीडी में करीब पांच हजार से अधिक मरीज पहुंचे थे। इनमें से 2400 नए मरीज थे। हड़ताल के कारण मरीजों का आंकड़ा कम हो रहा है। ये मरीज इलाज के लिए सुबह सात बजे से पीजीआई पहुंचने शुरू हो गए थे। ओपीडी में सुबह आठ बजे काउंटर खुलते ही लोगों ने अपने कार्ड बनवाए। इसके बाद डॉक्टर से जांच कराने के लिए उनके कमरों के बाहर लंबा इंतजार किया। दोपहर 12 बजे तक जितने मरीजों का नंबर आया उनका इलाज किया गया। इसके बाद आरडीए सदस्य हड़ताल पर चले गए। इस कारण वरिष्ठ चिकित्सकों को ही मरीज देखने पड़े। जबकि हड़ताल के कारण ज्यादातर मरीज बिना इलाज के ही घर लौट गए।
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विद्यार्थियों को नहीं जाने दिया अंदर तो कुछ ने बिना एप्रेन प्रवेश करने में रहे सफल
इधर, ओपीडी में एमबीबीएस विद्यार्थियों को बुधवार को भी प्रवेश नहीं करने दिया गया। संस्थान के सुरक्षा कर्मचारियों ने इन्हें बाहर ही रोक दिया। इस कारण विद्यार्थी बाहर ही अपने हाथों में पोस्टर लेकर खड़े हो गए। यहां से आने-जाने वालों को बॉन्ड पॉलिसी से अवगत कराया। कुछ विद्यार्थी बिना एप्रेन ओपीडी के प्रवेश पाने में सफल रहे। इसके लिए कार्ड बनवाकर विद्यार्थियों ने मरीज के रूप में जांच कराने का बहाना बनाया। यह देखकर गार्डों ने गेट पर पहरा और बढ़ा दिया। इसके चलते बिना एप्रेन आने वाले विद्यार्थियों व सुरक्षा कर्मचारियों के बीच बहस हुई। उन्हें अंदर जाने से रोकने पर नोकझोंक भी हुई।
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पीजीआई के लिए सुबह निकला था घर से
मैं व्यवसायी हूं। पैर में कुछ समय पहले फ्रैक्चर हो गया था, इसलिए चिकित्सक ने शिकंजा कसा था। बुधवार को डॉक्टर को दिखाना था, इसलिए सुबह ही घर से निकला था। अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टर ही नहीं मिले। पता लगा की हड़ताल पर हैं और अब दोबारा आना पडे़गा। रोहताश, लोहारडी।
किराये पर गाड़ी लेकर आया था पीजीआई
भांजा काफी बीमार है। इसे दिखाने के लिए आया था। यह ठीक से चलने में अक्षम है, इसलिए 2000 रुपये में गाड़ी किराये पर की थी। पीजीआई पहुंचने पर पता चला कि हड़ताल है। इस कारण अब बिना उपचार करवाए ही लौटना पड़ रहा है। पता नहीं हड़ताल कब तक चलेगी। -सोमवीर, कादमा।
हड़ताल के कारण नहीं मिला इलाज
मेरे दोस्त शफी मोहम्मद का रोहतक के पास हादसे में पैर चोट लगने के साथ ही आंत फट गई थी। यहीं उसका इलाज हुआ था, इसलिए बुधवार को डॉक्टर को दिखाने के लिए आया था। इसके लिए तीन हजार रुपये व टोल खर्च में गाड़ी किराये पर ली थी। यहां पर डॉक्टरों की हड़ताल का पता लगा। -जुम्मे खां, अलवर, राजस्थान।

पत्नी लीला के पैर में दिक्कत है। उसे दिखाने के लिए सुबह आठ बजे ही पीजीआई पहुंच गया था। यहां पहले भीड़ व बाद में हड़ताल के कारण इलाज ही नहीं मिला। पांव पर पट्टी तक नहीं हुई। अब आश्रम में रुक सुबह का इंतजार करूंगा। वीरवार को शायद राहत मिल पाए। -दीपचंद, सिरसा।
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