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Rohtak News: पंचकूला में सीएम के हाथों सम्मानित हो खुश हुए मेधावी
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रोहतक। प्रदेश स्तर पर हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में टॉप थ्री रैंक लाने वाले मेधावी छात्रों को बुधवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल से सम्मानित होने का अवसर मिला। जीवन में पहली बार प्रदेश के सीएम को करीब से देखने व उनको सुनने के साथ-साथ उनके हाथों से सम्मानित होने वाले छह मेधावी छात्र-छात्राओं के चेहरे खुशी से खिल उठे। विद्यार्थियों के साथ उनके परिजनों के चेहरे पर भी उत्साह व उल्लास की झलक देखने को मिली। सीएम से सम्मानित होने वाले विद्यार्थियों ने अमर उजाला से अपने अनुभव साझा किए। पंचकूला के सेक्टर एक स्थित लोक निर्माण विभाग के रेस्ट हाउस सभागार में बुधवार को मेधावी छात्र सम्मान समारोह के तहत सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने के बाद बोले-मेधावी छात्र
कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि अच्छे नंबर लाकर इस तरह प्रदेश के मुख्यमंत्री से रूबरू हो पाऊंगी। मुख्यमंत्री ने बहुत अच्छा मार्गदर्शन किया है। सफलता पाने के मंत्र बताए। उन्होंने कहा एक बार सफल होकर रुकना नहीं है। लक्ष्य निर्धारित करना है।
-अन्नु, बारहवीं
अच्छे नंबर लाने पर मुख्यमंत्री की ओर से सम्मानित होने का अवसर पाकर उत्साह बढ़ा है। उनसे प्रेरणा मिली कि सफलता की कोई लिमिट नहीं है। कामयाब बनने के लिए माता-पिता और गुरुओं का सम्मान करने की प्रेरणा मिली।
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-याशी, दसवीं
मुख्यमंत्री को अपने सामने बैठकर पहली बार सुना। उन्होंने कहा कि जब हम समाज को कुछ देते हैं वही हमारी असली मंजिल है। भविष्य बना लेना कोई मंजिल नहीं है। यह बात जीवन में धारण कर ली है और समाज हित के लिए भी कार्य जरूर करूंगी।
-मानसी सैनी, बारहवीं
मुख्यमंत्री द्वारा मिली प्रेरणा हमें आगे के अपने संकल्पों को पूरा करने में सहायक बनेगी। अभी तक लक्ष्य निर्धारित नहीं था। बहुत बार लक्ष्यों को लेकर विकल्प भी तलाशने लगती थी, लेकिन अब मिली प्रेरणा से जल्द ही लक्ष्य निर्धारित होगा।
-पूर्णिमा, दसवीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां लक्ष्य के समक्ष विकल्प आ जाता है, वहीं कामयाबी दूर हो जाती है। इससे यह सीख मिली कि लक्ष्य से भटकना नहीं है। अपने निर्धारित लक्ष्य पर ही आगे बढ़ते जाना है। सम्मान समारोह जीवन भर के लिए यादगार बन गया है।
-मेघा, दसवीं
हमें सिर्फ अंकों में नहीं उलझना है। ज्ञान पाने की लालसा के साथ आगे बढ़ना है। यही प्रेरणा इस समारोह से मिली है। साथ ही विद्या पाने का मतलब विनम्र होना भी है। मेधावी होने के साथ- संस्कारवान भी बनना है। गुरु, शिक्षक, माता-पिता का सम्मान सर्वोच्च है।
-तमन्ना, दसवीं
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सम्मानित होने के बाद बोले-मेधावी छात्र
कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि अच्छे नंबर लाकर इस तरह प्रदेश के मुख्यमंत्री से रूबरू हो पाऊंगी। मुख्यमंत्री ने बहुत अच्छा मार्गदर्शन किया है। सफलता पाने के मंत्र बताए। उन्होंने कहा एक बार सफल होकर रुकना नहीं है। लक्ष्य निर्धारित करना है।
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-अन्नु, बारहवीं
अच्छे नंबर लाने पर मुख्यमंत्री की ओर से सम्मानित होने का अवसर पाकर उत्साह बढ़ा है। उनसे प्रेरणा मिली कि सफलता की कोई लिमिट नहीं है। कामयाब बनने के लिए माता-पिता और गुरुओं का सम्मान करने की प्रेरणा मिली।
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-याशी, दसवीं
मुख्यमंत्री को अपने सामने बैठकर पहली बार सुना। उन्होंने कहा कि जब हम समाज को कुछ देते हैं वही हमारी असली मंजिल है। भविष्य बना लेना कोई मंजिल नहीं है। यह बात जीवन में धारण कर ली है और समाज हित के लिए भी कार्य जरूर करूंगी।
-मानसी सैनी, बारहवीं
मुख्यमंत्री द्वारा मिली प्रेरणा हमें आगे के अपने संकल्पों को पूरा करने में सहायक बनेगी। अभी तक लक्ष्य निर्धारित नहीं था। बहुत बार लक्ष्यों को लेकर विकल्प भी तलाशने लगती थी, लेकिन अब मिली प्रेरणा से जल्द ही लक्ष्य निर्धारित होगा।
-पूर्णिमा, दसवीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां लक्ष्य के समक्ष विकल्प आ जाता है, वहीं कामयाबी दूर हो जाती है। इससे यह सीख मिली कि लक्ष्य से भटकना नहीं है। अपने निर्धारित लक्ष्य पर ही आगे बढ़ते जाना है। सम्मान समारोह जीवन भर के लिए यादगार बन गया है।
-मेघा, दसवीं
हमें सिर्फ अंकों में नहीं उलझना है। ज्ञान पाने की लालसा के साथ आगे बढ़ना है। यही प्रेरणा इस समारोह से मिली है। साथ ही विद्या पाने का मतलब विनम्र होना भी है। मेधावी होने के साथ- संस्कारवान भी बनना है। गुरु, शिक्षक, माता-पिता का सम्मान सर्वोच्च है।
-तमन्ना, दसवीं