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जज की टिप्पणी ः एक ही पार्टी पर धोखाधड़ी क्यों, दोनों पर क्यों नहीं बनती
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कोर्ट यह समझने में असमर्थ है कि एक ही पार्टी पर धोखाधड़ी क्यों बनती है, दोनों पर क्यों नहीं। जब उन्होंने शादी की तब दोनों पार्टियां पहले से शादीशुदा थीं और दोनों ने हलफनामे में स्वयं को अविवाहित दर्शाया है। यह टिप्पणी जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए की।
इस टिप्पणी के साथ अदालत ने आरोपी द्वारा लगाई गई अग्रिम जमानत की याचिका भी खारिज कर दी। टिप्पणी में एडीजे डॉ. पंकज ने कहा कि सोसायटी में इस तरह के झूठे केस बढ़ रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में बार-बार और कई अधिकारियों ने जांच की, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका। आईपीसी की धारा 415 यह नहीं कहती कि यह केवल महिला या केवल पुरुष पर लागू है।
टिप्पणी के साथ खारिज की अग्रिम जमानत याचिका
इसमें कोई संदेह नहीं है कि अग्रिम जमानत का लाभ असाधारण राहत है। इसे अतिरिक्त सामान्य परिस्थितियों में लागू किया जा सकता है। एक व्यक्ति जो पहले से ही इस तरह के आपराधिक कृत्य कर रहा है, को इस तरह की अतिरिक्त साधारण राहत का हकदार नहीं कहा जा सकता है। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों की समग्रता में, अग्रिम जमानत के लिए कोई मामला नहीं बनता है।
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यह था मामला
शहर निवासी एक महिला ने 2 अगस्त 2019 को सिविल लाइन थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसकी शादी भिवानी निवासी व्यक्ति के साथ 24 नवंबर 2013 को हुई थी। उनकी चार साल की एक लड़की भी है। पति के साथ मनमुटाव रहने के कारण उसने वर्ष 2018 में तलाक का केस दायर किया। तलाक के केस के दौरान अदालत परिसर में उसकी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई। महिला का आरोप था कि उसने उसे तलाक दिलवाने और उसके बाद उससे शादी करने का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। मार्च 2019 में उसने एक वेलफेयर ट्रस्ट में उसके साथ शादी कर ली और किराये के मकान में रखा तथा उससे लगातार संबंध बनाए। उसके बाद वह एक दिन गायब हो गया और उसका फोन भी बंद आया। उसके पिता को फोन किया तो पता चला कि उसकी 9 फरवरी 2019 को शादी हो चुकी है। पीड़िता ने शिकायत में उसकी बेटी के खाते से साढ़े तीन लाख रुपये निकालने का भी आरोप लगाया। पुलिस ने शिकायत पर आरोपी के खिलाफ धारा 376(2)एन, 494, 406, 420 के तहत केस दर्ज किया था।
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इस टिप्पणी के साथ अदालत ने आरोपी द्वारा लगाई गई अग्रिम जमानत की याचिका भी खारिज कर दी। टिप्पणी में एडीजे डॉ. पंकज ने कहा कि सोसायटी में इस तरह के झूठे केस बढ़ रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में बार-बार और कई अधिकारियों ने जांच की, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका। आईपीसी की धारा 415 यह नहीं कहती कि यह केवल महिला या केवल पुरुष पर लागू है।
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टिप्पणी के साथ खारिज की अग्रिम जमानत याचिका
इसमें कोई संदेह नहीं है कि अग्रिम जमानत का लाभ असाधारण राहत है। इसे अतिरिक्त सामान्य परिस्थितियों में लागू किया जा सकता है। एक व्यक्ति जो पहले से ही इस तरह के आपराधिक कृत्य कर रहा है, को इस तरह की अतिरिक्त साधारण राहत का हकदार नहीं कहा जा सकता है। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों की समग्रता में, अग्रिम जमानत के लिए कोई मामला नहीं बनता है।
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यह था मामला
शहर निवासी एक महिला ने 2 अगस्त 2019 को सिविल लाइन थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसकी शादी भिवानी निवासी व्यक्ति के साथ 24 नवंबर 2013 को हुई थी। उनकी चार साल की एक लड़की भी है। पति के साथ मनमुटाव रहने के कारण उसने वर्ष 2018 में तलाक का केस दायर किया। तलाक के केस के दौरान अदालत परिसर में उसकी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई। महिला का आरोप था कि उसने उसे तलाक दिलवाने और उसके बाद उससे शादी करने का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। मार्च 2019 में उसने एक वेलफेयर ट्रस्ट में उसके साथ शादी कर ली और किराये के मकान में रखा तथा उससे लगातार संबंध बनाए। उसके बाद वह एक दिन गायब हो गया और उसका फोन भी बंद आया। उसके पिता को फोन किया तो पता चला कि उसकी 9 फरवरी 2019 को शादी हो चुकी है। पीड़िता ने शिकायत में उसकी बेटी के खाते से साढ़े तीन लाख रुपये निकालने का भी आरोप लगाया। पुलिस ने शिकायत पर आरोपी के खिलाफ धारा 376(2)एन, 494, 406, 420 के तहत केस दर्ज किया था।