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Rohtak News: प्रतिभागियों ने सीखी डीएनए सीक्वेंसिंग तकनीक
Wed, 08 Jul 2026 07:54 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 08 Jul 2026 07:54 PM IST
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रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के बायोकेमिस्ट्री विभाग में फ्रंटियर्स इन बायोकेमिकल रिसर्च विषय पर पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला चल रही है। इसके तीसरे दिन प्रतिभागियों को आधुनिक जीनोमिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
विभागाध्यक्ष प्रो. नर सिंह चौहान ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य शोधार्थियों को बायोकेमिकल रिसर्च में उपयोग होने वाले एडवांस टूल्स और अत्याधुनिक तकनीकों से परिचित कराना है।
बुधवार को प्रतिभागियों ने नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग की पूरी वर्क फ्लो, सीक्वेंसिंग डेटा एनालिसिस, डेटा मॉनिटरिंग और प्रयोगों के विश्लेषण का प्रशिक्षण प्राप्त किया। विशेषज्ञों ने डीएनए की गुणवत्ता जांचने, सीक्वेंस तैयार करने और डेटा को कंप्यूटर पर प्रोसेस करने की प्रक्रिया समझाई।
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उन्होंने सार्थक वैज्ञानिक निष्कर्ष निकालने के तरीके भी बताए। प्रशिक्षण में सीक्वेंसिंग मशीन की तकनीकी त्रुटियों को पहचानने और सुधारने की प्रक्रिया भी सिखाई गई।
प्रतिभागियों को सीक्वेंसिंग डेटा पढ़ने, डीएनए में रासायनिक आधारों की स्थिति समझने और एक्सपेरिमेंटल वर्कफ्लो का अभ्यास कराया गया। प्रो. चौहान ने कहा कि यह प्रशिक्षण शोधार्थियों को आधुनिक जैव-रासायनिक अनुसंधान में दक्ष बनाएगा।
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विभागाध्यक्ष प्रो. नर सिंह चौहान ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य शोधार्थियों को बायोकेमिकल रिसर्च में उपयोग होने वाले एडवांस टूल्स और अत्याधुनिक तकनीकों से परिचित कराना है।
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बुधवार को प्रतिभागियों ने नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग की पूरी वर्क फ्लो, सीक्वेंसिंग डेटा एनालिसिस, डेटा मॉनिटरिंग और प्रयोगों के विश्लेषण का प्रशिक्षण प्राप्त किया। विशेषज्ञों ने डीएनए की गुणवत्ता जांचने, सीक्वेंस तैयार करने और डेटा को कंप्यूटर पर प्रोसेस करने की प्रक्रिया समझाई।
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उन्होंने सार्थक वैज्ञानिक निष्कर्ष निकालने के तरीके भी बताए। प्रशिक्षण में सीक्वेंसिंग मशीन की तकनीकी त्रुटियों को पहचानने और सुधारने की प्रक्रिया भी सिखाई गई।
प्रतिभागियों को सीक्वेंसिंग डेटा पढ़ने, डीएनए में रासायनिक आधारों की स्थिति समझने और एक्सपेरिमेंटल वर्कफ्लो का अभ्यास कराया गया। प्रो. चौहान ने कहा कि यह प्रशिक्षण शोधार्थियों को आधुनिक जैव-रासायनिक अनुसंधान में दक्ष बनाएगा।