Independence Day 2023: रोहतक के कलक्टर को क्रांतिकारियों ने दो बार भगाया, खजाने पर कब्जा किया
सैनिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध रोहतक के जवान बड़ी संख्या में अंग्रेजी फौज में थे। 1857 में उन्होंने छुट्टी पर घर आकर गांव वालों के दिलों में आजादी की मशाल जलाई।
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बंगाल सिविल सर्विस के जॉन एडम लोच 1857 में रोहतक के कलक्टर थे। अपने ही विद्रोही सैनिकों की बगावत की खबर लगने के बाद उन्होंने जिले में छुट्टी पर आए सभी सिपाहियों को मुख्यालय लौटने के आदेश दिए। उस समय सैनिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध रोहतक के जवान बड़ी संख्या में अंग्रेजी फौज में थे। यहां के रांगड़ और जाट समुदाय के लोग ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की नियमित बटालियनों में भर्ती थे, लेकिन वे अपने ब्रिटिश अफसरों से असंतुष्ट थे। उन्होंने छुट्टी पर घर आकर गांव वालों के दिलों में आजादी की मशाल जलाई।
हरियाणा लाइट इंफैन्ट्री और चौथा रिसाला सैन्य टुकड़ियों ने रोहतक के विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
विद्रोही सिपाहियों की एकता तोड़ने के लिए कलक्टर लोच ने झज्जर नवाब को कुछ सेना रोहतक भेजने के लिए कहा, पर झज्जर नवाब ने कोई ध्यान नहीं दिया। दूसरी बार मांग करने पर 18 मई 1857 को दो तोपों और कुछ घुड़सवारों के साथ एक सैन्य टुकड़ी भेज दी। वहां जाकर वे भी आजादी के मतवालों के साथ मिल गए। 23 मई 1857 को बादशाह बहादुरशाह के दूत तफज्जल हुसैन के साथ स्वतंत्रता सेनानियों ने रोहतक पर जोरदार हमला कर दिया। कलक्टर एडम लोच हारने के बाद थानेदार भूरे खान और तहसीलदार बख्तावर सिंह के साथ गोहाना भाग गया।
इमारतों को जला दिया
विद्रोहियों ने फौज के कार्यालय, न्यायालय और अंग्रेज अधिकारियों के बंगले जलाने सहित सरकारी रिकॉर्ड नष्ट कर दिए। रोहतक कोष के कुछ हिस्से को अपने कब्जे में लेकर दिल्ली लौटते समय तफज्जल हुसैन ने सांपला में भी जहां अंग्रेज रहते थे, वहां इमारतों को जला दिया। महम, मदीना और मांडोठी के कस्टम बंगले लूटकर जला दिए।
विद्रोह में रांगड़, राजपूत, जाट, बुनकर, शिल्पकार सभी कूद पड़े। हरियाणा लाइट इंफैन्ट्री और चौथा रिसाला सैन्य टुकड़ियों ने रोहतक के विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। थॉमस सीटन के नेतृत्व में 60वीं स्वदेशी पैदल सैन्य टुकड़ी के साथ कलक्टर एडम लोच लौटे और जिला न्यायालय में अपनी छावनी बनाई, लेकिन आत्मविश्वास से भरे ग्रामीणों ने 31 मई को फिर विद्रोह कर दिया। कचहरी जला दी और कलक्टर का खजाना लूट लिया। लोच को फिर भागना पड़ा। 10 जून दोपहर को कलेक्टर लोच जान बचाने के लिए पैदल ही सांपला की ओर भागा। वहां से घोड़े से बहादुरगढ़ होते हुए दिल्ली भाग गया।
ब्रिटिश सरकार का व्यवहार
24 मई की प्रात: मुझे विवश होकर पानीपत जाना पड़ा क्योंकि वहां बड़ी संख्या में विद्रोहियों ने दो तोपों के साथ हमला बोला था। मैं 28 मई तक पानीपत रहा जब तक सर एच बर्नार्ड ने 60वीं रेजीमेंट के साथ वापस रोहतक जाने के आदेश मुझे दिए। इस रेजीमेंट के सिपाहियों ने भी मेरे हुक्म को मानने से इन्कार कर दिया। रोहतक लौटकर मैंने देखा कि कचहरी, रिकॉर्ड ऑफिस, खजाना, सिविल कोर्ट सब बर्बाद है। दिल्ली का बादशाह हिंदुस्तान का बादशाह घोषित हो चुका है और सदर अमीन को इस जिले का सूबेदार घोषित कर दिया गया है। मैंने सुना है कि अलीपुर और सिरसा खाली कर दिए गए हैं। हम सब यहां बड़े संकट में हैं और हर घड़ी दिल्ली की खबरें सुनने को आतुर हैं। - 6 जून 1857 को उत्तर पश्चमी प्रांत के सेक्रेटरी थार्न हिल को जेडी लाक ने लिखा पत्र - संदर्भ : राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली
आग लगने से विस्फोट हुआ
रोहतक के बागी ब्रिटिश फौजों पर गोलियों से जोरदार हमला कर रहे हैं, लेकिन हमने अपना बचाव किया और कोई खास नुकसान नहीं हुआ। दिनांक 8 अगस्त 1857 को ब्रिगेडियर जनरल निकलसन भारी फौज के साथ पहुंच गए हैं और बागियों पर हमला कर दिया है। शहर में एक बहुत बड़ी बारूद फैक्टरी थी, जिसमें आग लगने से विस्फोट हुआ। इसमें लगभग 500 बागी हताहत हुए। फिर भी बागी बड़े जोरों से मुकाबला कर रहे हैं। इसमें ब्रिटिश सैनिक भी हताहत हुए हैं। महाराजा जींद से संदेश प्राप्त हुआ है कि वह जल्दी ही रोहतक में ब्रिटिश सहायता के लिए सेना भेज रहे हैं। मेजर वाच हाउस एचएम 24वीं पैदल सेना और कैप्टन पटोनस घुड़सवार सेना के साथ आज प्रात: मियामीर पहुंच गए हैं। -12 अगस्त 1857 को चीफ कमिश्नर ऑफिस लाहौर के नाम लेफ्टिनेंट मिलिट्री सेक्रेटरी चीफ कमिश्नर जेडी मैक्फरसन ने लिखा पत्र - संदर्भ : राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली