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बारिश से बिछी धान, हॉपर से होगी खत्म
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सुनारिया गांव में धान के खेतों में भरा पानी । अमर उजाला
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बारिश, जलभराव और तेज हवाओं के कारण खेत में बिछी धान की जिस फसल पर हॉपर का हमला हुआ है वह बिल्कुल नहीं उबर पाएगी। क्योंकि उस पर कीटनाशक का स्प्रे नहीं हो सकेगा। ऐसे में वह फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। बाकी फसल की गुणवत्ता पर भी बुरा असर पड़ेगा।
रविवार को मौसम खराब हुआ, बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। धान के खेतों में पहले ही पानी भरा था, जिस कारण फसल बिछ गई। खंड कृषि अधिकारी डॉ. यशपाल दहिया ने बताया कि जिस फसल पर हॉपर का हमला हुआ है वह पूरी तरह खत्म हो जाएगी क्योंकि उस पर कीटनाशक का स्प्रे नहीं हो सकेगा, उसमें एक दाना भी नहीं बचेगा। जिस फसल पर हॉपर का हमला नहीं हुआ है वह भी बुरी तरह प्रभावित होगी। इसमें धान का दाना विकसित नहीं होगा, उसका वजन कम रह जाएगा। दाने का रंग भी काला पड़ सकता है। गौरतलब है कि जिले में बारिश इस बार फसलों के लिए मुसीबत बनकर आई है। सितंबर में अत्यधिक बारिश से खेतों में पानी भर गया था, वह अब तक खड़ा है। बाजरा, कपास समेत सभी फसलों को नुकसान पहुंचा है लेकिन धान का रकबा ज्यादा होने का कारण इसे भी काफी नुकसान पहुंचा है। जिले के बड़े हिस्से में धान के खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ था। किसानों को उम्मीद थी कि मौसम साफ रहेगा तो किसी तरह फसल की कटाई करेंगे। लेकिन रविवार को काफी बारिश हुई और तेज हवाएं चलीं। धान लगभग पक चुका है ऐसे में निचला हिस्सा भारी पौधे का बोझ नहीं उठा सका और सारी फसल बिछ गई। जिले में करीब 90 प्रतिशत बासमती की 1121 वैराइटी लगाई जाती है। बाकी 1509 और हाइब्रिड किस्मों की कटाई हो चुकी है, उनकी मंडी में बिक्री जारी है। लेकिन 1121 अभी भी खेतों में खड़ी है, जिसे अब काफी नुकसान पहुंचा है। डॉ. दहिया ने कहा कि इस समय बारिश से धान की कटाई लेट हो जाएगी। आमतौर पर धान की कटाई अक्तूबर अंत तक खत्म हो जाती है। लेकिन इस बार जलभराव के कारण अब तक काफी कटाई बची है। मौजूदा हालातों को देखते हुए बची फसल की कटाई अक्तूबर अंत से लेकर नवंबर मध्य तक चलने के आसार हैं। यह भी संभव है कि किसानों को जलभराव के बीच ही फसल कटवानी पड़े।
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रविवार को मौसम खराब हुआ, बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। धान के खेतों में पहले ही पानी भरा था, जिस कारण फसल बिछ गई। खंड कृषि अधिकारी डॉ. यशपाल दहिया ने बताया कि जिस फसल पर हॉपर का हमला हुआ है वह पूरी तरह खत्म हो जाएगी क्योंकि उस पर कीटनाशक का स्प्रे नहीं हो सकेगा, उसमें एक दाना भी नहीं बचेगा। जिस फसल पर हॉपर का हमला नहीं हुआ है वह भी बुरी तरह प्रभावित होगी। इसमें धान का दाना विकसित नहीं होगा, उसका वजन कम रह जाएगा। दाने का रंग भी काला पड़ सकता है। गौरतलब है कि जिले में बारिश इस बार फसलों के लिए मुसीबत बनकर आई है। सितंबर में अत्यधिक बारिश से खेतों में पानी भर गया था, वह अब तक खड़ा है। बाजरा, कपास समेत सभी फसलों को नुकसान पहुंचा है लेकिन धान का रकबा ज्यादा होने का कारण इसे भी काफी नुकसान पहुंचा है। जिले के बड़े हिस्से में धान के खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ था। किसानों को उम्मीद थी कि मौसम साफ रहेगा तो किसी तरह फसल की कटाई करेंगे। लेकिन रविवार को काफी बारिश हुई और तेज हवाएं चलीं। धान लगभग पक चुका है ऐसे में निचला हिस्सा भारी पौधे का बोझ नहीं उठा सका और सारी फसल बिछ गई। जिले में करीब 90 प्रतिशत बासमती की 1121 वैराइटी लगाई जाती है। बाकी 1509 और हाइब्रिड किस्मों की कटाई हो चुकी है, उनकी मंडी में बिक्री जारी है। लेकिन 1121 अभी भी खेतों में खड़ी है, जिसे अब काफी नुकसान पहुंचा है। डॉ. दहिया ने कहा कि इस समय बारिश से धान की कटाई लेट हो जाएगी। आमतौर पर धान की कटाई अक्तूबर अंत तक खत्म हो जाती है। लेकिन इस बार जलभराव के कारण अब तक काफी कटाई बची है। मौजूदा हालातों को देखते हुए बची फसल की कटाई अक्तूबर अंत से लेकर नवंबर मध्य तक चलने के आसार हैं। यह भी संभव है कि किसानों को जलभराव के बीच ही फसल कटवानी पड़े।
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