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नगर निगम हाउस की अनुमति से ही होगा अबकी बार बजट पास
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रोहतक। नगर निगम हाउस की अनुमति से ही नए सत्र 2020-2021 का बजट पास होगा। इसके लिए पार्षदों से सुझाव व आपत्ति भी मांगी जाएंगी। इसके लिए जनवरी माह की बजाये मार्च माह में मीटिंग बुलाई जाएगी। क्योंकि निगम के सामने विकास कार्यों के लिए बजट जुटाना कड़ी चुनौती है। सरकार साफ कर चुकी है कि बजट के लिए सरकार पर निर्भर रहने की बजाए स्थानीय निकायों को खुद आत्मनिर्भर होना होगा। ऐसे में निगम का प्रॉपर्टी टैक्स व विकास शुल्क वसूलने पर ज्यादा फोकस होगा, जिससे शहरवासियों की जेब ढीली होना लाजमी है। निगम की ओर से आय के लिए प्रॉपर्टी टैक्स से 48 करोड़ रुपये वसूली का टारगेट रखा गया था, लेकिन अब यह टारगेट पूरा होना तो दूर, आधा भी नहीं हो पा रहा है। बता दें कि पिछले साल निगम अधिकारियों ने बिना हाउस की अनुमति के ही एक अरब का बजट बनाकर चंडीगढ़ भेज दिया था। इस पर मेयर और पार्षदों ने आपत्ति जताई थी।
प्रदेश की सियासी राजधानी रोहतक शहर में 2010 में निगम का गठन हुआ। 2013 में पहला चुनाव कराया गया, जिसमें कांग्रेस का दबदबा रहा। सियासी तौर पर बेहद अहम रोहतक शहर के लिए पहले हुड्डा सरकार और फिर भाजपा सरकार में बजट की कमी नहीं रही। 2014 तक खुद भूपेंद्र सिंह हुड्डा प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। जबकि 2014 से 2019 तक स्थानीय विधायक मनीष ग्रोवर न केवल सहकारिता मंत्री थे, बल्कि शहरी निकाय विभाग के राज्य मंत्री भी थे। इस बार सियासी हालात बेहद अलग हैं। क्योंकि प्रदेश में भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार है, लेकिन स्थानीय विधायक भारत भूषण बतरा कांग्रेस से हैं। इतना ही नहीं, नई गठबंधन सरकार नगर निगम प्रशासन को साफ हिदायत दे चुकी है कि विकास कार्यों के बजट के लिए सरकार पर निर्भर होने की बजाए आत्मनिर्भर बनें। इतना नहीं, गृहमंत्री अनिल विज ने निगम प्रशासन से पिछले दो साल में मिली ग्रांट का ब्यौरा भी मांगा हैं। ऐसे में दोनों तरफ से निगम प्रशासन बजट को लेकर दबाव में हैं। न तो पुरानी ग्रांट सरकार से मिल रही है। ऊपर से जो ग्रांट आई थी, उसका ब्यौरा देना पड़ रह है। यही कारण है कि निगम प्रशासन बकाया प्रॉपर्टी टैक्स, विकास शुल्क से लेकर ट्रेड लाइसेंस फीस वसूलने के लिए सिटीजन पर दबाव बनाए हुए है। लगातार अवैध कॉलोनाइजर पर शिकंजा कसा जा रहा है। साथ ही निगम सरकारी विभागों से भी बकाया 14 करोड़ का टैक्स वसूलने के लिए एक दिन पहले गृहमंत्री अनिल विज को पत्र सौंप चुका है।
पिछले साल जनवरी माह में ही बजट पास, अबकी बार मार्च का इंतजार
हर साल नगर निगम को 31 मार्च से पहले नए वित्त वर्ष का बजट बनाकर सरकार के पास भेजना पड़ता है। पिछली बार 8 जनवरी को ही नगर निगम के अधिकारियों ने खुद ही बजट पास करके सरकार के पास भेज दिया था। सूत्रों का कहना था कि पिछली बार बजट पर सियासी दबाव था। क्योंकि 19 दिसंबर को हाउस का चुनाव परिणाम आया। मनमोहन गोयल मेयर बने, जबकि 22 नए पार्षद चुनकर आए। 11 जनवरी को मेयर व पार्षदों को शपथ दिलवाई गई। इससे पहले ही निगम के तत्कालीन अधिकारियों ने प्रस्ताव पास करके चंडीगढ़ भेज दिया। इसके लिए मेयर व पार्षदों की अनुमति नहीं ली गई। तर्क दिया गया कि हाउस का गठन नहीं हुआ था। अब सवाल उठता है कि निगम के अधिकारियों को ऐसी क्या जल्दी थी कि जनवरी माह में ही बजट पास करके चंडीगढ़ भेजना पड़ा। जबकि इस बार मार्च माह का इंतजार किया जा रहा है।
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एक अरब का हुआ था बजट पास, अब 48 करोड़ टैक्स रिकवरी का आ रहा पसीना
निगम के अधिकारियों ने 1 अरब का बजट पिछली बार पास करके चंडीगढ़ भेजा था। इसमें आय के लिए प्रॉपर्टी टैक्स से 48 करोड़ रुपये वसूली का टारगेट रखा गया था, लेकिन अब यह टारगेट पूरा होना तो दूर, आधा भी नहीं हो पा रहा है। 2019-20 वित्त वर्ष को पूरा होने में मात्र तीन माह बचे हैं। जबकि अभी तक मात्र 17 करोड़ रुपये टैक्स वसूल हो सका है।
मांगें जाएंगे सुझाव
अधिकारियों ने पिछली बार हाउस के गठन से पहले ही जनवरी माह में बजट बनाकर चंडीगढ़ भेज दिया। अबकी बार ऐसा नहीं होगा। बजट के लिए न केवल हाउस की मीटिंग बुलाई जाएगी, बल्कि हर पार्षद से बजट को लेकर आपत्ति व सुझाव मांगे जाएंगे। इसके लिए मंत्री अनिल विज से बात हो चुकी है।
- मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम
नहीं कर सकते टिप्पणी
बजट के लिए हाउस की मार्च माह में मीटिंग बुलाएंगे। हर पार्षद से सुझाव व आपत्ति मांगी जाएगी। साथ ही बजट में आय के संसाधन बढ़ाने पर जोर रहेगा। क्योंकि प्रदेश सरकार साफ कर चुकी है कि निगम को आत्मनिर्भर होना पड़ेगा। पिछली बार जनवरी माह में बजट पास करके क्यों भेजा गया, इस बारे में वे कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।
- प्रदीप गोदारा, आयुक्त नगर निगम
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प्रदेश की सियासी राजधानी रोहतक शहर में 2010 में निगम का गठन हुआ। 2013 में पहला चुनाव कराया गया, जिसमें कांग्रेस का दबदबा रहा। सियासी तौर पर बेहद अहम रोहतक शहर के लिए पहले हुड्डा सरकार और फिर भाजपा सरकार में बजट की कमी नहीं रही। 2014 तक खुद भूपेंद्र सिंह हुड्डा प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। जबकि 2014 से 2019 तक स्थानीय विधायक मनीष ग्रोवर न केवल सहकारिता मंत्री थे, बल्कि शहरी निकाय विभाग के राज्य मंत्री भी थे। इस बार सियासी हालात बेहद अलग हैं। क्योंकि प्रदेश में भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार है, लेकिन स्थानीय विधायक भारत भूषण बतरा कांग्रेस से हैं। इतना ही नहीं, नई गठबंधन सरकार नगर निगम प्रशासन को साफ हिदायत दे चुकी है कि विकास कार्यों के बजट के लिए सरकार पर निर्भर होने की बजाए आत्मनिर्भर बनें। इतना नहीं, गृहमंत्री अनिल विज ने निगम प्रशासन से पिछले दो साल में मिली ग्रांट का ब्यौरा भी मांगा हैं। ऐसे में दोनों तरफ से निगम प्रशासन बजट को लेकर दबाव में हैं। न तो पुरानी ग्रांट सरकार से मिल रही है। ऊपर से जो ग्रांट आई थी, उसका ब्यौरा देना पड़ रह है। यही कारण है कि निगम प्रशासन बकाया प्रॉपर्टी टैक्स, विकास शुल्क से लेकर ट्रेड लाइसेंस फीस वसूलने के लिए सिटीजन पर दबाव बनाए हुए है। लगातार अवैध कॉलोनाइजर पर शिकंजा कसा जा रहा है। साथ ही निगम सरकारी विभागों से भी बकाया 14 करोड़ का टैक्स वसूलने के लिए एक दिन पहले गृहमंत्री अनिल विज को पत्र सौंप चुका है।
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पिछले साल जनवरी माह में ही बजट पास, अबकी बार मार्च का इंतजार
हर साल नगर निगम को 31 मार्च से पहले नए वित्त वर्ष का बजट बनाकर सरकार के पास भेजना पड़ता है। पिछली बार 8 जनवरी को ही नगर निगम के अधिकारियों ने खुद ही बजट पास करके सरकार के पास भेज दिया था। सूत्रों का कहना था कि पिछली बार बजट पर सियासी दबाव था। क्योंकि 19 दिसंबर को हाउस का चुनाव परिणाम आया। मनमोहन गोयल मेयर बने, जबकि 22 नए पार्षद चुनकर आए। 11 जनवरी को मेयर व पार्षदों को शपथ दिलवाई गई। इससे पहले ही निगम के तत्कालीन अधिकारियों ने प्रस्ताव पास करके चंडीगढ़ भेज दिया। इसके लिए मेयर व पार्षदों की अनुमति नहीं ली गई। तर्क दिया गया कि हाउस का गठन नहीं हुआ था। अब सवाल उठता है कि निगम के अधिकारियों को ऐसी क्या जल्दी थी कि जनवरी माह में ही बजट पास करके चंडीगढ़ भेजना पड़ा। जबकि इस बार मार्च माह का इंतजार किया जा रहा है।
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एक अरब का हुआ था बजट पास, अब 48 करोड़ टैक्स रिकवरी का आ रहा पसीना
निगम के अधिकारियों ने 1 अरब का बजट पिछली बार पास करके चंडीगढ़ भेजा था। इसमें आय के लिए प्रॉपर्टी टैक्स से 48 करोड़ रुपये वसूली का टारगेट रखा गया था, लेकिन अब यह टारगेट पूरा होना तो दूर, आधा भी नहीं हो पा रहा है। 2019-20 वित्त वर्ष को पूरा होने में मात्र तीन माह बचे हैं। जबकि अभी तक मात्र 17 करोड़ रुपये टैक्स वसूल हो सका है।
मांगें जाएंगे सुझाव
अधिकारियों ने पिछली बार हाउस के गठन से पहले ही जनवरी माह में बजट बनाकर चंडीगढ़ भेज दिया। अबकी बार ऐसा नहीं होगा। बजट के लिए न केवल हाउस की मीटिंग बुलाई जाएगी, बल्कि हर पार्षद से बजट को लेकर आपत्ति व सुझाव मांगे जाएंगे। इसके लिए मंत्री अनिल विज से बात हो चुकी है।
- मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम
नहीं कर सकते टिप्पणी
बजट के लिए हाउस की मार्च माह में मीटिंग बुलाएंगे। हर पार्षद से सुझाव व आपत्ति मांगी जाएगी। साथ ही बजट में आय के संसाधन बढ़ाने पर जोर रहेगा। क्योंकि प्रदेश सरकार साफ कर चुकी है कि निगम को आत्मनिर्भर होना पड़ेगा। पिछली बार जनवरी माह में बजट पास करके क्यों भेजा गया, इस बारे में वे कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।
- प्रदीप गोदारा, आयुक्त नगर निगम