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नया कानून... अब 14 दिन बिना एफआईआर के जांच कर सकती है पुलिस : हुड्डा
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01सीटके34... जिला जेल परिसर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद एडीजे अनिल कौशिक। स्रोत: प
रोहतक। केंद्र सरकार ने एक जुलाई से पूरे देश में पुराने कानून खत्म कर नए कानून लागू कर दिए हैं। अब आईपीसी व सीआरपीसी खत्म कर दी गई हैं। उनकी जगह तीन नए कानून लागू किए गए हैं, इनको लेकर वकील बेहद परेशान हैं। वकील जितेंद्र हुड्डा ने सोमवार को जूनियर साथियों को नए कानून की बारीकियां समझाईं।
जितेंद्र ने बताया कि नए कानून में पुलिस के अधिकार बढ़ गए हैं। इससे कानून के दुरुपयोग की संभावना बढ़ गई है। पहले जहां, जांच अधिकारी को तत्काल केस दर्ज करना होता था, अब 14 दिन बिना एफआईआर के जांच अधिकारी ऐसे केसों की जांच कर सकता है, जिनमें सजा का प्रावधान सात साल या इससे कम है। पहले पुलिस गिरफ्तारी की 15 दिन की अवधि में अदालत की अनुमति से आरोपी को रिमांड पर ले सकती थी, लेकिन अब पुलिस जांच के साथ-साथ रिमांड अवधि बढ़ाने की अदालत से मांग कर सकती है। इतना ही नहीं, अगर जमानत मिल जाती है तब भी नए तथ्य के आधार पर दोबारा गिरफ्तारी की जा सकती है। उधर, कोर्ट में पुराने केसों में आम लोग व वकील पेश हुए और अपनी पैरवी की। हालांकि चर्चा नए कानूनों की रही। एक वकील ने बताया कि अभी थानों में नए कानून के तहत केस दर्ज हो रहे हैं। अदालत में आने में समय लगेगा।
डिजिटल तथ्यों को सबूत के तौर पर मिली मान्यता : एडीजे
सुनारिया स्थित जिला जेल परिसर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से सोमवार को ट्रेनिंग कैंप लगाया गया। इसमें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनिल कौशिक मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने बताया कि सोमवार से भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 लागू हो गए हैं। इन कानूनों में अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है। दस्तावेजों की परिभाषा का विस्तार कर इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकाॅर्ड, ईमेल, सर्वर लांगस, कम्प्यूटर, स्मार्ट फोन, लैपटॉप, एसएमएस, वेबसाइट, लोकेशन साक्ष्य, डिवाइस पर उपलब्ध मेल और मैसेज इत्यादि को कानूनी वैधता दी गई है। इस मौके पर जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसलर एवं एडवोकेट राजबीर कश्यप, कामिनी चौपड़ा, आशुतोष शर्मा, जयकिशन व जेल के दूसरे अधिकारी भी मौजूद रहे।
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जितेंद्र ने बताया कि नए कानून में पुलिस के अधिकार बढ़ गए हैं। इससे कानून के दुरुपयोग की संभावना बढ़ गई है। पहले जहां, जांच अधिकारी को तत्काल केस दर्ज करना होता था, अब 14 दिन बिना एफआईआर के जांच अधिकारी ऐसे केसों की जांच कर सकता है, जिनमें सजा का प्रावधान सात साल या इससे कम है। पहले पुलिस गिरफ्तारी की 15 दिन की अवधि में अदालत की अनुमति से आरोपी को रिमांड पर ले सकती थी, लेकिन अब पुलिस जांच के साथ-साथ रिमांड अवधि बढ़ाने की अदालत से मांग कर सकती है। इतना ही नहीं, अगर जमानत मिल जाती है तब भी नए तथ्य के आधार पर दोबारा गिरफ्तारी की जा सकती है। उधर, कोर्ट में पुराने केसों में आम लोग व वकील पेश हुए और अपनी पैरवी की। हालांकि चर्चा नए कानूनों की रही। एक वकील ने बताया कि अभी थानों में नए कानून के तहत केस दर्ज हो रहे हैं। अदालत में आने में समय लगेगा।
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डिजिटल तथ्यों को सबूत के तौर पर मिली मान्यता : एडीजे
सुनारिया स्थित जिला जेल परिसर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से सोमवार को ट्रेनिंग कैंप लगाया गया। इसमें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनिल कौशिक मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने बताया कि सोमवार से भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 लागू हो गए हैं। इन कानूनों में अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है। दस्तावेजों की परिभाषा का विस्तार कर इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकाॅर्ड, ईमेल, सर्वर लांगस, कम्प्यूटर, स्मार्ट फोन, लैपटॉप, एसएमएस, वेबसाइट, लोकेशन साक्ष्य, डिवाइस पर उपलब्ध मेल और मैसेज इत्यादि को कानूनी वैधता दी गई है। इस मौके पर जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसलर एवं एडवोकेट राजबीर कश्यप, कामिनी चौपड़ा, आशुतोष शर्मा, जयकिशन व जेल के दूसरे अधिकारी भी मौजूद रहे।

01सीटके34... जिला जेल परिसर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद एडीजे अनिल कौशिक। स्रोत: प
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