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Rohtak News: नवाचार और प्रौद्योगिकी से शिक्षा और शोध के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया

Fri, 28 Apr 2023 01:59 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 28 Apr 2023 01:59 AM IST
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Innovation and technology have established new dimensions
रोहतक। भारत वैश्विक फार्मास्युटिकल क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भारत को वैश्विक फार्मास्युटिकल बाजार में अग्रणी देश बनाने के लिए फार्मेसी शिक्षा और शोध में नवाचार और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने की जरूरत है। यह कहना है महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह का।
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वह फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग की ओर से इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफार्मिंग फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में अध्यक्षीय संबोधन में बोल रहे थे।
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कुलपति ने इंटर डिसीप्लीनरी रिसर्च पर बल दिए जाने का पक्ष लेते हुए कहा कि नवाचार और प्रौद्योगिकी से शिक्षा और शोध के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया है। विद्यार्थियों को मानव कल्याण के लिए शोध करने व नवीनतम ज्ञान के नए आयाम स्थापित करने के लिए भी प्रेरित किया।
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इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर रेवाड़ी के कुलपति प्रो. जेपी यादव ने समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने शिक्षा और शोध में नवाचार और प्रौद्योगिकी के उपयोग को महत्वपूर्ण बताया। सम्मेलन के आयोजन के लिए एमडीयू के फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग को सराहा।
फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग के अध्यक्ष प्रो. हरीश दूरेजा ने समापन सत्र में स्वागत भाषण दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में आयोजित गतिविधियों का सार प्रस्तुत किया। आभार प्रदर्शन डाॅ. प्रभाकर वर्मा ने किया। यहां कुलपति के सलाहकार प्रो. एके राजन, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. सुरेंद्र कुमार, कुलसचिव प्रो. गुलशन तनेजा, डॉ. रोहित दत्त, वाइस प्रेसिडेंट नॉर्थ-जोन एपीटीआई और मनदीप मान, ड्रग कंट्रोलर ने बतौर विशिष्ट अतिथि शिरकत की।
सम्मेलन के दूसरे दिन डॉ. विनोद अरोड़ा, पूर्व उपाध्यक्ष, रेनबैक्सी लेब्रटोरी, के बहुत ही संवादात्मक सत्र के साथ शुरू हुआ। डॉ. अरोड़ा ने फार्मास्युटिकल जगत में हाल के अभिनव दृष्टिकोणों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने फार्मास्युटिकल रिसर्च में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स की उभरती भूमिका पर प्रकाश डाला।
दूसरे तकनीकी सत्र में सेज विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर प्रो. नीरज उपमन्यु ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के महत्व और शिक्षाविदों और उद्योग में इसकी भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने आगे कहा कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। आकर्षक शोधकर्ताओं को जोड़ती है। प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देती है। संभावित औद्योगिक भागीदारों को प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

प्रो. हरीश दुरेजा, फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग के अध्यक्ष एवं आईपीआर अध्ययन केंद्र के निदेशक, ने डिजिटल थेराप्यूटिक्स की नियामक रणनीतियों के वर्तमान पहलू पर अपनी बात रखी। उन्होंने हेल्थकेयर, फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस उद्योगों के क्षेत्र में नवीन तकनीकों के रूप में डिजिटल दवाओं, डिजिटल स्वास्थ्य और डिजिटल चिकित्सीय के महत्व पर प्रकाश डाला। दोपहर बाद के सत्रों में फार्मेसी विभाग, टैगोर सभागार और स्वराज सदन में विद्वानों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए ।
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