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नेपाली युवती से गैंगरेप व कबूलपुर हत्याकांड में फांसी का इंतजार
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सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद शुक्रवार सुबह साढ़े पांच बजे निर्भया केस के दोषियों को तिहाड़ जेल में फांसी दी जाएगी। निर्भया केस जैसे जघन्य अपराध के दो मामले रोहतक से भी जुड़े हुए हैं, जो सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। दोनों केस में पीड़ित पक्ष को इंतजार है कि कब जिला अदालत व हाईकोर्ट द्वारा दोषी करार अभियुक्तों को सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा को हरी झंडी मिलती है।
कबूलपुर कांड : गांव के ही युवक के साथ मिल परिवार की बेटी ने की थी सात सदस्यों की हत्या
करीब एक दशक पहले जिले के गांव कबूलपुर में गांव के ही एक युवक के साथ मिलकर परिवार की बेटी ने सात सदस्यों की नृशंस हत्या कर दी थी। मामले में स्थानीय अदालत ने युवती व युवक को फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी दोनों की सजा पर मुहर लगाई। हालांकि 2018 में सुप्रीम कोर्ट में फांसी की सजा पर स्टे लग गया, अब भी मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
आरोप था कि कबूलपुर गांव निवासी सोनम ने गांव के युवक नवीन के साथ मिलकर 14 सितंबर 2009 को अपने ही परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड में सदर थाना पुलिस ने सोनम व नवीन के अलावा झज्जर के छारा गांव निवासी जयवीर और ओमबीर के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। तत्कालीन सेशन कोर्ट ने अदालत में चली लंबी लड़ाई के बाद 2014 में सुबूत व तथ्यों के आधार पर सोनम व नवीन को फांसी की सजा सुनाई थी। कोर्ट में पेश चालान के मुताबिक सोनम ने नवीन के साथ साजिश रचते हुए परिवार के सदस्यों को खाने में नींद की गोलियां खिलाईं। सोनम ने खुद का व्रत बताकर खाना नहीं खाया। इसके बाद दोनों ने बारी-बारी से सभी का रस्सी से गला घोंट कर मौत के घाट उतार दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद सोनम ने ड्रामा रचते हुए खुद को बाथरूम में बंद कर लिया। सुबह जब ग्रामीणों को हादसे का पता चला तो सोनम बाथरूम में ही मिली। उसने अज्ञात लोगों पर लूटपाट करने और परिवार के सदस्यों की हत्या करने का आरोप लगाया। पुलिस ने मामले में तफ्तीश की तो आरोपी ने वारदात कुबूल कर ली।
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सुप्रीम कोर्ट में बचाव पक्ष का तर्क, सोनम नाबालिग
हाईकोर्ट के बाद मामला 2018 में सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। वहां सोनम की तरफ से बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी थी कि वारदात के समय सोनम की उम्र 17 साल 6 माह थी। यह बात वे सेशन कोर्ट व हाईकोर्ट में नहीं साबित हो सकी। सुप्रीम कोर्ट ने नवीन व सोनम की फांसी पर फैसले तक रोक लगा दी थी।
सोनम के इन परिजनों की हुई थी हत्या
60 वर्षीय दादी भूरी देवी
35 वर्षीय मां प्रोमिला
40 वर्षीय पिता सुरेंद्र
16 वर्षीय भाई अरविंद
10 वर्षीय बहन मोनिका
12 वर्षीय चचेरी बहन सोनिका
08 वर्षीय चचेरा भाई विशाल
नेपाली युवती गैंगरेप : पांच साल पहले नौ लोगों ने बर्बरता से की थी हत्या, सात दोषी करार
दिल्ली की निर्भया कांड की तर्ज पर रोहतक में पांच साल पहले नेपाली युवती गैंग रेप व हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। मामले में अदालत ने नेपाली युवती से गैंगरेप और दरिंदगी से हत्या के बहुचर्चित मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मामले में सभी सातों बालिग आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। जबकि केस में आठवें नाबालिग नेपाली मूल के आरोपी का केस जुवेनाइल कोर्ट में चल रहा था। वहीं, नौंवे आरोपी ने पकड़े जाने से पहले ही दिल्ली में खुदकुशी कर ली थी। रोहतक कोर्ट के इतिहास में 2015 में यह पहली बार हुआ था कि किसी मामले में सातों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो। स्थानीय कोर्ट के बाद मामला हाईकोर्ट में चला गया, जहां हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि ऐसे मामलों में अगर फांसी से भी बड़ी सजा हो, वह दी जाए। इसके बाद बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जहां अभियुक्त गद्दी खेड़ी गांव निवासी पवन, प्रमोद उर्फ पदम, सरवर उर्फ बिल्लू, मनबीर उर्फ मन्नी, सुनील उर्फ मिढ़ा, सुनील उर्फ शीला और राजेश उर्फ घुचडू को फांसी की सजा देने का मामला अब भी विचाराधीन है।
बता दें कि नेपाली मूल की युवती मानसिक तौर पर पूरी तरह स्वस्थ नहीं थी। वह अपनी बहन के घर रोहतक शहर में रह रही थी। अचानक घर से चली गई। अगले दिन उसका शव हिसार रोड पर गद्दी खेड़ी के खेतों में क्षत विक्षप्त हालत में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला था कि युवती की बर्बरता से हत्या की गई। साथ ही प्राइवेट पार्ट में पत्थर व लकड़ी के टुकड़े तक मिले थे।
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कबूलपुर कांड : गांव के ही युवक के साथ मिल परिवार की बेटी ने की थी सात सदस्यों की हत्या
करीब एक दशक पहले जिले के गांव कबूलपुर में गांव के ही एक युवक के साथ मिलकर परिवार की बेटी ने सात सदस्यों की नृशंस हत्या कर दी थी। मामले में स्थानीय अदालत ने युवती व युवक को फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी दोनों की सजा पर मुहर लगाई। हालांकि 2018 में सुप्रीम कोर्ट में फांसी की सजा पर स्टे लग गया, अब भी मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
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आरोप था कि कबूलपुर गांव निवासी सोनम ने गांव के युवक नवीन के साथ मिलकर 14 सितंबर 2009 को अपने ही परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड में सदर थाना पुलिस ने सोनम व नवीन के अलावा झज्जर के छारा गांव निवासी जयवीर और ओमबीर के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। तत्कालीन सेशन कोर्ट ने अदालत में चली लंबी लड़ाई के बाद 2014 में सुबूत व तथ्यों के आधार पर सोनम व नवीन को फांसी की सजा सुनाई थी। कोर्ट में पेश चालान के मुताबिक सोनम ने नवीन के साथ साजिश रचते हुए परिवार के सदस्यों को खाने में नींद की गोलियां खिलाईं। सोनम ने खुद का व्रत बताकर खाना नहीं खाया। इसके बाद दोनों ने बारी-बारी से सभी का रस्सी से गला घोंट कर मौत के घाट उतार दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद सोनम ने ड्रामा रचते हुए खुद को बाथरूम में बंद कर लिया। सुबह जब ग्रामीणों को हादसे का पता चला तो सोनम बाथरूम में ही मिली। उसने अज्ञात लोगों पर लूटपाट करने और परिवार के सदस्यों की हत्या करने का आरोप लगाया। पुलिस ने मामले में तफ्तीश की तो आरोपी ने वारदात कुबूल कर ली।
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सुप्रीम कोर्ट में बचाव पक्ष का तर्क, सोनम नाबालिग
हाईकोर्ट के बाद मामला 2018 में सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। वहां सोनम की तरफ से बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी थी कि वारदात के समय सोनम की उम्र 17 साल 6 माह थी। यह बात वे सेशन कोर्ट व हाईकोर्ट में नहीं साबित हो सकी। सुप्रीम कोर्ट ने नवीन व सोनम की फांसी पर फैसले तक रोक लगा दी थी।
सोनम के इन परिजनों की हुई थी हत्या
60 वर्षीय दादी भूरी देवी
35 वर्षीय मां प्रोमिला
40 वर्षीय पिता सुरेंद्र
16 वर्षीय भाई अरविंद
10 वर्षीय बहन मोनिका
12 वर्षीय चचेरी बहन सोनिका
08 वर्षीय चचेरा भाई विशाल
नेपाली युवती गैंगरेप : पांच साल पहले नौ लोगों ने बर्बरता से की थी हत्या, सात दोषी करार
दिल्ली की निर्भया कांड की तर्ज पर रोहतक में पांच साल पहले नेपाली युवती गैंग रेप व हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। मामले में अदालत ने नेपाली युवती से गैंगरेप और दरिंदगी से हत्या के बहुचर्चित मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मामले में सभी सातों बालिग आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। जबकि केस में आठवें नाबालिग नेपाली मूल के आरोपी का केस जुवेनाइल कोर्ट में चल रहा था। वहीं, नौंवे आरोपी ने पकड़े जाने से पहले ही दिल्ली में खुदकुशी कर ली थी। रोहतक कोर्ट के इतिहास में 2015 में यह पहली बार हुआ था कि किसी मामले में सातों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई हो। स्थानीय कोर्ट के बाद मामला हाईकोर्ट में चला गया, जहां हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि ऐसे मामलों में अगर फांसी से भी बड़ी सजा हो, वह दी जाए। इसके बाद बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जहां अभियुक्त गद्दी खेड़ी गांव निवासी पवन, प्रमोद उर्फ पदम, सरवर उर्फ बिल्लू, मनबीर उर्फ मन्नी, सुनील उर्फ मिढ़ा, सुनील उर्फ शीला और राजेश उर्फ घुचडू को फांसी की सजा देने का मामला अब भी विचाराधीन है।
बता दें कि नेपाली मूल की युवती मानसिक तौर पर पूरी तरह स्वस्थ नहीं थी। वह अपनी बहन के घर रोहतक शहर में रह रही थी। अचानक घर से चली गई। अगले दिन उसका शव हिसार रोड पर गद्दी खेड़ी के खेतों में क्षत विक्षप्त हालत में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला था कि युवती की बर्बरता से हत्या की गई। साथ ही प्राइवेट पार्ट में पत्थर व लकड़ी के टुकड़े तक मिले थे।