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14 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों की मौत निमोनिया से होती : सीएमओ
Thu, 28 Mar 2024 02:36 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 28 Mar 2024 02:36 AM IST
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झज्जर। साँस कार्यक्रम के तहत बच्चों को निमोनिया से बचाव हेतु दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. ब्रह्मदीप सिंह ने बताया कि साँस कार्यक्रम का उद्देश्य नवजात शिशुओं में निमोनिया से होने वाली मौतों को कम करना है। भारत में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की कुल मौतों में 14 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों की मौत निमोनिया की वजह से होती है।
स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार भारत में पांच वर्ष से कम आयु के प्रति 1000 जीवित बच्चों में 37 की मौत हो जाती है, जिसमें 5.3 मौतें सिर्फ निमोनिया की वजह से होती हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने बच्चों में निमोनिया से होने वाली मौतों के नियंत्रण हेतु वर्ष 2025 तक प्रति 1000 जीवित बच्चों पर होने वाली मौतों को 3 से कम करने का लक्ष्य रखा है। इसी की सफलता हेतु जिला में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों, सीएचओ, नर्सिंग अधिकारी, एमपीएचडब्लयू को दो दिवसीय व एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है।जिला प्रतिरक्षण नोडल अधिकारी डीआर बसंत दुबे, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अशोक ने प्रतिभागियों को बच्चों में निमोनिया के लक्षण व बचाव बारे प्रशिक्षण दिया।
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स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार भारत में पांच वर्ष से कम आयु के प्रति 1000 जीवित बच्चों में 37 की मौत हो जाती है, जिसमें 5.3 मौतें सिर्फ निमोनिया की वजह से होती हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने बच्चों में निमोनिया से होने वाली मौतों के नियंत्रण हेतु वर्ष 2025 तक प्रति 1000 जीवित बच्चों पर होने वाली मौतों को 3 से कम करने का लक्ष्य रखा है। इसी की सफलता हेतु जिला में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों, सीएचओ, नर्सिंग अधिकारी, एमपीएचडब्लयू को दो दिवसीय व एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है।जिला प्रतिरक्षण नोडल अधिकारी डीआर बसंत दुबे, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अशोक ने प्रतिभागियों को बच्चों में निमोनिया के लक्षण व बचाव बारे प्रशिक्षण दिया।
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