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Rohtak News: 8500 बच्चों तक पहुंचेंगे ओआरएस-जिंक, डायरिया से बचाने का अभियान शुरू
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सांपला। बदलते मौसम और मानसून के दौरान डायरिया के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने स्टॉप डायरिया अभियान शुरू किया है। 31 जुलाई तक चलने वाले इस अभियान के तहत पांच वर्ष से कम आयु के करीब 8500 बच्चों तक ओआरएस और जिंक की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
एसएमओ डॉ. रीटा गोयल ने बताया कि अभियान का उद्देश्य डायरिया से होने वाली जटिलताओं और बाल मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके लिए सांपला ब्लॉक के सभी उप स्वास्थ्य केंद्रों पर ओआरएस कॉर्नर बनाए गए हैं जहां लोगों को डायरिया की रोकथाम और उपचार संबंधी जानकारी भी दी जा रही है।
अभियान को सफल बनाने के लिए करीब 200 आशा वर्करों की ड्यूटी लगाई गई है। आशा कार्यकर्ता पांच वर्ष तक के बच्चों वाले परिवारों से संपर्क कर ओआरएस के पैकेट और जिंक की गोलियां वितरित करेंगी। साथ ही स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, हाथ धोने की आदत और डायरिया के शुरुआती लक्षणों के प्रति जागरूक करेंगी।
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विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर बुधवार को 200 बच्चों को ओआरएस और जिंक की गोलियां वितरित की गईं। डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि डायरिया होने पर बच्चे को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देना जरूरी है। यदि बच्चे को बार-बार उल्टी हो, अत्यधिक पतले दस्त हों, मल में खून आए, तेज बुखार हो, बच्चा सुस्त दिखाई दे या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
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एसएमओ डॉ. रीटा गोयल ने बताया कि अभियान का उद्देश्य डायरिया से होने वाली जटिलताओं और बाल मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके लिए सांपला ब्लॉक के सभी उप स्वास्थ्य केंद्रों पर ओआरएस कॉर्नर बनाए गए हैं जहां लोगों को डायरिया की रोकथाम और उपचार संबंधी जानकारी भी दी जा रही है।
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अभियान को सफल बनाने के लिए करीब 200 आशा वर्करों की ड्यूटी लगाई गई है। आशा कार्यकर्ता पांच वर्ष तक के बच्चों वाले परिवारों से संपर्क कर ओआरएस के पैकेट और जिंक की गोलियां वितरित करेंगी। साथ ही स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, हाथ धोने की आदत और डायरिया के शुरुआती लक्षणों के प्रति जागरूक करेंगी।
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विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर बुधवार को 200 बच्चों को ओआरएस और जिंक की गोलियां वितरित की गईं। डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि डायरिया होने पर बच्चे को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देना जरूरी है। यदि बच्चे को बार-बार उल्टी हो, अत्यधिक पतले दस्त हों, मल में खून आए, तेज बुखार हो, बच्चा सुस्त दिखाई दे या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।