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नोट बंदी की मार : नट बोल्ट उद्योग को छह दिन में करीब 500 करोड़ का फटका

Tue, 15 Nov 2016 01:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Tue, 15 Nov 2016 01:59 AM IST
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no ruppes  in market, nut bolt industry about 500 million shot in six days
- फोटो : amar ujala
नोट बंदी की मार शहर के नट बोल्ट और आटो पार्ट्स उद्योग पर भी पड़ी है। बताया जा रहा है कि नौ नवंबर से अब तक (6 दिन) नट बोल्ट उद्योग को करीब 500 करोड़ रुपये का फटका लग चुका है। उद्यमियों का कहना है कि हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ जाएगा। कच्चा माल नहीं आने और तैयार माल नहीं जाने से फैक्ट्रियों में उत्पादन घटाना पड़ गया है। स्थिति यह है कि तकरीबन 24 घंटे चलने वाली फैक्ट्रियां केवल एक शिफ्ट में आठ घंटे चलाई जा रही हैं। इस वजह से अधिकतर मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। 
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रोहतक की फैक्ट्रियों में बनने वाले नट बोल्ट और आटो पार्ट्स की सप्लाई कई राज्यों दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र के अलावा विदेशों में होती है। यहां के नट बोल्ट रेलवे, मेट्रो, रक्षा विभाग में उपकरण बनाने में इस्तेमाल किए जाते हैं। सरकार के 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने से नट बोल्ट और आटो पार्ट्स उद्योग ठप हो गया है। नकदी की कमी के कारण सेल एवं परचेज नहीं हो पा रही है। बताया जा रहा है कि नकदी की कमी की वजह से न तो कच्चा माल आ पा रहा है, न ही उत्पादित माल जा पा रहा है। ट्रांसपोर्ट की समस्या भी आड़े आ रही है।
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ट्रांसपोर्ट वाले पहले रुपये मांगते हैं, लेकिन उनको देने के लिए पैसे नहीं हैं। उद्यमियों का कहना है कि उन्होंने पुराने नोट बैंक में जमा करा दिए हैं, लेकिन बदले में नए नोट पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहे हैं। बैंक से जितनी नकदी दी जा रही है उतने में उद्योग नहीं चल सकते। हर रोज लाखों रुपये की जरूरत होती है और बैंक से दिए जा रहे हैं बीस हजार। उद्यमियों की मानें तो एक या दो दिन तक होने वाले नुकसान को तो कवर कर लेते हैं, लेकिन जिस तरह का नुकसान हो रहा है, वह अगले एक महीने तक सामान्य नहीं होगा। माना जा रहा है कि दिसंबर के अंत तक उद्योग सुचारू हो सकेंगे।
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12 घंटे से 8 घंटे कर दी मजदूरों की शिफ्ट
नट बोल्ट और आटो पार्ट्स फैक्ट्रियों में काम की शिफ्ट 12 घंटे की रहती थी। जबकि फैक्ट्री चलाने की शिफ्ट 24 घंटे तक चलती थी। आर्डर ज्यादा होने से मजदूरों से दो से तीन शिफ्टों में काम कराया जाता था। नोट बंदी के कारण न माल आ रहा है न सप्लाई हो रही है। ऐसे में मजदूरों की शिफ्ट 8 घंटे कर दी गई है। इस तरह 24 घंटे चलने वाली फैक्ट्रियां आठ घंटे ही उत्पादन कर रही हैं। 
 

उद्योग पूरी तरह से ठप हो गया है। मैटीरियल नहीं आने से काम नहीं हो रहा है। कर्मचारियों को पूरे वेतन देने पड़ रहे हैं। पुराने नोट देते हैं तो वह लेने में आनाकानी करते हैं। बैंकों में रुपये बदलने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। सरकार की गाइड लाइन पर भी बैंक काम नहीं कर रहे हैं। रुपये बदलने को कहते हैं तो पहले खाते में जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। बैंक वालों की मनमानी के कारण भी परेशानी है। 
- एसके खटौड़, अध्यक्ष इंडस्ट्रियल एसोसिएशन 

हमारे पास जितना भी रुपया था, उसको बैंक में जमा करा दिया है। लेकिन बैंकों से नए नोट सीमित ही मिले हैं। मुझे केवल 10 हजार रुपये घर खर्च के लिए मिले हैं तो उद्योग को कैसे चला पाएंगे? उद्योग पर असर नहीं बल्कि वह तो पूरी तरह से ठप हो गया है। 

- राजेंद्र बंसल, एमडी रोहित स्टील

नोट बंद होने से कुछ परेशानी हुई है। इसके बावजूद कैश की जगह चेक व आनलाइन पेमेंट ज्यादा कर रहे हैं। हम टैक्स भरते हैं। किसी तरह की कोई छिपी हुई नकदी नहीं है तो ऐसा करने में कोई परेशानी नहीं है। 
- राजेश जैन, एमडी एलपीएस बोसार्ड 
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