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Rohtak News: हिंदू का नाम नहीं लिखते थे पाकिस्तानी स्कूल, लक्ष्मण को लश्कर लिखा
Wed, 13 Mar 2024 03:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 13 Mar 2024 03:20 AM IST
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अजमेर गोयत
चौबीसी के गांव मदीना में 19 साल पहले पाकिस्तान से मदीना में आकर बसे हिंदू परिवार नए कानून नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू होने से खुश हैं।
कहते हैं पाकिस्तान के स्कूलों में हिंदुओं के दाखिले तक नहीं होते थे। लक्ष्मणदास से उनका नाम लश्कर दास कर दिया था।
अतीत के आईने में झांकते हुए महम निवासी प्रकाश चंद ने बताया कि पाकिस्तान में उनके पिता मदनलाल, चाचा वजीर चंद, और ताऊ सूबा राम के पास 20 एकड़ जमीन थी। वर्ष 2003 में वह दूसरी कक्षा में पढ़ते थे। वहां पर हिंदुओं से खराब व्यवहार किया जाता था। उनको कक्षा में सबसे पीछे बैठाया जाता था। इतना ही नहीं वहां पर परिवार की बेटियां तक सुरक्षित नहीं थी। जबरन धर्म परिवर्तन कराकर शादी कर ली जाती थी। तंग आकर वह घर जमीन छोड़ कर 2005 में तीन माह के टूरिस्ट वीजा पर समझौता एक्सप्रेस से भारत आए। कुछ परिवार कलानौर खंड के गांव काहनौर में भी रह रहे हैं जो अब 20 से 25 परिवार बन चुके हैं, जो मदीना में रहते हैं।
मदीना में पूर्व विधायक के खेत में रहकर करने लगे खेती
हंस दास ने बताया कि उन्हें सबसे पहले पूर्व विधायक आनंद सिंह दांगी के खेतों में शरण मिली। वे वहीं पर रहने लगे तथा उनकी खेती संभाल ली । बताया कि उन सहित अन्य ग्रामीणों ने उनकी हर प्रकार से मदद की। उसके बाद दिन बीतते चले गए तथा अब सीएए कानून बन जाने से उनको अपार खुशी हो रही है। हालांकि उनमें से कुछ लोगों को 2019 में नागरिकता मिल चुकी है। यहां पर उनके बच्चे एमए तक की पढ़ाई पूरी कर रोजगार पा चुके हैं, लेकिन कुछ सदस्य अब भी ऐसे हैं जिनको नागरिकता नहीं मिल सकी है। इसके चलते सरकार की योजनाओं के लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है। अब सरकार से उम्मीद जगी है। इसके लिए उन्होंने सरकार का धन्यवाद किया है।
रोहतक से गए मुस्लिम करते थे मदद
हंस दास ने बताया कि बंटवारे के बाद रोहतक जिले से पाकिस्तान गए मुस्लिम उनकी मदद करते थे। वह कहते थे कि बंटवारे के समय वहां के हिंदुओं ने उनकी खूब मदद की थी तो वे अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। कुछ समय बाद जब मदद करने वाले लोग बूढ़े हो गए तो नई पीढ़ियों ने उनकी राहों में कांटे बिछाने शुरू कर दिए।
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ऐसा भाया हरियाणा कि अब कभी नहीं छोड़ेंगे...
पाकिस्तान से आए हिंदू परिवार को मदीना गांव पसंद आ गया। लगभग 19 साल गांव में रहे तो यहां की मिट्टी की खुशबू भा गई है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लैया जिले में बसने वाले फूल चंद के रिश्तेदार फतेहाबाद चले गए हैं। पत्नी पठानो देवी के साथ बेटा लश्कर दास, हंस दास, तारिक लाल, चुन्नी लाल के अतिरिक्त लश्कर दास की पत्नी शुगना देवी व बेटे राजेश व राकेश हैं। हंस दास की यहां आकर करनाल निवासी सुमन के साथ शादी भी हुई, जिसका अब पूरा परिवार है। कुछ लोग खेती करते हैं, जबकि हंसदास ने गांव मदीना में ही टायर पंक्चर बनाने की दुकान कर रखी है।
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चौबीसी के गांव मदीना में 19 साल पहले पाकिस्तान से मदीना में आकर बसे हिंदू परिवार नए कानून नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू होने से खुश हैं।
कहते हैं पाकिस्तान के स्कूलों में हिंदुओं के दाखिले तक नहीं होते थे। लक्ष्मणदास से उनका नाम लश्कर दास कर दिया था।
अतीत के आईने में झांकते हुए महम निवासी प्रकाश चंद ने बताया कि पाकिस्तान में उनके पिता मदनलाल, चाचा वजीर चंद, और ताऊ सूबा राम के पास 20 एकड़ जमीन थी। वर्ष 2003 में वह दूसरी कक्षा में पढ़ते थे। वहां पर हिंदुओं से खराब व्यवहार किया जाता था। उनको कक्षा में सबसे पीछे बैठाया जाता था। इतना ही नहीं वहां पर परिवार की बेटियां तक सुरक्षित नहीं थी। जबरन धर्म परिवर्तन कराकर शादी कर ली जाती थी। तंग आकर वह घर जमीन छोड़ कर 2005 में तीन माह के टूरिस्ट वीजा पर समझौता एक्सप्रेस से भारत आए। कुछ परिवार कलानौर खंड के गांव काहनौर में भी रह रहे हैं जो अब 20 से 25 परिवार बन चुके हैं, जो मदीना में रहते हैं।
मदीना में पूर्व विधायक के खेत में रहकर करने लगे खेती
हंस दास ने बताया कि उन्हें सबसे पहले पूर्व विधायक आनंद सिंह दांगी के खेतों में शरण मिली। वे वहीं पर रहने लगे तथा उनकी खेती संभाल ली । बताया कि उन सहित अन्य ग्रामीणों ने उनकी हर प्रकार से मदद की। उसके बाद दिन बीतते चले गए तथा अब सीएए कानून बन जाने से उनको अपार खुशी हो रही है। हालांकि उनमें से कुछ लोगों को 2019 में नागरिकता मिल चुकी है। यहां पर उनके बच्चे एमए तक की पढ़ाई पूरी कर रोजगार पा चुके हैं, लेकिन कुछ सदस्य अब भी ऐसे हैं जिनको नागरिकता नहीं मिल सकी है। इसके चलते सरकार की योजनाओं के लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है। अब सरकार से उम्मीद जगी है। इसके लिए उन्होंने सरकार का धन्यवाद किया है।
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रोहतक से गए मुस्लिम करते थे मदद
हंस दास ने बताया कि बंटवारे के बाद रोहतक जिले से पाकिस्तान गए मुस्लिम उनकी मदद करते थे। वह कहते थे कि बंटवारे के समय वहां के हिंदुओं ने उनकी खूब मदद की थी तो वे अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। कुछ समय बाद जब मदद करने वाले लोग बूढ़े हो गए तो नई पीढ़ियों ने उनकी राहों में कांटे बिछाने शुरू कर दिए।
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ऐसा भाया हरियाणा कि अब कभी नहीं छोड़ेंगे...
पाकिस्तान से आए हिंदू परिवार को मदीना गांव पसंद आ गया। लगभग 19 साल गांव में रहे तो यहां की मिट्टी की खुशबू भा गई है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लैया जिले में बसने वाले फूल चंद के रिश्तेदार फतेहाबाद चले गए हैं। पत्नी पठानो देवी के साथ बेटा लश्कर दास, हंस दास, तारिक लाल, चुन्नी लाल के अतिरिक्त लश्कर दास की पत्नी शुगना देवी व बेटे राजेश व राकेश हैं। हंस दास की यहां आकर करनाल निवासी सुमन के साथ शादी भी हुई, जिसका अब पूरा परिवार है। कुछ लोग खेती करते हैं, जबकि हंसदास ने गांव मदीना में ही टायर पंक्चर बनाने की दुकान कर रखी है।