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हमारी नर्सरी : कबड्डी नहीं, अब वुशू में भी नर्सरी से निकल रहे नेशनल खिलाड़ी

Mon, 02 Nov 2026 02:51 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 02 Nov 2026 02:51 AM IST
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Level Athletes Are Now Emerging from Our Nursery in
16 नर्सरी में अभ्यास करते खिलाड़ी। संवाद - फोटो : samvad
रोहतक। जिले का गांव मकड़ौली कबड्डी के खिलाड़ियों के लिए जाना जाता है लेकिन यहां के बच्चे वुशू में भी पीछे नहीं हैं। यहां इस साल के अप्रैल माह से वुशू की खेल नर्सरी संचालित है। यहां अभ्यास करने वाले प्रिंस इस बार फिर से नेशनल के लिए चयनित हुए हैं। वे पिछले साल भी तमिलनाडु के कोइंबटूर में हुए नेशनल में रजत पदक जीत चुके हैं।
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प्रिंस अंडर-19 आयु वर्ग के खिलाड़ी हैं। वे शहर के हिसार बाइपास इलाके के पास के रहने वाले हैं। उनकी ही तरह नर्सरी के अन्य खिलाड़ी भी लगातार आगे बढ़ रहे हैं। मकड़ौली कलां की 11 वर्षीय रिया करीब 10 महीने से वुशू खेल रही हैं। अप्रैल में वे नर्सरी में आईं। इतने कम समय में रिया ने राज्यस्तर पर कांस्य पदक जीतकर अपनी पहचान एक होनहार खिलाड़ी के रूप में स्थापित की। यह प्रतियोगिता अक्तूबर माह में जींद के नरवाना में हुई थी।
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इसी तरह अंडर-19 वर्ग के लक्ष्य भी जिला स्तरीय स्कूली खेलों में स्वर्ण पदक विजेता रहे थे। वे सुनारिया गांव के रहने वाले हैं। नर्सरी में कुल 25 खिलाड़ी रोजाना दो घंटे सुबह और तीन घंटे शाम को अभ्यास करते हैं। इस दौरान कोच उन्हें वार्म अप, स्ट्रेंग्थ और एंड्यूरेंस के साथ सप्ताह में दो बार फाइट का अभ्यास भी कराते हैं।
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कोच संदीप कश्यप खुद भी नेशनल मेडलिस्ट हैं। उन्होंने साल 2007 में नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। वे 48 किलो भार वर्ग के खिलाड़ी रहे हैं। करीब 12 साल से कोच के रूप में खिलाड़ियों को अभ्यास करवा रहे हैं।


संदीप ने बताया कि गांव में कबड्डी का ज्यादा रुझान है। ऐसे में बच्चों और उनके माता-पिता का ध्यान वुशू की ओर आकर्षित करना बहुत मुश्किल था। शुरुआत में तो लोगों के घर जाकर समझाना पड़ता था। बाद में एक के बाद एक बच्चों ने आना शुरू किया। कुछ बच्चे रोहतक और सुनारिया के भी हैं, जबकि अन्य गांव के ही हैं। अधिकांश खिलाड़ी वे हैं जिन्होंने वुशू का सफर यहीं से शुरू किया था।
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