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कानपुर से रोहतक आने वाला बादल टाइगर पहुंचा जोधपुर
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शहर का मिनी जू पिछले करीब चार साल से सूना है। यहां का आकर्षण रहे 22 वर्षीय टाइगर सौरभ की मौत के बाद से पिंजरा खाली पड़ा है। इस पिंजरे व जू की रौनक लौटाने के लिए कानपुर चिड़ियाघर से टाइगर लाने की दो साल पहले खुली फाइल अब बंद हो गई है। अब यह बंगाल टाइगर रोहतक के बजाय जोधपुर चिड़ियाघर पहुंच गया है। इसकी वजह टाइगर के बदले हरियाणा की पहचान चिंकारा नहीं मिलना बताया जा रहा है। बता दें कि कानपुर के चिड़ियाघर के टाइगर प्रशांत के बड़े बेटे बादल को उसकी चुस्ती-फुर्ती को देखते हुए रोहतक लाने का प्रयास किया गया था।
कानपुर चिड़ियाघर में पैदा हुआ बादल
कानपुर जू ऑथिरिटी से रोहतक मिनी चिड़ियाघर में आने वाला बंगाल टाइगर चार साल पहले कानपुर चिड़ियाघर में ही जन्मा था। इसे रोहतक लाने को लेकर पिछले दो साल पहले प्लानिंग बनी थी। इसके तहत कानपुर जू एथॉरिटी ने बादल के बदले एक चिंकारा हिरण की मांग की थी। रोहतक जू के पास चिंकारा नहीं होने के चलते टाइगर यहां नहीं आ सका।
सौरभ 10 साल बना रहा रोहतक जू की शान
रोहतक के मिनी जू में चार साल पहले तक सौरभ की दहाड़ से गूंज रहा था। यह जू में 22 साल की उम्र तक रहा। बुढ़ापे व बीमारी के चलते नौ मार्च 2015 को उसने आखिरी सांस ली। सौरभ 10 साल तक चिड़ियाघर में लोगों का आकर्षण बना रहा।
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पिंजरे में बने बंकर से दुर्गा को मिला जंगल का माहौल
चिड़ियाघर में मादा पैंथर दुर्गा को जंगल सा माहौल मिल रहा है। शायद यही वजह है कि बंकर बनने के बाद से वह खुलकर अटखेलियां कर रही है। मौसम में घुला ठंडापन भी उसकी मस्ती की वजह बताया जा रहा है। दुर्गा को पिपली जू से लाया गया था। सवा साल की दुर्गा को डॉक्टर की सहला पर खाना दिया जा रहा है। इसमें रोज पांच किलो 125 ग्राम बकरे का मीट दिया जाता है। मांसाहारी पशुओं को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण नई दिल्ली के दिशा निर्देशों के अनुसार सप्ताह में एक दिन उपवास भी रखवाया जाता है। उनकी पाचन शक्ति ठीक रखने के लिए ऐसा किया जाता है।
गुरुग्राम के रेस्क्यू में पकड़ा था 6 साल का सोनू
चिड़ियाघर के अधिकारियों ने बताया कि तीन साल आठ महीने पहले यहां एक नर पैंथर लाया गया था। गुरुग्राम के जंगल से रेस्क्यू में पकड़े गए इस छह साल के पैंथर को सोनू नाम दिया गया। पांच साल पहले जब उसे पकड़ा गया था तो वह जख्मी हालत में था।
टाइगर बादल को यहां लाने की सेंट्रल जू ऑथिरिटी से परमिशन मिल चुकी थी, लेकिन सरप्लस नहीं होने की वजह से उसे नहीं लाया जा सका। मादा व नर पैंथर को फिलहाल अलग-अलग बाड़ों में रखा गया है। मादा पैंथर दुर्गा के लिए पिंजरे में जंगल सरीखा माहौल देने के लिए बंकर का निर्माण किया गया है।
- दीपक अलावादी, डीएफओ।
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कानपुर चिड़ियाघर में पैदा हुआ बादल
कानपुर जू ऑथिरिटी से रोहतक मिनी चिड़ियाघर में आने वाला बंगाल टाइगर चार साल पहले कानपुर चिड़ियाघर में ही जन्मा था। इसे रोहतक लाने को लेकर पिछले दो साल पहले प्लानिंग बनी थी। इसके तहत कानपुर जू एथॉरिटी ने बादल के बदले एक चिंकारा हिरण की मांग की थी। रोहतक जू के पास चिंकारा नहीं होने के चलते टाइगर यहां नहीं आ सका।
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सौरभ 10 साल बना रहा रोहतक जू की शान
रोहतक के मिनी जू में चार साल पहले तक सौरभ की दहाड़ से गूंज रहा था। यह जू में 22 साल की उम्र तक रहा। बुढ़ापे व बीमारी के चलते नौ मार्च 2015 को उसने आखिरी सांस ली। सौरभ 10 साल तक चिड़ियाघर में लोगों का आकर्षण बना रहा।
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पिंजरे में बने बंकर से दुर्गा को मिला जंगल का माहौल
चिड़ियाघर में मादा पैंथर दुर्गा को जंगल सा माहौल मिल रहा है। शायद यही वजह है कि बंकर बनने के बाद से वह खुलकर अटखेलियां कर रही है। मौसम में घुला ठंडापन भी उसकी मस्ती की वजह बताया जा रहा है। दुर्गा को पिपली जू से लाया गया था। सवा साल की दुर्गा को डॉक्टर की सहला पर खाना दिया जा रहा है। इसमें रोज पांच किलो 125 ग्राम बकरे का मीट दिया जाता है। मांसाहारी पशुओं को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण नई दिल्ली के दिशा निर्देशों के अनुसार सप्ताह में एक दिन उपवास भी रखवाया जाता है। उनकी पाचन शक्ति ठीक रखने के लिए ऐसा किया जाता है।
गुरुग्राम के रेस्क्यू में पकड़ा था 6 साल का सोनू
चिड़ियाघर के अधिकारियों ने बताया कि तीन साल आठ महीने पहले यहां एक नर पैंथर लाया गया था। गुरुग्राम के जंगल से रेस्क्यू में पकड़े गए इस छह साल के पैंथर को सोनू नाम दिया गया। पांच साल पहले जब उसे पकड़ा गया था तो वह जख्मी हालत में था।
टाइगर बादल को यहां लाने की सेंट्रल जू ऑथिरिटी से परमिशन मिल चुकी थी, लेकिन सरप्लस नहीं होने की वजह से उसे नहीं लाया जा सका। मादा व नर पैंथर को फिलहाल अलग-अलग बाड़ों में रखा गया है। मादा पैंथर दुर्गा के लिए पिंजरे में जंगल सरीखा माहौल देने के लिए बंकर का निर्माण किया गया है।
- दीपक अलावादी, डीएफओ।