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मोदी दे कनून मेरे पियो दी खेती नू उजाड़ देणगे
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भटिंडा के गिल कलां से आई शगुनदीप। संवाद
- फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। किसानों के घरों में महीनों भर से चल रही चर्चा की वजह से किसानों के बच्चे भी खेती संबंधी तीन कानूनों को अपने लिए नुकसानदायक मान रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए इन कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में कॉलेज छात्रों की तरह पंजाब-हरियाणा के स्कूली बच्चे भी भाग ले रहे हैं।
दिल्ली की सीमा पर बहादुरगढ़ में चल रहे किसान आंदोलन में किसानों के बच्चे उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। वे न केवल नारे लगाते हैं, बल्कि लंगर और अन्य व्यवस्थाओं में भी पुरुषों की मदद करते हैं। उनमें से कुछ अपनी किताबें भी अपने साथ लाए हैं। इन बच्चों को अपने परिवार का रोजगार चलाने वाली खेती को लेकर बहुत पीड़ा है। पंजाब के भटिंडा जिले के गांव गिल कलां की निवासी अपने पिता के साथ बहादुरगढ़ स्टेशन पर ट्रेन से किसान यूनियन का झंडा कंधे से लगाकर उतरी छठी कक्षा की शगुनदीप गिल बोली ..मोदी दे कनून मेरे पयो दी खेती नू उजाड़ देणगे (मोदी के कानून मेरे पिता की खेती को उजाड़ देंगे)। इस मासूम ने कहा कि उसके मां-बाप सर्दी-गर्मी में सुबह से शाम तक खेत में मेहनत करते हैं। फिर भी फसल के सही दाम न मिलें तो कैसे घर चलेगा।
मोगा जिले के गांव चन्नूवाला से 14 वर्षीय नवनीत कौर, 12 वर्षीय सिमरनप्रीत कौर और नौ वर्षीय राजप्रीत सिंह अपने पिता कुलविंदर सिंह के साथ टीकरी बॉर्डर पहुंचे हैं। मोगा जिले के ही गांव बिलासपुर निवासी 7वीं कक्षा के एक छात्र जसकरन सिंह (13) ने कहा कि जब तक तीन कानूनों को रद्द नहीं किया जाता, वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा सरकार तारीख देकर किसानों के धैर्य की परीक्षा ले रही है, लेकिन हम नहीं झुकेंगे।
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आंदोलन स्थल पर एक लंगर में किसानों की मदद कर रहे सिरसा जिले के गांव साहुवाला से आए 9वीं कक्षा के छात्र हर्षदीप (13 वर्ष) ने कहा कि अस्सी एत्थे हक लेन लई आए हां, जेड़े मोदी सरकार ने खेती कानून बनाए आ, ओणू अस्सी रद्द करवाके एत्थों जावेंगे (हम जहां पर अपने हक लेने के लिए आए हैं, जो मोदी ने कृषि कानून बनाए है, हम उसे रद्द करवाकर यहां से जाएंगे)। मैं और मेरे चाचा पांच तीन दिन से यहा हैं और पंजाब के किसानों का पूरे दिल से समर्थन कर रहे हैं।
मिनी ट्रक के ऊपर बैठकर और झंडा लहराते हुए रतिया (फतेहाबाद) से आए 10वीं कक्षा के छात्र अर्शदीप ने कहा कि उसके पिता किसान हैं। वह किसानों का कष्ट जानते हैं, इसलिए आंदोलन को मजबूत करने के लिए यहां आए। हमने बर्बादी से बचना है। उन्होंने कहा हम मोदी सरकार को तीन काले कानूनों को रद्द करने के लिए मजबूर करेंगे। अर्शदीप के साथ ट्रक पर बैठे फतेहाबाद के विद्यार्थी रमनदीप (15) ने अर्शदीप के विचारों का समर्थन किया। उसने कहा कि किसान अन्नदाता हैं और अगर किसान बर्बाद होते हैं तो कोई भी जीवित नहीं रह पाएगा। संगरूर (पंजाब) से 9वीं कक्षा के छात्र हरमनदीप सिंह (14) ने बताया कि मैं न केवल ऑनलाइन कक्षाओं में भाग ले रहा हूं, बल्कि अपने साथ किताबें भी लाया हूं। मैं रोजाना दो-तीन घंटे अध्ययन करता हूं और बाकी समय प्रदर्शन में लगाता हूं। मैं पिछले एक हफ्ते से यहां हूं और परीक्षा देने के लिए कल लौटूंगा। किसानों को समर्थन देने के लिए कई और स्कूली बच्चे भी यहां पहुंचे हैं।
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दिल्ली की सीमा पर बहादुरगढ़ में चल रहे किसान आंदोलन में किसानों के बच्चे उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। वे न केवल नारे लगाते हैं, बल्कि लंगर और अन्य व्यवस्थाओं में भी पुरुषों की मदद करते हैं। उनमें से कुछ अपनी किताबें भी अपने साथ लाए हैं। इन बच्चों को अपने परिवार का रोजगार चलाने वाली खेती को लेकर बहुत पीड़ा है। पंजाब के भटिंडा जिले के गांव गिल कलां की निवासी अपने पिता के साथ बहादुरगढ़ स्टेशन पर ट्रेन से किसान यूनियन का झंडा कंधे से लगाकर उतरी छठी कक्षा की शगुनदीप गिल बोली ..मोदी दे कनून मेरे पयो दी खेती नू उजाड़ देणगे (मोदी के कानून मेरे पिता की खेती को उजाड़ देंगे)। इस मासूम ने कहा कि उसके मां-बाप सर्दी-गर्मी में सुबह से शाम तक खेत में मेहनत करते हैं। फिर भी फसल के सही दाम न मिलें तो कैसे घर चलेगा।
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मोगा जिले के गांव चन्नूवाला से 14 वर्षीय नवनीत कौर, 12 वर्षीय सिमरनप्रीत कौर और नौ वर्षीय राजप्रीत सिंह अपने पिता कुलविंदर सिंह के साथ टीकरी बॉर्डर पहुंचे हैं। मोगा जिले के ही गांव बिलासपुर निवासी 7वीं कक्षा के एक छात्र जसकरन सिंह (13) ने कहा कि जब तक तीन कानूनों को रद्द नहीं किया जाता, वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा सरकार तारीख देकर किसानों के धैर्य की परीक्षा ले रही है, लेकिन हम नहीं झुकेंगे।
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आंदोलन स्थल पर एक लंगर में किसानों की मदद कर रहे सिरसा जिले के गांव साहुवाला से आए 9वीं कक्षा के छात्र हर्षदीप (13 वर्ष) ने कहा कि अस्सी एत्थे हक लेन लई आए हां, जेड़े मोदी सरकार ने खेती कानून बनाए आ, ओणू अस्सी रद्द करवाके एत्थों जावेंगे (हम जहां पर अपने हक लेने के लिए आए हैं, जो मोदी ने कृषि कानून बनाए है, हम उसे रद्द करवाकर यहां से जाएंगे)। मैं और मेरे चाचा पांच तीन दिन से यहा हैं और पंजाब के किसानों का पूरे दिल से समर्थन कर रहे हैं।
मिनी ट्रक के ऊपर बैठकर और झंडा लहराते हुए रतिया (फतेहाबाद) से आए 10वीं कक्षा के छात्र अर्शदीप ने कहा कि उसके पिता किसान हैं। वह किसानों का कष्ट जानते हैं, इसलिए आंदोलन को मजबूत करने के लिए यहां आए। हमने बर्बादी से बचना है। उन्होंने कहा हम मोदी सरकार को तीन काले कानूनों को रद्द करने के लिए मजबूर करेंगे। अर्शदीप के साथ ट्रक पर बैठे फतेहाबाद के विद्यार्थी रमनदीप (15) ने अर्शदीप के विचारों का समर्थन किया। उसने कहा कि किसान अन्नदाता हैं और अगर किसान बर्बाद होते हैं तो कोई भी जीवित नहीं रह पाएगा। संगरूर (पंजाब) से 9वीं कक्षा के छात्र हरमनदीप सिंह (14) ने बताया कि मैं न केवल ऑनलाइन कक्षाओं में भाग ले रहा हूं, बल्कि अपने साथ किताबें भी लाया हूं। मैं रोजाना दो-तीन घंटे अध्ययन करता हूं और बाकी समय प्रदर्शन में लगाता हूं। मैं पिछले एक हफ्ते से यहां हूं और परीक्षा देने के लिए कल लौटूंगा। किसानों को समर्थन देने के लिए कई और स्कूली बच्चे भी यहां पहुंचे हैं।

मोगा के चन्नूवाला से आए राजप्रीत सिंह, सिमरन प्रीत कौर और नवनीत कौर अपने पिता कुलविन्दर सिंह के स?- फोटो : Bahadurgarh