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न रोजगार सृजन न ही किसानों का रखा ध्यान
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अमर उजाला कार्यालय में शनिवार को टीवी पर बजट देखते शहर के प्रबुद्ध जन।--- अमर उजाला
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वर्ष 2020-21 के बजट में न रोजगार के नए अवसर है, न कृषि क्षेत्र में किसानों पर ध्यान। स्वास्थ्य व शिक्षा क्षेत्र भी बजट से अछूता रहा। बजट को लेकर शनिवार को अमर उजाला कार्यालय में हुए संवाद कार्यक्रम में समाज के प्रबुद्धजनों ने अपने विचार रखे। इनमें कुछ बजट से असंतुष्ट तो कुछ संतुष्ट नजर आए। युवाओं के रोजगार व किसानों की आय को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से लोग मायूस हैं। वहीं, सरकार की आयकर स्लैब को लोगों ने राहत भरा बताया।
बजट में कर्जा मुक्ति, न कर्ज माफी का जिक्र
सरकार ने नए बजट में किसान हित व खेती को शामिल नहीं किया है। यही वजह है कि कर्जा मुक्ति व कर्ज माफी का जिक्र तक नहीं किया गया है। किसान की आय दोगुना करने का दावा तो किया मगर यह किस तरह होगा, इसकी रूपरेखा ही नहीं दर्शाई गई। स्वामीनाथन आयोग की बजट सत्र में चर्चा तक नहीं की गई। फसल बीमा के नाम पर तीन कंपनियों को लाभ मिला। किसान को सभी फसलों का लाभकारी मूल्य देने के बारे में स्थिति ही स्पष्ट नहीं है।
- प्रीत सिंह, उपाध्यक्ष, किसान सभा।
निजीकरण पर रहा बजट का फोकस
बजट का फोकस निजीकरण पर रहा। शिक्षा, रेल व अन्य क्षेत्र को सरकार पीपीपी मोड़ पर लाने की तैयारी में है। कार्पोरेट सेक्टर को लाभांवित करने वाले इस बजट में किसानों की आय दो गुना करने का पैरामीटर चर्चा से परे रहा। सरकारी उपक्रम बंद कर ठेका प्रथा आधारित बजट में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत भी खानापूर्ति नजर आई। यह सिर्फ नारे तक सीमित रहा। यही वजह है कि अपराध बढ़ रहा है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
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- कदम सिंह, पार्षद।
आयकर स्लैब से आम आदमी को कुछ राहत
बजट में आयकर स्लैब कुछ राहत देने वाली है। इससे रिवेन्यू बढ़ेगा। यह रिवेन्यू विकास कार्यों को गति देगा। आम आदमी व व्यापारी को लाभ होगा, मगर बजट से उम्मीद पूरी नहीं हुई। सरकार से जीएसटी की दर कम करने की उम्मीद थी। यह राहत नहीं मिली। सौर ऊर्जा पर जोर देते हुए सोलर ट्यूबवेल लगाने की योजना है। यह भी काफी हद तक राहत भरा साबित होगा। बंजर जमीन पर सौर प्लांट लगाकर किसान आय अर्जित कर सकेंगे।
- गुलशन निझावन, व्यापारी।
हवा, पानी स्वच्छ करने का दावा
बजट में किसान के साथ आम आदमी व व्यापारी वर्ग का ध्यान नहीं रखा गया है। सरकार से रियायत की उम्मीद थी। टैक्स में छूट का दावा किया गया है। राहत कैसे मिलेगी यह नहीं बताया गया है। स्वच्छ हवा व स्वच्छ पानी का प्रावधान किया गया है। इसे उतनी तवज्जो नहीं दी गई, जितनी दी जानी चाहिए थी। सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण पर भी ध्यान नहीं दिया है। इसे कैसे नियंत्रित किया जाए व महंगाई से कैसे निपटा जाए, ये क्षेत्र बजट में अछूते रहे हैं।
- राजेश कुमार, व्यापारी।
किसान मजदूर के लिए नहीं दिखी राहत
सरकार के इस बजट में किसान व मजदूर के लिए राहत नहीं दिखी है। हाईवे बनाने की बात कही गई है। यह अच्छा है, मगर इसके लिए किसानों की ली जाने वाली जमीन का उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। जींद में इसी मुद्दे को लेकर अरसे से किसान हड़ताल पर हैं। सरकार हर जगह मुआवजा अलग दे रही है। डीसी रेट नहीं दिए जा रहे हैं। इस बारे में कोई सुनवाई भी नहीं हो रही है। सरकार ने बजट में केवल अपना ध्यान रखा। आम आदमी की फिक्र नहीं की गई।
- सूबेदार सुमेर सिंह, जिला उपाध्यक्ष, किसान सभा।
जैविक उर्वरक से कंपनी कमाएंगी नोट
बजट में सोलर पंप की बात कही गई है। यह गले नहीं उतर रही है। घोषणा के बाद कई शर्तें ऐसी होती हैं, जिन्हें किसान पूरी नहीं कर पाता है। हालात ये हैं कि किसान डीजल से ही ट्यूबवेल चलाने को विवश हैं। बजट में बीमा कंपनियों का लाभ नहीं दिखाया गया है। जैविक उर्वरक की बात की गई है। इसके लिए करोड़ों रुपये का बजट निजी कंपनी को दिया जाना है। इससे किसान के बजाय निजी कंपनी को लाभ होगा। वही उर्वरक बेच कर नोट कमाएंगी।
- सुनील, किसान।
भर्ती एजेंसी के बजाय रोजगार कार्यालय से हो नियुक्ति
बजट से स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार से बड़ी राहत की उम्मीद थी। यह सब सरकार पीपीपी मोड़ पर लाना चाहती है। हवा साफ करने का दावा गंगा की सफाई की तरह नजर आ रहा है। आयुष्मान भारत योजना जमीनी स्तर पर नहीं है। एनएबीएच की सुविधा नहीं है। स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने का प्रावधान नहीं है। निजी बैंकों में नियुक्ति के लिए भर्ती एजेंसी बनाने की बात की गई है। यह नियुक्ति रोजगार कार्यालय में दर्ज नामों से वरिष्ठता के आधार पर की जाए।
- पदम सिंह नरवल, समाजसेवी।
गांवों को इंटरनेट से जोड़ने की तैयारी
बजट में इस वर्ष भी किसान की आय दोगुना करने की बात कही गई है। यह कैसे होगा, इस बारे में कुछ नहीं बताया गया है। बैंकिंग क्षेत्र में भी बड़ी उठा पटक चल रही है। एक तरफ करोड़ों रुपये की आर्थिक मदद की बात कही जा रही है। दूसरी तरफ बैंकों को मर्ज किया जा रहा है। गांवों को इनटरनेट से जोड़ने की तैयारी है। जबकि सड़क व परिवहन से गांव अब तक जुड़े ही नहीं है। रोजगार के अवसर नहीं हैं। ऐसे में इंटरनेट से जोड़ना कितना किफायती है, यह सोचने लायक है।
- अमित अहलावत, कर्मचारी, निजी कंपनी।
युवाओं के लिए निराशाजनक रहा बजट
बजट में किसान की नहीं युवाओं को भी दरकिनार किया गया है। युवाओं के लिए रोजगार के प्रावधान न करके इसे निराशाजनक बना दिया गया है। सरकार उपक्रमों की हिस्सेदारी बेच रही है। सार्वजनिक क्षेत्र को भी निजी हाथों में देने की तैयारी है। ऐसे में नए रोजगार के प्रावधान अहम हैं। जबकि इस ओर सोचा ही नहीं गया है। बजट में युवाओं के लिए रोजगार के प्रावधान का पहलू पूरी तरह छूटा है। ऐसे में बजट किसी भी तरह आम आदमी के हित में नहीं है।
- अनुराग परवाना, कर्मचारी, निजी कंपनी।
बजट ने किसानों को किया निराश
सरकार ने बजट में किसानों व किसान हित को दरकिनार किया है। उन्हें कुछ नहीं दिया है। इसलिए किसान वर्ग बजट से पूरी तरह निराश हैं। सरकार किसान वर्ग को दबाने में लगी है। यही वजह है कि उसकी कर्जा मुक्ति पर ध्यान नहीं दिया गया है। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू कर सरकार किसानों का भला कर सकती है। इस बार बजट में इसकी उम्मीद थी, मगर यह उम्मीद अधूरी रही। इससे किसान वर्ग आहत है।
- नरेश मलिक, किसान।
जीएसटी की चोरी रोकने का नहीं है प्रावधान
बजट में आयकर के नए स्लैब दिए हैं। इसमें पांच लाख से 15 लाख रुपये वार्षिक आय की कर सीमा तय की है। इसमें सुधार की गुंजाइश है। पहली स्लैब पांच से साढ़े सात लाख रुपये के लिए 10 प्रतिशत कर रखा गया है। इसे पांच प्रतिशत किया जाना चाहिए। दुकानदार जीएसटी चोरी न करे। इसे रोकने के उपाय का प्रावधान बजट में नहीं है। दुकानदार एक रुपये के सामान का भी पक्का बिल जारी करे। किसान का खर्च ज्यादा है, कमाई कम। यह घाटा कम हो।
- रामफल, शिक्षक।
मायूस करने वाला रहा बजट, गिरा शेयर बाजार
बजट मायूस करने वाला रहा। इससे शेयर बाजार नीचे गिरा है। बजट में दम होता तो शेयर बाजार में उछाल जरूर आता। उच्च शिक्षा के लिए नई शिक्षा नीति लाने की तैयारी है। ऑनलाइन डिग्री कोर्स शुरू किए जाएंगे। शिक्षा के लिए बजट कम है। नर्स व शिक्षक विदेश के लिए तैयार किए जाएंगे। यहां शिक्षकों व नर्सों के सैकड़ों पद रिक्त पड़े हैं। सरकार ने इन्हें भरने का प्रावधान ही नहीं किया है। शिक्षक गुणवत्ता पर भी ध्यान नहीं दिया गया है।
- उमेद सिंह दलाल, शिक्षक।
टैक्स स्लैब व सौर ऊर्जा प्लांट योजना बेहतर
बजट में सीनियर सिटिजन के लिए कोई प्रावधान नहीं है। टैक्स स्लैब से संतुष्ट हूं। कृषि का बजट बढ़ाया गया है। यह और बढ़ाया जाना चाहिए था। सौर ऊर्जा प्लांट योजना बेहतर है। बंजर जमीन पर प्लांट लगाकर भी लोग आय अर्जित कर सकते हैं। यह योजना सिरे चढ़े तो बेहतर है। टैक्स स्लैब सही है। किसान की फसल बीमा में सुधार की जरूरत है।
- उमेद सिंह, सेवानिवृत्त निरीक्षक।
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बजट में कर्जा मुक्ति, न कर्ज माफी का जिक्र
सरकार ने नए बजट में किसान हित व खेती को शामिल नहीं किया है। यही वजह है कि कर्जा मुक्ति व कर्ज माफी का जिक्र तक नहीं किया गया है। किसान की आय दोगुना करने का दावा तो किया मगर यह किस तरह होगा, इसकी रूपरेखा ही नहीं दर्शाई गई। स्वामीनाथन आयोग की बजट सत्र में चर्चा तक नहीं की गई। फसल बीमा के नाम पर तीन कंपनियों को लाभ मिला। किसान को सभी फसलों का लाभकारी मूल्य देने के बारे में स्थिति ही स्पष्ट नहीं है।
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- प्रीत सिंह, उपाध्यक्ष, किसान सभा।
निजीकरण पर रहा बजट का फोकस
बजट का फोकस निजीकरण पर रहा। शिक्षा, रेल व अन्य क्षेत्र को सरकार पीपीपी मोड़ पर लाने की तैयारी में है। कार्पोरेट सेक्टर को लाभांवित करने वाले इस बजट में किसानों की आय दो गुना करने का पैरामीटर चर्चा से परे रहा। सरकारी उपक्रम बंद कर ठेका प्रथा आधारित बजट में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत भी खानापूर्ति नजर आई। यह सिर्फ नारे तक सीमित रहा। यही वजह है कि अपराध बढ़ रहा है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
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आयकर स्लैब से आम आदमी को कुछ राहत
बजट में आयकर स्लैब कुछ राहत देने वाली है। इससे रिवेन्यू बढ़ेगा। यह रिवेन्यू विकास कार्यों को गति देगा। आम आदमी व व्यापारी को लाभ होगा, मगर बजट से उम्मीद पूरी नहीं हुई। सरकार से जीएसटी की दर कम करने की उम्मीद थी। यह राहत नहीं मिली। सौर ऊर्जा पर जोर देते हुए सोलर ट्यूबवेल लगाने की योजना है। यह भी काफी हद तक राहत भरा साबित होगा। बंजर जमीन पर सौर प्लांट लगाकर किसान आय अर्जित कर सकेंगे।
- गुलशन निझावन, व्यापारी।
हवा, पानी स्वच्छ करने का दावा
बजट में किसान के साथ आम आदमी व व्यापारी वर्ग का ध्यान नहीं रखा गया है। सरकार से रियायत की उम्मीद थी। टैक्स में छूट का दावा किया गया है। राहत कैसे मिलेगी यह नहीं बताया गया है। स्वच्छ हवा व स्वच्छ पानी का प्रावधान किया गया है। इसे उतनी तवज्जो नहीं दी गई, जितनी दी जानी चाहिए थी। सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण पर भी ध्यान नहीं दिया है। इसे कैसे नियंत्रित किया जाए व महंगाई से कैसे निपटा जाए, ये क्षेत्र बजट में अछूते रहे हैं।
- राजेश कुमार, व्यापारी।
किसान मजदूर के लिए नहीं दिखी राहत
सरकार के इस बजट में किसान व मजदूर के लिए राहत नहीं दिखी है। हाईवे बनाने की बात कही गई है। यह अच्छा है, मगर इसके लिए किसानों की ली जाने वाली जमीन का उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। जींद में इसी मुद्दे को लेकर अरसे से किसान हड़ताल पर हैं। सरकार हर जगह मुआवजा अलग दे रही है। डीसी रेट नहीं दिए जा रहे हैं। इस बारे में कोई सुनवाई भी नहीं हो रही है। सरकार ने बजट में केवल अपना ध्यान रखा। आम आदमी की फिक्र नहीं की गई।
- सूबेदार सुमेर सिंह, जिला उपाध्यक्ष, किसान सभा।
जैविक उर्वरक से कंपनी कमाएंगी नोट
बजट में सोलर पंप की बात कही गई है। यह गले नहीं उतर रही है। घोषणा के बाद कई शर्तें ऐसी होती हैं, जिन्हें किसान पूरी नहीं कर पाता है। हालात ये हैं कि किसान डीजल से ही ट्यूबवेल चलाने को विवश हैं। बजट में बीमा कंपनियों का लाभ नहीं दिखाया गया है। जैविक उर्वरक की बात की गई है। इसके लिए करोड़ों रुपये का बजट निजी कंपनी को दिया जाना है। इससे किसान के बजाय निजी कंपनी को लाभ होगा। वही उर्वरक बेच कर नोट कमाएंगी।
- सुनील, किसान।
भर्ती एजेंसी के बजाय रोजगार कार्यालय से हो नियुक्ति
बजट से स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार से बड़ी राहत की उम्मीद थी। यह सब सरकार पीपीपी मोड़ पर लाना चाहती है। हवा साफ करने का दावा गंगा की सफाई की तरह नजर आ रहा है। आयुष्मान भारत योजना जमीनी स्तर पर नहीं है। एनएबीएच की सुविधा नहीं है। स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने का प्रावधान नहीं है। निजी बैंकों में नियुक्ति के लिए भर्ती एजेंसी बनाने की बात की गई है। यह नियुक्ति रोजगार कार्यालय में दर्ज नामों से वरिष्ठता के आधार पर की जाए।
- पदम सिंह नरवल, समाजसेवी।
गांवों को इंटरनेट से जोड़ने की तैयारी
बजट में इस वर्ष भी किसान की आय दोगुना करने की बात कही गई है। यह कैसे होगा, इस बारे में कुछ नहीं बताया गया है। बैंकिंग क्षेत्र में भी बड़ी उठा पटक चल रही है। एक तरफ करोड़ों रुपये की आर्थिक मदद की बात कही जा रही है। दूसरी तरफ बैंकों को मर्ज किया जा रहा है। गांवों को इनटरनेट से जोड़ने की तैयारी है। जबकि सड़क व परिवहन से गांव अब तक जुड़े ही नहीं है। रोजगार के अवसर नहीं हैं। ऐसे में इंटरनेट से जोड़ना कितना किफायती है, यह सोचने लायक है।
- अमित अहलावत, कर्मचारी, निजी कंपनी।
युवाओं के लिए निराशाजनक रहा बजट
बजट में किसान की नहीं युवाओं को भी दरकिनार किया गया है। युवाओं के लिए रोजगार के प्रावधान न करके इसे निराशाजनक बना दिया गया है। सरकार उपक्रमों की हिस्सेदारी बेच रही है। सार्वजनिक क्षेत्र को भी निजी हाथों में देने की तैयारी है। ऐसे में नए रोजगार के प्रावधान अहम हैं। जबकि इस ओर सोचा ही नहीं गया है। बजट में युवाओं के लिए रोजगार के प्रावधान का पहलू पूरी तरह छूटा है। ऐसे में बजट किसी भी तरह आम आदमी के हित में नहीं है।
- अनुराग परवाना, कर्मचारी, निजी कंपनी।
बजट ने किसानों को किया निराश
सरकार ने बजट में किसानों व किसान हित को दरकिनार किया है। उन्हें कुछ नहीं दिया है। इसलिए किसान वर्ग बजट से पूरी तरह निराश हैं। सरकार किसान वर्ग को दबाने में लगी है। यही वजह है कि उसकी कर्जा मुक्ति पर ध्यान नहीं दिया गया है। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू कर सरकार किसानों का भला कर सकती है। इस बार बजट में इसकी उम्मीद थी, मगर यह उम्मीद अधूरी रही। इससे किसान वर्ग आहत है।
- नरेश मलिक, किसान।
जीएसटी की चोरी रोकने का नहीं है प्रावधान
बजट में आयकर के नए स्लैब दिए हैं। इसमें पांच लाख से 15 लाख रुपये वार्षिक आय की कर सीमा तय की है। इसमें सुधार की गुंजाइश है। पहली स्लैब पांच से साढ़े सात लाख रुपये के लिए 10 प्रतिशत कर रखा गया है। इसे पांच प्रतिशत किया जाना चाहिए। दुकानदार जीएसटी चोरी न करे। इसे रोकने के उपाय का प्रावधान बजट में नहीं है। दुकानदार एक रुपये के सामान का भी पक्का बिल जारी करे। किसान का खर्च ज्यादा है, कमाई कम। यह घाटा कम हो।
- रामफल, शिक्षक।
मायूस करने वाला रहा बजट, गिरा शेयर बाजार
बजट मायूस करने वाला रहा। इससे शेयर बाजार नीचे गिरा है। बजट में दम होता तो शेयर बाजार में उछाल जरूर आता। उच्च शिक्षा के लिए नई शिक्षा नीति लाने की तैयारी है। ऑनलाइन डिग्री कोर्स शुरू किए जाएंगे। शिक्षा के लिए बजट कम है। नर्स व शिक्षक विदेश के लिए तैयार किए जाएंगे। यहां शिक्षकों व नर्सों के सैकड़ों पद रिक्त पड़े हैं। सरकार ने इन्हें भरने का प्रावधान ही नहीं किया है। शिक्षक गुणवत्ता पर भी ध्यान नहीं दिया गया है।
- उमेद सिंह दलाल, शिक्षक।
टैक्स स्लैब व सौर ऊर्जा प्लांट योजना बेहतर
बजट में सीनियर सिटिजन के लिए कोई प्रावधान नहीं है। टैक्स स्लैब से संतुष्ट हूं। कृषि का बजट बढ़ाया गया है। यह और बढ़ाया जाना चाहिए था। सौर ऊर्जा प्लांट योजना बेहतर है। बंजर जमीन पर प्लांट लगाकर भी लोग आय अर्जित कर सकते हैं। यह योजना सिरे चढ़े तो बेहतर है। टैक्स स्लैब सही है। किसान की फसल बीमा में सुधार की जरूरत है।
- उमेद सिंह, सेवानिवृत्त निरीक्षक।