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Rohtak News: इको-फ्रेंडली गणेश लक्ष्मी की मूर्तियां की बढ़ी मांग
Sat, 26 Oct 2024 02:13 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sat, 26 Oct 2024 02:13 AM IST
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सुपवा चौक स्थित एक दुकान पर भगवान गणेश की प्रतिमा तैयार करते कारीगर। संवाद
रोहतक। दीपावली के त्योहार पर लोगों में उत्साह बढ़ रहा है और लोग खरीदारी में लगे हुए हैं। इस बार इको-फ्रेंडली लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की मांग बाजार में पिछले साल के मुकाबले दोगुनी हुई है। पूजा करने के लिए लोग मिट्टी से बने गणेश लक्ष्मी गणेश की मूर्ति घर ले जा रहे है।
राजस्थान के अर्जुन 18 साल से मूर्तियां बनाने का काम कर रहे है। ये अपने परिवार के साथ गणेश उत्सव के समय रोहतक में आते है और दीपावली के बाद ही वापस राजस्थान लौटते है। एक ही परिवार के 17 लोग इको-फ्रेंडली मूर्तियां बनाने का काम करते हैं। यह मूर्तियां स्पेशल डिमांड पर तैयार करवाई जाती हैं। पिछले वर्ष एक हजार मूर्तियों की बिक्री हुई थी। इस बार व्यापार लगभग दोगुना हो जाएगा। यह मूर्तियों सुखपुरा चौक पर तैयार की जाती है। बाजार में इस साल चाइनीज वस्तुओं की मांग कम हुई है। लोग देश की मिट्टी से बनी चीजों को इस बार बढावा दे रहे है। मूर्तिकार ने बताया जैसे ही दीपावली मे दो से तीन दिन बच जाते है। इको-फ्रेंडली मूर्तियों की मांग बढ़ जाती है। बाजार में हर कीमत की मूर्तियां मिल रही हैं। यह 50 रुपये से शुरू हो जाती है। उसके बाद पांच हजार से छह हजार तक की मिलती है। इनकी कीमत इनके आकार और सजावट पर निर्भर करती है।
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राजस्थान के अर्जुन 18 साल से मूर्तियां बनाने का काम कर रहे है। ये अपने परिवार के साथ गणेश उत्सव के समय रोहतक में आते है और दीपावली के बाद ही वापस राजस्थान लौटते है। एक ही परिवार के 17 लोग इको-फ्रेंडली मूर्तियां बनाने का काम करते हैं। यह मूर्तियां स्पेशल डिमांड पर तैयार करवाई जाती हैं। पिछले वर्ष एक हजार मूर्तियों की बिक्री हुई थी। इस बार व्यापार लगभग दोगुना हो जाएगा। यह मूर्तियों सुखपुरा चौक पर तैयार की जाती है। बाजार में इस साल चाइनीज वस्तुओं की मांग कम हुई है। लोग देश की मिट्टी से बनी चीजों को इस बार बढावा दे रहे है। मूर्तिकार ने बताया जैसे ही दीपावली मे दो से तीन दिन बच जाते है। इको-फ्रेंडली मूर्तियों की मांग बढ़ जाती है। बाजार में हर कीमत की मूर्तियां मिल रही हैं। यह 50 रुपये से शुरू हो जाती है। उसके बाद पांच हजार से छह हजार तक की मिलती है। इनकी कीमत इनके आकार और सजावट पर निर्भर करती है।
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