{"_id":"69079cf5c3f53fe59e04eeaf","slug":"making-round-rotis-was-a-challenge-for-kanta-now-she-runs-a-canteen-rohtak-news-c-17-roh1020-755421-2025-11-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: कांता के लिए गोल रोटी बनाना था चुनौती, अब चला रहीं कैंटीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: कांता के लिए गोल रोटी बनाना था चुनौती, अब चला रहीं कैंटीन
विज्ञापन
12...कैंटीन में कार्य कर रही महिला कांता । स्रोत : एसएचजी
रोहतक । लाखनमाजरा में पांच साल पहले तक जिस महिला के लिए गोल रोटी बनाना चुनौतीपूर्ण था वही अब अपनी कैंटीन चलाकर स्वाभिमान से स्वरोजगार कर रही हैं। हम बात कर रहे हैं लाखनमाजरा में श्री कबीर दास स्वयं सहायता समूह की सदस्य कांता की। 10वीं कक्षा तक पढ़ी कांता ने इस कार्य में दो अन्य महिलाओं को भी रोजगार दिया है।
कांता बताती हैं कि कैंटीन से ही वे टिफिन सर्विस का भी कारोबार कर रही हैं। इस स्वरोजगार से उनको प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये की आय हो रही है। कांता के अनुसार करीब पांच साल पहले तक गोल रोटी बनाना उनके लिए मुश्किल काम था। पांच साल पहले वे स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और होटल मैनेजमेंट का प्रशिक्षण भी लिया।
उन्होंने रोटी को गोल बनाना सीखा और समूह के माध्यम से कैंटीन का कार्य शुरू किया। कैंटीन के लिए उन्होंने बैंक से लोन भी लिया। यह लोन उन्होंने एक साल में ही भर दिया। कैंटीन में उनके साथ शीला व रेखा को भी शुरू से ही रोजगार मिला हुआ है। लाखनमाजरा में तहसील के पास उन्होंने कैंटीन चलाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
कांता बताती हैं कि कैंटीन से ही वे टिफिन सर्विस का भी कारोबार कर रही हैं। इस स्वरोजगार से उनको प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये की आय हो रही है। कांता के अनुसार करीब पांच साल पहले तक गोल रोटी बनाना उनके लिए मुश्किल काम था। पांच साल पहले वे स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और होटल मैनेजमेंट का प्रशिक्षण भी लिया।
विज्ञापन
उन्होंने रोटी को गोल बनाना सीखा और समूह के माध्यम से कैंटीन का कार्य शुरू किया। कैंटीन के लिए उन्होंने बैंक से लोन भी लिया। यह लोन उन्होंने एक साल में ही भर दिया। कैंटीन में उनके साथ शीला व रेखा को भी शुरू से ही रोजगार मिला हुआ है। लाखनमाजरा में तहसील के पास उन्होंने कैंटीन चलाती हैं।
विज्ञापन