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अधिकारिक खरीद बंद, अभी भी आ रहा है धान
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नई अनाज मंडी में आया धान। संवाद
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इस बार बारिश किसानों का पीछा नहीं छोड़ रही है। पहले बारिश से फसलें खराब हुईं, जलभराव किसानों के लिए मुसीबत बन गया। इसके चलते धान की कटाई लेट हो गई और फसल की बिक्री पर संकट आ गया है। धान की अधिकारिक खरीद बंद हो गई है और मंडी में काफी धान पड़ा है, अभी भी आ रहा है।
जिले में धान का कुल रकबा करीब 61 हजार हेक्टेयर है, जिसमें ज्यादातर बासमती का था। लेकिन इस बार बड़ी संख्या में किसानों ने पीआर धान भी लगाया था। पिछले साल पीआर धान का रकबा 1200 हेक्टेयर था, जो इस बार बढ़कर लगभग 2000 हेक्टेयर हो गया था। एमएसपी पर सिर्फ पीआर धान की ही अधिकारिक खरीद होती है। खेतों में पानी भरा होने के कारण इसकी कटाई लेट हो गई। मजदूरों का भी संकट था। बड़ी संख्या में मजदूर छठ पूजा के लिए बिहार लौट गए। इससे कटाई पर और बुरा असर पड़ा। इस कारण अभी भी धान मंडियों में आ रहा है। दोनों सीजन में एमएसपी पर फसलों की खरीद केंद्रीय मंत्रालय की अधिसूचना के आधार पर होती है। खरीफ सीजन में खरीद की अधिकारिक खरीद एक अक्तूबर से 15 नवंबर 2021 तक होनी थी। आमतौर पर समय पर फसल कट जाती है और 15 नवंबर तक सारे धान की खरीद हो जाती है। लेकिन इस बार फसल देरी से पकी और कटाई भी लेट हुई, जिस कारण 15 नवंबर के बाद भी धान मंडी में आ रहा है। मार्केट कमेटी के अनुसार 15 नवंबर तक 1,51,436 क्विंटल धान की खरीद हुई थी। जबकि, मंडी में 15 नवंबर तक 1,69,675 क्विंटल धान की आवक हुई थी। उसके बाद 19 नवंबर को 256 क्विंटल धान आया। इस तरह मंडी में 18-20 हजार क्विंटल धान पड़े होने की उम्मीद है। राज्य सरकार, केंद्र सरकार को सिफारिश करे और वह मान लें तभी इस फसल की अधिकारिक खरीद हो सकती है।
गेहूं में भी आया था संकट
इसी साल रबी सीजन में गेहूं की बिक्री पर भी संकट आया था। किलोई मंडी में गेहूं की कुछ बोरियां पड़ी रह गई थीं। निर्धारित तिथि 15 मई तक उनकी खरीद नहीं हो सकी थी। मार्केट कमेटी वालों ने उसके लिए आढ़तियों को दोषी ठहराया। आढ़तियों का कहना था कि पोर्टल न चलने के कारण ऐसा हुआ है। आखिर उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार के दखल के बाद एक मिलर को राजी किया गया। उसने क्वालिटी के आधार पर गेहूं की खरीद की थी। लेकिन गेहूं और धान में फर्क है, इसलिए स्थानीय स्तर पर मसला हल होने की उम्मीद कम ही है।
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आज डीसी से मिलेंगे किसान
अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि अभी भी बहुत धान बचा है, जिसकी खरीद नहीं हो सकी है। इस बार बारिश को देखते हुए केंद्र सरकार को खुद ही रियायत देनी चाहिए थी। सोमवार को उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार से मांग की जाएगी कि वह इस बारे में राज्य सरकार को सिफारिश भेजें।
15 नवंबर को पीआर धान की अधिकारिक खरीद बंद हो गई है। तब तक मंडी में 1,51,436 क्विंटल धान की खरीद हुई थी, जबकि 1,69,675 क्विंटल धान की आवक हुई थी। उसके बाद भी धान आया है। खरीद के बारे में हरियाणा वेयर हाउस कारपोरेशन ही फैसला ले सकता है।
- शिव कुमार, उप सचिव, मार्केट कमेटी, रोहतक
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जिले में धान का कुल रकबा करीब 61 हजार हेक्टेयर है, जिसमें ज्यादातर बासमती का था। लेकिन इस बार बड़ी संख्या में किसानों ने पीआर धान भी लगाया था। पिछले साल पीआर धान का रकबा 1200 हेक्टेयर था, जो इस बार बढ़कर लगभग 2000 हेक्टेयर हो गया था। एमएसपी पर सिर्फ पीआर धान की ही अधिकारिक खरीद होती है। खेतों में पानी भरा होने के कारण इसकी कटाई लेट हो गई। मजदूरों का भी संकट था। बड़ी संख्या में मजदूर छठ पूजा के लिए बिहार लौट गए। इससे कटाई पर और बुरा असर पड़ा। इस कारण अभी भी धान मंडियों में आ रहा है। दोनों सीजन में एमएसपी पर फसलों की खरीद केंद्रीय मंत्रालय की अधिसूचना के आधार पर होती है। खरीफ सीजन में खरीद की अधिकारिक खरीद एक अक्तूबर से 15 नवंबर 2021 तक होनी थी। आमतौर पर समय पर फसल कट जाती है और 15 नवंबर तक सारे धान की खरीद हो जाती है। लेकिन इस बार फसल देरी से पकी और कटाई भी लेट हुई, जिस कारण 15 नवंबर के बाद भी धान मंडी में आ रहा है। मार्केट कमेटी के अनुसार 15 नवंबर तक 1,51,436 क्विंटल धान की खरीद हुई थी। जबकि, मंडी में 15 नवंबर तक 1,69,675 क्विंटल धान की आवक हुई थी। उसके बाद 19 नवंबर को 256 क्विंटल धान आया। इस तरह मंडी में 18-20 हजार क्विंटल धान पड़े होने की उम्मीद है। राज्य सरकार, केंद्र सरकार को सिफारिश करे और वह मान लें तभी इस फसल की अधिकारिक खरीद हो सकती है।
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गेहूं में भी आया था संकट
इसी साल रबी सीजन में गेहूं की बिक्री पर भी संकट आया था। किलोई मंडी में गेहूं की कुछ बोरियां पड़ी रह गई थीं। निर्धारित तिथि 15 मई तक उनकी खरीद नहीं हो सकी थी। मार्केट कमेटी वालों ने उसके लिए आढ़तियों को दोषी ठहराया। आढ़तियों का कहना था कि पोर्टल न चलने के कारण ऐसा हुआ है। आखिर उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार के दखल के बाद एक मिलर को राजी किया गया। उसने क्वालिटी के आधार पर गेहूं की खरीद की थी। लेकिन गेहूं और धान में फर्क है, इसलिए स्थानीय स्तर पर मसला हल होने की उम्मीद कम ही है।
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आज डीसी से मिलेंगे किसान
अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि अभी भी बहुत धान बचा है, जिसकी खरीद नहीं हो सकी है। इस बार बारिश को देखते हुए केंद्र सरकार को खुद ही रियायत देनी चाहिए थी। सोमवार को उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार से मांग की जाएगी कि वह इस बारे में राज्य सरकार को सिफारिश भेजें।
15 नवंबर को पीआर धान की अधिकारिक खरीद बंद हो गई है। तब तक मंडी में 1,51,436 क्विंटल धान की खरीद हुई थी, जबकि 1,69,675 क्विंटल धान की आवक हुई थी। उसके बाद भी धान आया है। खरीद के बारे में हरियाणा वेयर हाउस कारपोरेशन ही फैसला ले सकता है।
- शिव कुमार, उप सचिव, मार्केट कमेटी, रोहतक