{"_id":"e355c05fb258918c15c4934a152ff5b3","slug":"mdu-no-result-copy-dump-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एमडीयू का कारनामा, छात्रों को रिजल्ट पता नहीं कॉपी कर दी डंप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एमडीयू का कारनामा, छात्रों को रिजल्ट पता नहीं कॉपी कर दी डंप
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 07 Oct 2015 01:36 AM IST
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एमडीयू में लापरवाही का एक और कारनामा सामने आया है।
नियमानुसार, परीक्षा परिणाम जारी होने के छह माह बाद कापियों को डंप किया जाना चाहिए, लेकिन एमडीयू में विद्यार्थियों को रिजल्ट की जानकारी मिलने से पहले ही उनकी कापियों को डंप कर दिया गया।
ऐसे में फेल होने वाले छात्रों के पास दोबारा से कॉपियां चेक कराने का विकल्प भी नहीं बचता। बीएससी के दो छात्रों ने डीएमसी मिलने से पहले ही कापियों को डंप करने का आरोप लगाया है।
रेवाड़ी के केएलपी कॉलेज के छात्र जलदीप और रविंद्र ने जुलाई 2014 में बीएससी बायोटेक्नोलॉजी 4 सेमेस्टर जेनेटिक सब्जेक्ट के मर्सी चांस की परीक्षा दी थी।
परीक्षा के बाद भी लंबे समय तक रिजल्ट जारी नहीं हुआ। छात्रों ने वीसी और परीक्षा नियंत्रक को शिकायत की, जिस पर दोनों को रिजल्ट ब्रांच से फोन कर बुलाया गया और कहा कि अपने पुराने दस्तावेज की फोटो कॉपी जमा करा दें।
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छात्रों का कहना है कि सोमवार को हम यूनिवर्सिटी में पहुंचे, जहां पर अगस्त 2015 में तैयार हुई डीएमसी थमा दी गई। डीएमसी में दोनों छात्रों को फेल दर्शाया गया है।
दोनों ने दोबारा से कापियां चेक कराने के लिए आवेदन किया, लेकिन पता चला कि उनकी कापियों को तो सितंबर 2014 में ही डंप कर दिया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि छात्रों को रिजल्ट जानने से पहले ही उनकी कापियों को डंप कैसे कर दिया गया? नियम की बात करें तो रिजल्ट जारी होने से छह माह बाद या फिर कम से कम तीन माह बाद कापियों को डंप किया जाना चाहिए।
यदि कोई छात्र रिजल्ट पर संतुष्ट नहीं है तो वह अपनी कापी दोबारा से चैक करा सकता है। ऐसे में एक बार फिर से यूनिवर्सिटी की लापरवाही पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पहले भी विवादों में एमडीयू
एमडीयू में परीक्षा परिणाम को लेकर अक्सर विवाद उठते हैं। कुछ वर्ष पहले एमडीयू की छत पर कुछ कॉपियां पड़ी मिली थीं, जिन पर काफी विवाद उठा था। मामला अभी तक भी नहीं सुलझा। इसके अलावा कुछ दिन पहले अंक घोटाले का भी मामला सामने आया था। यह मामला भी दबाने की कोशिश की जा रही है।
परीक्षा नियंत्रक बोले, मीटिंग में हूं
इस संबंध में जब परीक्षा नियंत्रक डॉ. बीएस सिंधु को फोन किया गया तो उन्होंने जवाब दिया कि मैं मीटिंग में हूं और फोन काट दिया। इसके बाद फोन रिसीव नहीं किया।
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नियमानुसार, परीक्षा परिणाम जारी होने के छह माह बाद कापियों को डंप किया जाना चाहिए, लेकिन एमडीयू में विद्यार्थियों को रिजल्ट की जानकारी मिलने से पहले ही उनकी कापियों को डंप कर दिया गया।
ऐसे में फेल होने वाले छात्रों के पास दोबारा से कॉपियां चेक कराने का विकल्प भी नहीं बचता। बीएससी के दो छात्रों ने डीएमसी मिलने से पहले ही कापियों को डंप करने का आरोप लगाया है।
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रेवाड़ी के केएलपी कॉलेज के छात्र जलदीप और रविंद्र ने जुलाई 2014 में बीएससी बायोटेक्नोलॉजी 4 सेमेस्टर जेनेटिक सब्जेक्ट के मर्सी चांस की परीक्षा दी थी।
परीक्षा के बाद भी लंबे समय तक रिजल्ट जारी नहीं हुआ। छात्रों ने वीसी और परीक्षा नियंत्रक को शिकायत की, जिस पर दोनों को रिजल्ट ब्रांच से फोन कर बुलाया गया और कहा कि अपने पुराने दस्तावेज की फोटो कॉपी जमा करा दें।
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छात्रों का कहना है कि सोमवार को हम यूनिवर्सिटी में पहुंचे, जहां पर अगस्त 2015 में तैयार हुई डीएमसी थमा दी गई। डीएमसी में दोनों छात्रों को फेल दर्शाया गया है।
दोनों ने दोबारा से कापियां चेक कराने के लिए आवेदन किया, लेकिन पता चला कि उनकी कापियों को तो सितंबर 2014 में ही डंप कर दिया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि छात्रों को रिजल्ट जानने से पहले ही उनकी कापियों को डंप कैसे कर दिया गया? नियम की बात करें तो रिजल्ट जारी होने से छह माह बाद या फिर कम से कम तीन माह बाद कापियों को डंप किया जाना चाहिए।
यदि कोई छात्र रिजल्ट पर संतुष्ट नहीं है तो वह अपनी कापी दोबारा से चैक करा सकता है। ऐसे में एक बार फिर से यूनिवर्सिटी की लापरवाही पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पहले भी विवादों में एमडीयू
एमडीयू में परीक्षा परिणाम को लेकर अक्सर विवाद उठते हैं। कुछ वर्ष पहले एमडीयू की छत पर कुछ कॉपियां पड़ी मिली थीं, जिन पर काफी विवाद उठा था। मामला अभी तक भी नहीं सुलझा। इसके अलावा कुछ दिन पहले अंक घोटाले का भी मामला सामने आया था। यह मामला भी दबाने की कोशिश की जा रही है।
परीक्षा नियंत्रक बोले, मीटिंग में हूं
इस संबंध में जब परीक्षा नियंत्रक डॉ. बीएस सिंधु को फोन किया गया तो उन्होंने जवाब दिया कि मैं मीटिंग में हूं और फोन काट दिया। इसके बाद फोन रिसीव नहीं किया।