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ग्राउंड रिपोर्ट: उम्मीदों की डगर पर बेबसी के कदम
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बेटे को कंधे पर बैठाकर पैदल पलायन करता मजबूर पिता।
- फोटो : Bhiwani
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भिवानी। आंखों में बेबसी के आंसू, सिर पर मजबूरी का भार, पांवों में पड़ चुके छालों के दर्द की आह दिल में लेकर पैदल ही पिछले दस दिनों से सफर पर निकले प्रवासी मजदूर परिवारों की किसी ने पुकार नहीं सुनी। 41 डिग्री तक झुलसा देने वाले गर्मी के तापमान में जब आंखों के आगे अंधेरा छाने और चक्कर आने लगता है तो सड़क किनारे पेड़ की छांव में थोड़ी देर सुस्ता लेने के लिए सफर का पड़ाव डाल लेते हैं, मगर ये पड़ाव भी चंद मिनट तक ही संभव हो पाता है, क्योंकि मीलों की दूरी नाप चुके बेबस मजदूरों के आगे हजारों किलोमीटर की दूरी तय करना अभी बाकी है। नेशनल हाईवे-701 एक्सटेंशन पर पेड़ की छांव में बैठी मीरा और उसके तीन मासूम बच्चों के चेहरों से बेबसी साफ झलक रही थी।
मीरा से जब पैदल चलने का कारण पूछा तो उसकी आंखों से आंसू झलक पड़े। उसने बताया कि उसकी एक बेटी चार और दूसरी पांच साल की है, जबकि उसकी गोद में 10 माह का बच्चा है। तीन छोटे बच्चों व सामान को लेकर गर्मी में पैदल चलना अग्नि परीक्षा से कम नहीं हैं, लेकिन मजदूर हैं साहब करें भी तो क्या करें। घर वाला कुछ दूर बच्चों को कंधे पर लेकर चलता है फिर थक जाते हैं तो रास्ते में रुक जाते हैं। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिला के विजाहर खेड़ा गांव जाना है। मीरा और उसके पति कृष्ण प्रसाद के पांव में छाले पड़ चुके हैं, हालांकि वे चप्पल पहनकर चलते हैं, फिर भी पूरे दिन में 20 से 25 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। इसी तरह बिहार के सिवान जा रहे पांच प्रवासी मजदूरों के 11 सदस्य, जिनमें तीन महिलाएं और बच्चे भी हैं। सामान सिर पर उठाकर पैदल जा रहे हैं। राधिका देवी, हीरालाल, वीरेंद्रराम, छोटेलाल, रामव्रज, चंदनराम ने बताया कि 1100 किलोमीटर का सफर तय करना है। पिछले 10 दिनों से पैदल ही चलते आ रहे हैं। एक सप्ताह भर से तो नहाए तक नहीं हैं। पसीना भी आता है मगर चलते जाना मजबूरी है। पहले शेल्टर हाउस में ठहरे थे, रजिस्ट्रेशन कराया, मेडिकल कराया, मगर गांव जाने की पुकार किसी ने नहीं सुनी। जनवरी में हरियाणा में मजदूरी के लिए आए थे। मगर न रोजगार बचा है न खाने का कोई प्रबंध। यहां भूखे मरने से अच्छा है अपनों के पास दम तोड़ें।
18 हजार रजिस्ट्रेशन, सात हजार ही भेजे
भिवानी व चरखी दादरी जिला से करीब 18 हजार मजदूरों के रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, अब तक पांच से सात हजार मजदूरों को घर भेजने की व्यवस्था बन पाई है। रोडवेज बसों व स्पेशल ट्रेनों से मजदूरों को घर भेजा गया है। मगर स्पेशल ट्रेनों का शेड्यूल सप्ताह में दो बार ही आ रहा है, ऐसे में शेल्टर होम में ठहरे मजदूरों को वहीं बैठे इंतजार करना पड़ता है। जिनकी व्यवस्था नहीं हुई है वे पैदल ही पलायन पर मजबूर हैं।
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भिवानी से प्रवासी मजदूरों को लेकर 22 मई को बिहार तक स्पेशल ट्रेन जाएगी, पहले ये ट्रेन 18 मई को जानी थी। इसी तरह 19 मई को मध्यप्रदेश स्पेशल ट्रेन प्रवासी मजदूरों को लेकर जाएगी। गुजरानी मोड़ आश्रम में 587 प्रवासी मजदूरों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। अभी और मजदूर यहां पर पहुंच रहे हैं। रोडवेज बसों से भी प्रवासी मजदूर बिहार भेजे गए हैं।
-रामचंद, ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं नायब तहसीलदार भिवानी।
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मीरा से जब पैदल चलने का कारण पूछा तो उसकी आंखों से आंसू झलक पड़े। उसने बताया कि उसकी एक बेटी चार और दूसरी पांच साल की है, जबकि उसकी गोद में 10 माह का बच्चा है। तीन छोटे बच्चों व सामान को लेकर गर्मी में पैदल चलना अग्नि परीक्षा से कम नहीं हैं, लेकिन मजदूर हैं साहब करें भी तो क्या करें। घर वाला कुछ दूर बच्चों को कंधे पर लेकर चलता है फिर थक जाते हैं तो रास्ते में रुक जाते हैं। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिला के विजाहर खेड़ा गांव जाना है। मीरा और उसके पति कृष्ण प्रसाद के पांव में छाले पड़ चुके हैं, हालांकि वे चप्पल पहनकर चलते हैं, फिर भी पूरे दिन में 20 से 25 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। इसी तरह बिहार के सिवान जा रहे पांच प्रवासी मजदूरों के 11 सदस्य, जिनमें तीन महिलाएं और बच्चे भी हैं। सामान सिर पर उठाकर पैदल जा रहे हैं। राधिका देवी, हीरालाल, वीरेंद्रराम, छोटेलाल, रामव्रज, चंदनराम ने बताया कि 1100 किलोमीटर का सफर तय करना है। पिछले 10 दिनों से पैदल ही चलते आ रहे हैं। एक सप्ताह भर से तो नहाए तक नहीं हैं। पसीना भी आता है मगर चलते जाना मजबूरी है। पहले शेल्टर हाउस में ठहरे थे, रजिस्ट्रेशन कराया, मेडिकल कराया, मगर गांव जाने की पुकार किसी ने नहीं सुनी। जनवरी में हरियाणा में मजदूरी के लिए आए थे। मगर न रोजगार बचा है न खाने का कोई प्रबंध। यहां भूखे मरने से अच्छा है अपनों के पास दम तोड़ें।
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18 हजार रजिस्ट्रेशन, सात हजार ही भेजे
भिवानी व चरखी दादरी जिला से करीब 18 हजार मजदूरों के रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, अब तक पांच से सात हजार मजदूरों को घर भेजने की व्यवस्था बन पाई है। रोडवेज बसों व स्पेशल ट्रेनों से मजदूरों को घर भेजा गया है। मगर स्पेशल ट्रेनों का शेड्यूल सप्ताह में दो बार ही आ रहा है, ऐसे में शेल्टर होम में ठहरे मजदूरों को वहीं बैठे इंतजार करना पड़ता है। जिनकी व्यवस्था नहीं हुई है वे पैदल ही पलायन पर मजबूर हैं।
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भिवानी से प्रवासी मजदूरों को लेकर 22 मई को बिहार तक स्पेशल ट्रेन जाएगी, पहले ये ट्रेन 18 मई को जानी थी। इसी तरह 19 मई को मध्यप्रदेश स्पेशल ट्रेन प्रवासी मजदूरों को लेकर जाएगी। गुजरानी मोड़ आश्रम में 587 प्रवासी मजदूरों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। अभी और मजदूर यहां पर पहुंच रहे हैं। रोडवेज बसों से भी प्रवासी मजदूर बिहार भेजे गए हैं।
-रामचंद, ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं नायब तहसीलदार भिवानी।

भिवानी-महम मार्ग पर पेड़ की छांव में बैठीं प्रवासी मजदूर महिलाएं। गर्मी अधिक होने के कारण कपड़े म- फोटो : Bhiwani