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Rohtak News: अब गंभीर मरीज पीजीआई में रेफर नहीं होंगे
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29सीटीके04...नागरिक अस्पताल में शुरू हुई हाई डिपेंडेंसी यूनिट। संवाद
रोहतक। अब सामान्य अस्पताल से एचडीयू की जरूरत वाले गंभीर मरीजों को निजी या फिर पीजीआई रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। चार बेड के हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) और आईसीयू की शुरुआत होने से गंभीर मरीजों को यहीं बेहतर इलाज मिलेगा। यह जिलावासियों के लिए अच्छी खबर है।
नागरिक अस्पताल में चार-चार बेड के एचडीयू और आईसीयू की शुरुआत होने से बच्चों और वयस्क दोनों ही गंभीर मरीजों को जो पहले पीजीआई रेफर कर दिया जाता था, अब उन्हें यहीं पर वेंटिलेटर पर रख उनकी चिकित्सा की जाएगी। इसके लिए तीन चिकित्सकों को मुख्यालय से भेजा गया है। अस्पताल प्रशासन ने पहले से कार्यरत शिशु रोग विभाग के चिकित्सकों को ऑब्जर्वेशन की ड्यूटी लगाई है, जो कि मरीज पर नजर बनाए रखेंगे। अब क्रिटिकल केयर में आईसीयू, एचडीयू, एसएनसीयू मिलाकर 32 बेड हो गए हैं।
रेफर के दौरान नवजात मरीजों की आ जाती थी जान पर
हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) के होने से सबसे ज्यादा फायदा नवजातों को होगा। क्योंकि वयस्क गंभीर मरीजों को तो पहले ही तीमारदार पीजीआई में जांच को ले जाते हैं। लेकिन बच्चों के लिए मामला अलग है। सामान्य अस्पताल में रोजाना करीब 10 से 20 बच्चे जन्म लेते हैं। इनमें से इक्का-दुक्का शिशुओं को एचडीयू की आवश्यकता पड़ती है। एचडीयू न होने के कारण तीमारदारों को आनन-फानन में शिशु को लेकर निजी अस्पताल या तो पीजीआई लेकर जाना पड़ता था। इससे उनका अधिक धन भी खर्चा होता था। साथ ही रेफर के दौरान कई बार मरीज के जान पर भी बन जाती थी।
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वर्जन
चार-चार बेड के एचडीयू और आईसीयू की शुरुआत कर दी गई है। अब वयस्क और शिुशु दोनों ही गंभीर मरीजों का यहां इलाज हो सकेगा। इसके लिए मुख्यालय से भी तीन डॉक्टर आए हैं। इसके अलावा शिशु रोग विभाग के पहले से ही तीन डॉक्टर मौजूद हैं। अब गंभीर मरीजों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। सारी सुविधाएं एक ही जगह प्राप्त हो रही हैं।
-डॉ. पुष्पेंद्र चिकित्सक, चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल
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नागरिक अस्पताल में चार-चार बेड के एचडीयू और आईसीयू की शुरुआत होने से बच्चों और वयस्क दोनों ही गंभीर मरीजों को जो पहले पीजीआई रेफर कर दिया जाता था, अब उन्हें यहीं पर वेंटिलेटर पर रख उनकी चिकित्सा की जाएगी। इसके लिए तीन चिकित्सकों को मुख्यालय से भेजा गया है। अस्पताल प्रशासन ने पहले से कार्यरत शिशु रोग विभाग के चिकित्सकों को ऑब्जर्वेशन की ड्यूटी लगाई है, जो कि मरीज पर नजर बनाए रखेंगे। अब क्रिटिकल केयर में आईसीयू, एचडीयू, एसएनसीयू मिलाकर 32 बेड हो गए हैं।
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रेफर के दौरान नवजात मरीजों की आ जाती थी जान पर
हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) के होने से सबसे ज्यादा फायदा नवजातों को होगा। क्योंकि वयस्क गंभीर मरीजों को तो पहले ही तीमारदार पीजीआई में जांच को ले जाते हैं। लेकिन बच्चों के लिए मामला अलग है। सामान्य अस्पताल में रोजाना करीब 10 से 20 बच्चे जन्म लेते हैं। इनमें से इक्का-दुक्का शिशुओं को एचडीयू की आवश्यकता पड़ती है। एचडीयू न होने के कारण तीमारदारों को आनन-फानन में शिशु को लेकर निजी अस्पताल या तो पीजीआई लेकर जाना पड़ता था। इससे उनका अधिक धन भी खर्चा होता था। साथ ही रेफर के दौरान कई बार मरीज के जान पर भी बन जाती थी।
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चार-चार बेड के एचडीयू और आईसीयू की शुरुआत कर दी गई है। अब वयस्क और शिुशु दोनों ही गंभीर मरीजों का यहां इलाज हो सकेगा। इसके लिए मुख्यालय से भी तीन डॉक्टर आए हैं। इसके अलावा शिशु रोग विभाग के पहले से ही तीन डॉक्टर मौजूद हैं। अब गंभीर मरीजों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। सारी सुविधाएं एक ही जगह प्राप्त हो रही हैं।
-डॉ. पुष्पेंद्र चिकित्सक, चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल

29सीटीके04...नागरिक अस्पताल में शुरू हुई हाई डिपेंडेंसी यूनिट। संवाद