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अलीगढ़ में तो फर्जी शादी का झांसा देकर बच गए, लखनऊ में ट्रेन से उतरते ही पकड़े गए

Tue, 04 Aug 2020 12:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2020 12:42 AM IST
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In Aligarh, he escaped by pretending to be a fake wedding, caught in Lucknow by getting off the train.
उन्नाव जेल में अंदर कार सेवकों के साथ पुराने बजरंग दल कार्यकर्ता पवन सहगल चदर ओढ़े हुए। - फोटो : RohtakCity
करीब 28 साल पहले रोहतक से 100 से ज्यादा कार सेवक अयोध्या में राममंदिर के निर्माण के लिए रवाना हुए थे। अलीगढ़ में तो फर्जी शादी में शामिल होने की बात कहकर बच गए, लेकिन लखनऊ में पुलिस ने ट्रेन से उतरते ही पकड़ लिया। 21 दिन उन्नाव जेल में रखने के बाद उनको छोड़ा गया।
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गांधी कैंप के प्रधान विजय परुथी, जगदीश दुआ, पवन सहगल, सुरेंद्र धींगड़ा, कमल टंडन, लाजपत टांगरा आदि कार सेवकों का कहना है कि राम मंदिर बनने से उनको हर्ष हो रहा है। अगर अब भी अयोध्या जाकर मंदिर निर्माण के लिए कार सेवा का मौका मिला तो वे जरूर करना चाहेंगे।
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बजरंग दल में शामिल रहे पवन सहगल व गांधी कैंप प्रधान विजय परुथी ने बताया कि विहिप व दूसरे हिंदू संगठनों ने 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में जाकर राममंदिर के लिए कार सेवा का आह्वान किया था। वे अपने साथियों के साथ रोहतक से दिल्ली पहुंचे, जहां से लखनऊ के लिए रात 10 बजे रवाना हुई ट्रेन में सवार हो गए। जब ट्रेन अलीगढ़ पहुंची तो पुलिस यात्रियों से पूछताछ कर रही थी। कौन कहां और क्यों जा रहा है। उन्होंने कहा कि लखनऊ में उनका परिवार रहता है, जहां दो दिन बाद शादी है। वे शादी में शामिल होने जा रहे हैं। वहां तो पुलिस ने पूछताछ कर जाने दिया, लेकिन सुबह जब ट्रेन लखनऊ पहुंची तो स्टेशन पर सैकड़ों लोगों को एकत्रित किया गया था, जो अयोध्या कार सेवा के लिए जा रहे थे। सभी को पांच बसों में बैठाकर उन्नाव जेल में ले जाया गया। जेल में करीब 300 कार सेवकों को सामान्य बंदियों से अलग रखा गया। कार सेवकों में हरियाणा के अलावा राजस्थान व गुजरात के लोग भी शामिल थे।
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जब जगदीश दुआ को छुपाना पड़ा बैगों के नीचे
पवन सहगल ने बताया कि जेल के अंदर बाहर से लोग खाना व फल भेजने लगे। जेल प्रशासन फल कार सेवकों को न देकर बंदियों को देने लगा। इस बात को लेकर झगड़ा हो गया। माहौल बिगड़ने पर जेल के अंदर कई बंदियों ने जगदीश दुआ से रंजिश रखना शुरू कर दिया। दो दिन तक जगदीश को बंदियों से बचाकर रखा गया। यहां तक एक दिन तो बैगों के नीचे छुपा दिया। हालांकि बाद में मामला शांत हो गया।
जेल से छूटकर किए रामलला के दर्शन
जगदीश दुआ ने बताया कि 21 दिन बाद उनको उन्नाव जेल से छोड़ा गया। उनको बसों से वापस लखनऊ लाया गया। वहां से वे अयोध्या गए और रामलला के जन्म स्थान के दर्शन किए। इसके बाद ट्रेन से वापस रोहतक पहुंचे। अब भी अयोध्या जाकर भगवान राम के मंदिर निर्माण में कार सेवा करने का मौका मिला तो जरूर जाएंगे।

जेल में हुई दोस्ती आज भी कायम
पवन सहगल ने बताया कि जेल में उनकी एक सिख युवक से दोस्ती हुई, जो लखनऊ का ही रहने वाला था। आज भी उसके परिवार में आना जाता है। कई बार फोन पर बात हो जाती है।
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