जाट आरक्षण आंदोलन में 102 सेवा भी दे गई जवाब
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जाट आरक्षण आंदोलन में जच्चा-बच्चा को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने वाली 102 एंबुलेंस सेवा भी जवाब दे गई। अपने यहां मरीजों का बोझ कम करने के लिए पीजीआई ने भी बगैर समय पूरा हुए जच्चा को डिस्चार्ज कर दिया। इस संबंध में जब परिजन संस्थान निदेशक के पास पहुंचे तो उन्होंने एंबुलेंस का अप्रूवल तो दे दी, लेकिन इसका लाभ नहीं मिला। परिजनों को महंगी कीमत पर निजी एंबुलेंस में जच्चा को ले जाना पड़ा।
कंसाला निवासी महावीर सिंह ने बताया कि कविता ने मंगलवार सायं को पीजीआई के वार्ड दो में बच्चे को जन्म दिया। उसे बुधवार को छुट्टी दे दी गई लेकिन डॉक्टरों से कहा कि एंबुलेंस उनके बस में नहीं है। करीब सवा घंटे की मशक्कत के बाद जब वे निदेशक कार्यालय पहुंचे तो वहां अधिकारी से एंबुलेंस की सुविधा दिलाने की फरियाद की। महावीर सिंह ने बताया कि न तो जच्चा को एंबुलेंस मिली और न ही सहायता राशि।
नार्मल डिलीवरी के लिए 2000 रुपये का समान मंगाया गया सो अलग। उन्होंने रोष जताया कि प्रदेश सरकार डिलीवरी कराने पर नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाओं के साथ एंबुलेंस उपलब्ध करवाने का दावा कर रही है लेकिन सुविधा नहीं मिल रही है।
102 पर उठाए सवाल
शिकायतकर्ता ने बताया कि जब सरकारी एंबुलेंस चालक ने जाने से इन्कार कर दिया तो उन्हें एक निजी एंबुलेंस चालक का नंबर उपलब्ध कराया गया। प्राइवेट एंबुलेंस ने 22 किलोमीटर दूर कंसाला जाने के 1000 रुपये मांगे। पीड़ित ने रोष जताया कि जब प्राइवेट एंबुलेंस जा सकती है तो सरकारी एंबुलेंस क्यों नहीं? निजी एंबुलेंस चालक दिलबाग ने बताया कि मरीज के साथ एंबुलेंस को कोई नहीं रोकता। हां, वापसी में परेशानी जरूर उठानी पड़ती है।