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Rohtak News: देश सेवा के लिए कॉलेज की पढ़ाई छोड़ सेना से जुड़े थे जयपाल
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11सीटीके04 सूबेदार जयपाल नांदल, सेवानिवृत आर्मी। संवाद
रोहतक। देश सेवा व फौज में शामिल होने के लिए कॉलेज की पढ़ाई भी छोड़ दी थी। वर्ष 1999 में ऑपरेशन विजय में हिस्सा लिया। विजय कारगिल युद्ध में सेनाओं के लिए पुल निर्माण में सहयोग दिया और खुद को राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया। मुझे खुशी है कि वर्तमान में छोटा भाई और भतीजा भी सेना में तैनात हैं।
यह कहना है नांदल निवासी पूर्व सूबेदार जयपाल नांदल का। संवाद न्यूज एजेंसी ने पूर्व सूबेदार से बातचीत की तो उनका देश के प्रति लगाव सामने आया। लाखनमाजरा खंड के नांदल गांव निवासी जयपाल नांदल वर्ष 1989 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे। इस दौरान जयपाल नांदल गोहाना के कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे। फौज में जाने का सपना था।
जयपाल ने बताया कि दोस्तों के साथ दिल्ली जाकर भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया। जॉइन करने के बाद फौज के सपने को पूरा करने के लिए कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी थी। उन्होंने बताया कि वर्ष-1999 के कारगिल युद्ध को मैंने करीब से देखा था। इस दौरान हमने भारतीय सेना के लिए पुल निर्माण कार्य में अपना योगदान दिया था। देश सेवा के लिए 30 साल सेना में रहे। सेवानिवृत्ति के बाद करीब 13 साल से परिवार के साथ रोहतक की जसबीर कॉलोनी में रहे हैं।
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छोटा भाई और भतीजा भी सेना में तैनात
62 वर्षीय जयपाल नांदल ने बताया कि हम तीन भाई हैं। इनमें से एक भाई गांव में खेती करता है। वहीं, दूसरा भाई सुरेंद्र नांदल आर्मी में सूबेदार और भतीजा हिमांशु आर्मी में सिपाही के पद है। उन्होंने कहा कि परिवार खेती और सेना के प्रति काफी समर्पित है। पिता भी खेती-बाड़ी करते थे। उन्होंने बताया कि परिवार में दो बेटी, एक बेटा, पुत्रवधू व पत्नी है।
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यह कहना है नांदल निवासी पूर्व सूबेदार जयपाल नांदल का। संवाद न्यूज एजेंसी ने पूर्व सूबेदार से बातचीत की तो उनका देश के प्रति लगाव सामने आया। लाखनमाजरा खंड के नांदल गांव निवासी जयपाल नांदल वर्ष 1989 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे। इस दौरान जयपाल नांदल गोहाना के कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे। फौज में जाने का सपना था।
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जयपाल ने बताया कि दोस्तों के साथ दिल्ली जाकर भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया। जॉइन करने के बाद फौज के सपने को पूरा करने के लिए कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी थी। उन्होंने बताया कि वर्ष-1999 के कारगिल युद्ध को मैंने करीब से देखा था। इस दौरान हमने भारतीय सेना के लिए पुल निर्माण कार्य में अपना योगदान दिया था। देश सेवा के लिए 30 साल सेना में रहे। सेवानिवृत्ति के बाद करीब 13 साल से परिवार के साथ रोहतक की जसबीर कॉलोनी में रहे हैं।
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छोटा भाई और भतीजा भी सेना में तैनात
62 वर्षीय जयपाल नांदल ने बताया कि हम तीन भाई हैं। इनमें से एक भाई गांव में खेती करता है। वहीं, दूसरा भाई सुरेंद्र नांदल आर्मी में सूबेदार और भतीजा हिमांशु आर्मी में सिपाही के पद है। उन्होंने कहा कि परिवार खेती और सेना के प्रति काफी समर्पित है। पिता भी खेती-बाड़ी करते थे। उन्होंने बताया कि परिवार में दो बेटी, एक बेटा, पुत्रवधू व पत्नी है।

11सीटीके04 सूबेदार जयपाल नांदल, सेवानिवृत आर्मी। संवाद