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कोट से सुबह पहुंचे 27 लोग, बस स्टैंड पर हुई जांच, 14 दिन घर पर रहेंगे क्वारंटीन
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कोटा से आए बच्चों की जांच करने वाली स्वास्थ्य विभाग की टीम।
- फोटो : RohtakCity
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रोहतक। कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच जिले के होनहार कोटा से अपने घर लौट आए हैं। आईआईटी व नीट सरीखी परीक्षा के लिए कोचिंग लेने गए ये होनहार वहां अपने परिजनों के साथ फंसे थे। शनिवार सुबह चार बजे प्रशासन ने 23 विद्यार्थियों व चार अभिभावकों को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद इनके घर पहुंचा दिया है। अच्छी बात यह है कि इनमें से किसी में भी कोरोना के लक्षण नहीं पाए गए हैं। अब रिपोर्ट आने का इंतजार है।
रोहतक से कुछ बच्चे अपना करियर संवारने के लिए कोटा में कोचिंग लेने गए थे। महामारी के चलते लागू किए लॉकडान में ये फंस गए थे। इनमें से कुछ के तो अभिभावक भी साथ थे। ये अपने बच्चों को लेने गए थे। ये लोग 31 दिन बाद अपने घर लौटे हैं। शनिवार की अलसुबह करीब तीन बजे रोडवेज बस कोटा से रोहतक बस अड्डे पर पहुंची। इसमें सवार 27 लोगों में से 23 विद्यार्थी थे। इन 23 में से 12 युवक व 11 युवतियां हैं। बस के स्टैंड में पहुंचते ही बीडीपीओ राजपाल चहल की अगुवाई में टीम ने इसे घेर लिया।
स्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके पर ही बुलाया गया। एंबुलेंस में चलती फिरती लैब के साथ आई टीम ने बस स्टैंड पर ही सभी 27 लोगों के सैंपल लिए व स्वास्थ्य की जांच की। टीम की गहन जांच में किसी में भी कोरोना संबंधी लक्षण नहीं मिले। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इन्हें 14 दिन के लिए घर में ही क्वारंटीन रहने के साथ कोविड-19 के सभी निर्देशों के पालन करने की हिदायत दी है।
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कोटा से रोडवेज बस के जरिये 27 लोगों को रोहतक लाया गया है। इनमें से 23 विद्यार्थी थे। ये वहां कोचिंग के लिए थे। सभी सुरक्षित हैं। इन्हें कोरोना जांच के बाद 14 दिन के लिए घर में ही क्वारंटीन रहने की हिदायत दी गई है। कोविड-19 के सभी दिशा निर्देशों की भी पालना करनी होगी। बस में दो बैग किताबों से भरे मिले हैं। ये किसके हैं, पता नहीं। किसी ने इन पर मालिकाना हक नहीं जताया। इसलिए पुलिस चौकी में जमा करा दिए गए हैं।
राजपाल चहल, बीपीडीओ।
बाजार बंद, रसोई खाली, 20 वाले टमाटर भी 60 रुपये के भाव, इस पर धमकी लेना हो तो लो..
रोहतक। बाजाद बंद। रसोई खाली। रेहड़ी वाला भी 20 रुपये वाले टमाटर 60 रुपये के भाव बेच रहा था। वह भी पूरे रौब के साथ लेना हो तो लो। यही है। खाने-पीने का सामान दोगुना महंगे दाम पर खरीदना पड़ा। अब अपने घर में सेफ हैं। सब ठीक है। वहां टेंशन थी। यहां नहीं। यह कहना है नेवी के सेवानिवृत्त चीफ पीटी ऑफिसर बिजेंद्र डागर का। वे शनिवार सुबह करीब 31 दिन बाद राजस्थान के कोटा शहर से अपने घर पहुंचे हैं। अमर उजाला से हुई विशेष बातचीत में उन्होंने अपनी आपबीती बताई। यह अकेला मामला नहीं है, बल्कि ऐसे और भी अभिभावक व विद्यार्थी हैं। इन्हें भी लॉकडाउन में काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
सेवानिवृत्त चीफ पीटी ऑफिसर ने कहा कि इन 31 दिनों ने मेरे ड्यूटी वाले दिन याद दिला दिए। हमारी ड्यूटी बेहद सख्त होती है। कुछ यही अहसास महामारी के चलते लागू किए गए लॉकडाउन में हुआ। पब्लिक लॉकडाउन के दिन बेटी को लेने अपनी कार से कोटा पहुंचा था। वह नीट की तैयारी के लिए वर्ष 2019 से वहां किराये के मकान में रह रही है। इसके अगले ही दिन 21 दिन का लॉकडाउन घोषित हो गया। वहां के जिला प्रशासन से मिलकर घर जाने की अनुमति मांगी, मगर बात नहीं बनी। लॉकडाउन में बेटी के साथ ही रहा। इस दौरान खाने पीने की काफी दिक्कत आई। बाजार बंद होने के कारण सामान काफी महंगा हो गया था। रसोई में भी बेटी के पास ज्यादा सामान नहीं था। बेटी की एकेडमी व राजस्थान सरकार से राशन के रूप में कुछ राहत मिली। फिर हरियाणा सरकार से संदेश मिला। हमने एप के जरिये अपनी सूचना भेजी। सीआईडी से कॉल आई। नाम-पता व अन्य जानकारी लेने के बाद एसडीएम से बात हुई। उन्होंने अपना सामान पैक रखने के साथ बस भेजने की बात कही। अपनी कार छोड़कर बेटी के साथ रोडवेज से अपने घर पहुंचा तो सुकून मिला।
बिहार के बच्चे अब भी फंसे
कोटा में हम ही नहीं थे। वहां और भी प्रांतों से बच्चे हैं। बिहार के बच्चों को तो वहां से निकाला ही नहीं जा रहा है। वे अब भी वहीं फंसे हैं। हमारी सरकार ने हमें निकाला। इसके लिए सरकार व रोडवेज के आभारी हैं, मगर जो फंसे हैं, उन्हें अभी राहत नहीं मिली है। वहां की सरकार भी उनके लिए कुछ करे। मानवता दिखाए।
पत्नी पीजीआई में करती रही मरीजों की सेवा
बिजेंद्र डागर ने बताया कि पत्नी किरण बाला पीजीआई में नर्स है। इन दिनों वार्ड सात में ड्यूटी कर रही हैं। यहीं कोरोना संदिग्धों को क्वारंटीन रखा जाता है। वह अपने 13 साल के बेटे ध्रुव को घर पर छोड़कर पीजीआई में मरीजों की सेवा में जुटी रही। पिछला एक महीना सभी के लिए काफी कष्टदायी रहा, मगर अब सब ठीक है। अच्छा लगा कि पत्नी अपनी ड्यूटी बेहतर ढंग से निभा रही है।
लॉकडाउन में फंसा तो होस्टल में रहा
साहिल गुप्ता आईआईटी की कोचिंग के लिए कोटा गए थे। वहां 17 मार्च को गए। उन्हें 27 मार्च को वापस आना था। इस बीच लॉकडाउन लागू हो गया। इस कारण वहां के एक होस्टल में रहना पड़ा। वहां खाना पीना तो मिल जाता था, मगर बाहर सब कुछ बंद था। संक्रमण तेजी से फैल रहा था। पॉजिटिव लगातार सामने आ रहे थे। इस कारण थोड़ी चिंता थी। इसलिए अपने घर जाने के सिवाय और कुछ दिमाग में नहीं था। प्रदेश सरकार की ओर से भेजी गई रोडवेज बस से यहां पहुंचा। अब अच्छा लग रहा है।
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रोहतक से कुछ बच्चे अपना करियर संवारने के लिए कोटा में कोचिंग लेने गए थे। महामारी के चलते लागू किए लॉकडान में ये फंस गए थे। इनमें से कुछ के तो अभिभावक भी साथ थे। ये अपने बच्चों को लेने गए थे। ये लोग 31 दिन बाद अपने घर लौटे हैं। शनिवार की अलसुबह करीब तीन बजे रोडवेज बस कोटा से रोहतक बस अड्डे पर पहुंची। इसमें सवार 27 लोगों में से 23 विद्यार्थी थे। इन 23 में से 12 युवक व 11 युवतियां हैं। बस के स्टैंड में पहुंचते ही बीडीपीओ राजपाल चहल की अगुवाई में टीम ने इसे घेर लिया।
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स्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके पर ही बुलाया गया। एंबुलेंस में चलती फिरती लैब के साथ आई टीम ने बस स्टैंड पर ही सभी 27 लोगों के सैंपल लिए व स्वास्थ्य की जांच की। टीम की गहन जांच में किसी में भी कोरोना संबंधी लक्षण नहीं मिले। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इन्हें 14 दिन के लिए घर में ही क्वारंटीन रहने के साथ कोविड-19 के सभी निर्देशों के पालन करने की हिदायत दी है।
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कोटा से रोडवेज बस के जरिये 27 लोगों को रोहतक लाया गया है। इनमें से 23 विद्यार्थी थे। ये वहां कोचिंग के लिए थे। सभी सुरक्षित हैं। इन्हें कोरोना जांच के बाद 14 दिन के लिए घर में ही क्वारंटीन रहने की हिदायत दी गई है। कोविड-19 के सभी दिशा निर्देशों की भी पालना करनी होगी। बस में दो बैग किताबों से भरे मिले हैं। ये किसके हैं, पता नहीं। किसी ने इन पर मालिकाना हक नहीं जताया। इसलिए पुलिस चौकी में जमा करा दिए गए हैं।
राजपाल चहल, बीपीडीओ।
बाजार बंद, रसोई खाली, 20 वाले टमाटर भी 60 रुपये के भाव, इस पर धमकी लेना हो तो लो..
रोहतक। बाजाद बंद। रसोई खाली। रेहड़ी वाला भी 20 रुपये वाले टमाटर 60 रुपये के भाव बेच रहा था। वह भी पूरे रौब के साथ लेना हो तो लो। यही है। खाने-पीने का सामान दोगुना महंगे दाम पर खरीदना पड़ा। अब अपने घर में सेफ हैं। सब ठीक है। वहां टेंशन थी। यहां नहीं। यह कहना है नेवी के सेवानिवृत्त चीफ पीटी ऑफिसर बिजेंद्र डागर का। वे शनिवार सुबह करीब 31 दिन बाद राजस्थान के कोटा शहर से अपने घर पहुंचे हैं। अमर उजाला से हुई विशेष बातचीत में उन्होंने अपनी आपबीती बताई। यह अकेला मामला नहीं है, बल्कि ऐसे और भी अभिभावक व विद्यार्थी हैं। इन्हें भी लॉकडाउन में काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
सेवानिवृत्त चीफ पीटी ऑफिसर ने कहा कि इन 31 दिनों ने मेरे ड्यूटी वाले दिन याद दिला दिए। हमारी ड्यूटी बेहद सख्त होती है। कुछ यही अहसास महामारी के चलते लागू किए गए लॉकडाउन में हुआ। पब्लिक लॉकडाउन के दिन बेटी को लेने अपनी कार से कोटा पहुंचा था। वह नीट की तैयारी के लिए वर्ष 2019 से वहां किराये के मकान में रह रही है। इसके अगले ही दिन 21 दिन का लॉकडाउन घोषित हो गया। वहां के जिला प्रशासन से मिलकर घर जाने की अनुमति मांगी, मगर बात नहीं बनी। लॉकडाउन में बेटी के साथ ही रहा। इस दौरान खाने पीने की काफी दिक्कत आई। बाजार बंद होने के कारण सामान काफी महंगा हो गया था। रसोई में भी बेटी के पास ज्यादा सामान नहीं था। बेटी की एकेडमी व राजस्थान सरकार से राशन के रूप में कुछ राहत मिली। फिर हरियाणा सरकार से संदेश मिला। हमने एप के जरिये अपनी सूचना भेजी। सीआईडी से कॉल आई। नाम-पता व अन्य जानकारी लेने के बाद एसडीएम से बात हुई। उन्होंने अपना सामान पैक रखने के साथ बस भेजने की बात कही। अपनी कार छोड़कर बेटी के साथ रोडवेज से अपने घर पहुंचा तो सुकून मिला।
बिहार के बच्चे अब भी फंसे
कोटा में हम ही नहीं थे। वहां और भी प्रांतों से बच्चे हैं। बिहार के बच्चों को तो वहां से निकाला ही नहीं जा रहा है। वे अब भी वहीं फंसे हैं। हमारी सरकार ने हमें निकाला। इसके लिए सरकार व रोडवेज के आभारी हैं, मगर जो फंसे हैं, उन्हें अभी राहत नहीं मिली है। वहां की सरकार भी उनके लिए कुछ करे। मानवता दिखाए।
पत्नी पीजीआई में करती रही मरीजों की सेवा
बिजेंद्र डागर ने बताया कि पत्नी किरण बाला पीजीआई में नर्स है। इन दिनों वार्ड सात में ड्यूटी कर रही हैं। यहीं कोरोना संदिग्धों को क्वारंटीन रखा जाता है। वह अपने 13 साल के बेटे ध्रुव को घर पर छोड़कर पीजीआई में मरीजों की सेवा में जुटी रही। पिछला एक महीना सभी के लिए काफी कष्टदायी रहा, मगर अब सब ठीक है। अच्छा लगा कि पत्नी अपनी ड्यूटी बेहतर ढंग से निभा रही है।
लॉकडाउन में फंसा तो होस्टल में रहा
साहिल गुप्ता आईआईटी की कोचिंग के लिए कोटा गए थे। वहां 17 मार्च को गए। उन्हें 27 मार्च को वापस आना था। इस बीच लॉकडाउन लागू हो गया। इस कारण वहां के एक होस्टल में रहना पड़ा। वहां खाना पीना तो मिल जाता था, मगर बाहर सब कुछ बंद था। संक्रमण तेजी से फैल रहा था। पॉजिटिव लगातार सामने आ रहे थे। इस कारण थोड़ी चिंता थी। इसलिए अपने घर जाने के सिवाय और कुछ दिमाग में नहीं था। प्रदेश सरकार की ओर से भेजी गई रोडवेज बस से यहां पहुंचा। अब अच्छा लग रहा है।