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Rohtak News: सुनों पेड़ों की पुकार, इन्हें भी आजादी का है अधिकार
Tue, 18 Jun 2024 04:40 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Tue, 18 Jun 2024 04:40 AM IST
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पेड़-पौधे बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम के लिए एकमात्र विकल्प है। पौधे लगाना और पेड़ बनने तक इनके संरक्षण की जिम्मेदारी हमारी है। पौधों काे संरक्षण देने के लिए लगाए गए ट्री गार्ड भी पेड़ों को क्षति पहुंचा रहे हैं। इन्हें भी हटाने की जरूरत है। पेड़ों को चारों ओर से घेरे लोहे के जाल हटाने कर राहत दिलाना जरूरी है।
जाल में फंसे पेड़ों के दर्द को समझते हुए विभिन्न वार्डों के निवर्तमान पार्षदों ने अमर उजाला के अभियान ''''पेड़ों की पुकार हमें करो आजाद'''' को समर्थन दिया। उन्होंने अपने इलाके में पेड़ के तनों पर लिपटे लोहे के शिकंजे कटवाकर पेड़ों को आजाद कराने की भी आवश्यकता जताई। सबने एक सुर में कहा कि जाल की जकड़न से दर्द से कराह रहे पेड़ों की पुकार सुनी जानी चाहिए। इन्हें भी आजादी का अधिकार है।
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पेड़ हमारे जीवन का अटूट हिस्सा हैं। यह जीवनदायीनी ऑक्सीजन के अलावा ईंधन, लकड़ी व अन्य जरूरी चीजें भी देते हैं। प्राकृतिक संतुलन बनाने व वर्षा चक्र भी इनके दम पर है। ऐसे में पेड़-पौधों की सुरक्षा करना जरूरी है। इसी कड़ी में लोहे के जाल में जकड़े पेड़ों को आजाद कराया जाएगा।
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अशोक खुराना, वार्ड 13, पूर्व पार्षद।
पेड़ पर्यावरण की दृष्टि से अहम हैं। इन्हें काटकर हम अपना ही नुकसान करते हैं। सेक्टर एक व आसपास के इलाके में अनगिनत पेड़ ट्री गार्डों में उलझे हुए हैं। इनसे निकलना इनके लिए नामुमकिन है। इसलिए पुराने ट्री गार्ड काटने की जरूरत है। इन्हें काटकर हमें पेड़ों को आजाद कराना होगा।
कदम सिंह अहलावत, वार्ड 11 पूर्व पार्षद।
पेड़-पौधों के बगैर धरती पर जीवन असंभव है। यह जीवन का आधार हैं। कोविड ने हमें यह समझा भी दिया है इसलिए पेड़ों को बचाना होगा। शहर में अनेक जगह पेड़ लोहे के जालों में कैद हैं। इन्हें इस कैद से आजाद कराने की आवश्यकता है। प्रशासन भी इस ओर पहल करते हुए कदम आगे बढ़ाए।
दीपू नागपाल, वार्ड 19, पूर्व पार्षद पति।
पर्यावरण संतुलन बनाने में पेड़ ही सक्षम हैं। प्रदूषण का स्तर कम करनेे में भी इनकी अहम भूमिका है। इसलिए पौधे लगान व पेड़ बनने पर उन्हें संरक्षण देने की जरूरत है। इलाके में अनेक पेड़ लोहे के ट्री गार्डों में फंसे हैं। इन्हें निकाला जाना बेहद आवश्यके है।
कृष्ण सहरावत, वार्ड एक, पूर्व पार्षद।
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जाल में फंसे पेड़ों के दर्द को समझते हुए विभिन्न वार्डों के निवर्तमान पार्षदों ने अमर उजाला के अभियान ''''पेड़ों की पुकार हमें करो आजाद'''' को समर्थन दिया। उन्होंने अपने इलाके में पेड़ के तनों पर लिपटे लोहे के शिकंजे कटवाकर पेड़ों को आजाद कराने की भी आवश्यकता जताई। सबने एक सुर में कहा कि जाल की जकड़न से दर्द से कराह रहे पेड़ों की पुकार सुनी जानी चाहिए। इन्हें भी आजादी का अधिकार है।
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पेड़ हमारे जीवन का अटूट हिस्सा हैं। यह जीवनदायीनी ऑक्सीजन के अलावा ईंधन, लकड़ी व अन्य जरूरी चीजें भी देते हैं। प्राकृतिक संतुलन बनाने व वर्षा चक्र भी इनके दम पर है। ऐसे में पेड़-पौधों की सुरक्षा करना जरूरी है। इसी कड़ी में लोहे के जाल में जकड़े पेड़ों को आजाद कराया जाएगा।
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अशोक खुराना, वार्ड 13, पूर्व पार्षद।
पेड़ पर्यावरण की दृष्टि से अहम हैं। इन्हें काटकर हम अपना ही नुकसान करते हैं। सेक्टर एक व आसपास के इलाके में अनगिनत पेड़ ट्री गार्डों में उलझे हुए हैं। इनसे निकलना इनके लिए नामुमकिन है। इसलिए पुराने ट्री गार्ड काटने की जरूरत है। इन्हें काटकर हमें पेड़ों को आजाद कराना होगा।
कदम सिंह अहलावत, वार्ड 11 पूर्व पार्षद।
पेड़-पौधों के बगैर धरती पर जीवन असंभव है। यह जीवन का आधार हैं। कोविड ने हमें यह समझा भी दिया है इसलिए पेड़ों को बचाना होगा। शहर में अनेक जगह पेड़ लोहे के जालों में कैद हैं। इन्हें इस कैद से आजाद कराने की आवश्यकता है। प्रशासन भी इस ओर पहल करते हुए कदम आगे बढ़ाए।
दीपू नागपाल, वार्ड 19, पूर्व पार्षद पति।
पर्यावरण संतुलन बनाने में पेड़ ही सक्षम हैं। प्रदूषण का स्तर कम करनेे में भी इनकी अहम भूमिका है। इसलिए पौधे लगान व पेड़ बनने पर उन्हें संरक्षण देने की जरूरत है। इलाके में अनेक पेड़ लोहे के ट्री गार्डों में फंसे हैं। इन्हें निकाला जाना बेहद आवश्यके है।
कृष्ण सहरावत, वार्ड एक, पूर्व पार्षद।