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Rohtak News: रूसी भाषा की किताबों की जगह हाथ में थमा दिए आर्मी के हथियार
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22...रूसी आर्मी में झांसा देकर भर्ती कराए रोहतक के तैमूरपुर गांव निवासी संदीप के विषय पर जानकार
रोहतक। रूस में करीब 14 माह पहले रूसी भाषा की पढ़ाई करने गए रोहतक के तैमूरपुर निवासी 29 वर्षीय संदीप को किताबों की जगह हाथ में आर्मी के हथियार थमा दिए हैं। संदीप के मामा श्रीभगवान ने बताया कि संदीप को विदेश भेजने के लिए करीब छह लाख रुपये का बंदोबस्त किया गया। ब्याज पर पैसे भी लिए। कुछ जेवर भी बेचने पड़े।
श्रीभगवान ने बताया कि संदीप की पढ़ाई में रुचि के चलते परिजनों ने उनको रूस भेजा था। वह विदेश में जाकर अच्छा पैसा कमाना चाहता था। एक अक्तूबर को उनसे अंतिम बार बातचीत हुई थी। बातचीत में पता चला कि एजेंट ने ढाई लाख रुपये मासिक वेतन का झांसा देकर एक सितंबर को रूस की सेना में भर्ती करा दिया।
20 सितंबर को ट्रेनिंग पूरी हुई। वहां से 25 सितंबर को बंकर में ले जाया गया। पांच दिन तक लगातार बातचीत हुई। तब वह घबराया हुआ था।उन्होंने रूस में युद्ध क्षेत्र के हालात बताए तो परिजनों को चिंता सताने लगी। संदीप से उसके बाद से संपर्क नहीं हुआ पाया है। परिवार के सदस्य व रिश्तेदारों समेत सब चिंतित हैं।
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2024 में स्टडी वीजा पर गया था रूस
श्रीभगवान ने बताया कि उनका भांजा संदीप 23 सितंबर 2024 को स्टडी वीजा पर रूस गया था। पढ़ाई के साथ साथ उन्होंने अपने खर्च के लिए काम भी करना शुरू किया। दस महीने के बाद उनको अंबाला का एक एजेंट मिला। परिजनों ने अब तीन नवंबर को जंतर-मंतर पर धरना भी दिया और विदेश मंत्रालय में भी गए लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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श्रीभगवान ने बताया कि संदीप की पढ़ाई में रुचि के चलते परिजनों ने उनको रूस भेजा था। वह विदेश में जाकर अच्छा पैसा कमाना चाहता था। एक अक्तूबर को उनसे अंतिम बार बातचीत हुई थी। बातचीत में पता चला कि एजेंट ने ढाई लाख रुपये मासिक वेतन का झांसा देकर एक सितंबर को रूस की सेना में भर्ती करा दिया।
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20 सितंबर को ट्रेनिंग पूरी हुई। वहां से 25 सितंबर को बंकर में ले जाया गया। पांच दिन तक लगातार बातचीत हुई। तब वह घबराया हुआ था।उन्होंने रूस में युद्ध क्षेत्र के हालात बताए तो परिजनों को चिंता सताने लगी। संदीप से उसके बाद से संपर्क नहीं हुआ पाया है। परिवार के सदस्य व रिश्तेदारों समेत सब चिंतित हैं।
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2024 में स्टडी वीजा पर गया था रूस
श्रीभगवान ने बताया कि उनका भांजा संदीप 23 सितंबर 2024 को स्टडी वीजा पर रूस गया था। पढ़ाई के साथ साथ उन्होंने अपने खर्च के लिए काम भी करना शुरू किया। दस महीने के बाद उनको अंबाला का एक एजेंट मिला। परिजनों ने अब तीन नवंबर को जंतर-मंतर पर धरना भी दिया और विदेश मंत्रालय में भी गए लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।