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Rohtak News: एक साल में 3.25 करोड़ से ज्यादा खर्च, फिर भी सड़कों पर गोवंश

Sun, 23 Mar 2025 02:10 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 23 Mar 2025 02:10 AM IST
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More than 3.25 crores spent in one year, still cattle are on the roads
22सीटीके17 : जींद रोड पर सड़क के बीचोंबीच बैठी गाय, नजदीक से गुजरते वाहन। अमर उजाला22 सीटीके
रोहतक। चुनावी वित्त वर्ष 2024-25 में नेताओं ने शहरवासियों के घर-घर जाकर बड़े-बड़े वादे किए। किसी ने सपनों का शहर बनाने का दावा किया तो किसी ने हर समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। हकीकत में पूरे साल सड़क पर गोवंश, छत पर बंदर व गलियों में कुत्ते परेशानी का सबब बने हुए हैं।
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भविष्य में भी जल्द तीनों समस्याओं से निजात मिलने की कम उम्मीद है, जबकि पूरे साल में अकेले गोवंश पर नगर निगम ने सवा तीन करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च कर दी। अब शहर की नई सरकार से छह लाख आबादी को राहत की उम्मीद है।
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नगर निगम चुनाव में नेताओं ने शहर को सुंदर बनाने से लेकर गोवंशों की समस्या के समाधान का भरोसा दिया। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में भी इसका जिक्र किया है। निगम की तरफ से पहरावर गांव में गोशाला खोली गई है, जहां 2700 के करीब गाय हैं। निगम प्रति गाय प्रतिदिन 33.50 रुपये ठेकेदार को देता है। इस तरह निगम को हर माह अकेले गोशाला के ठेकेदार को 27 लाख 13 हजार रुपये का भुगतान करना पड़ता है। इसके बावजूद सड़कों पर गोवंश घूमते रहते हैं।
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निगम की ओर से चालू वित्त वर्ष 2024-25 गोवंश को पकड़ने व गोशाला संचालन पर सवा तीन करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च करनी पड़ी है। अब नए वित्त वर्ष में पांच करोड़ से ज्यादा का बजट रखा गया है।

निगम नहीं तलाश सका बंदर छोड़ने की जगह : शहर में बंदरों की समस्या पुराने शहर ही नहीं, बल्कि सेक्टरों जैसे पाॅश इलाकों में भी है। निगम के पूर्व पार्षद कदम सिंह अहलावत ने बताया कि हाउस की हर बैठक में बंदरों की समस्या को उठाया, लेकिन अधिकारियों ने आश्वासन के अलावा कुछ काम नहीं किया। पूछने पर अधिकारी कहते हैं कि पहले बंदर पकड़कर यमुनानगर के कलेसर के जंगलों में छोड़े जाते थे। अब विभाग ने बंदर को वन्य प्राणी मानने से इन्कार कर दिया है।
साथ ही, जंगलों में छोड़ने पर रोक लगा दी है। ऐसे में बंदर पकड़कर छोड़ने के लिए जगह नहीं है।
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