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Rohtak News: रिठाल के खेतों को जल्द नहरी पानी नहीं मिला तो किसान आगामी रणनीति करेंगे तैयार
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रिठाल से निकलने वाली माइनर में नहीं जा रहा पानी। संवाद
रोहतक। रिठाल गांव के खेतों में दिल्ली एनसीआर से कटड़ा के लिए बनने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग की वजह से नहरी पानी नहीं मिल रहा है। इससे नाराज किसानों को वीरवार उपायुक्त से मिलना था, लेकिन वह किसी कारणवश नहीं मिल पाए। किसानों का कहना है कि एक हफ्ते तक कोई समाधान नहीं किया जाता है तो वह आगामी रणनीति तैयार करने पर मजबूर होंगे। क्योंकि नहरी पानी न मिलने से किसान ज्यादा परेशान हैं।
किसान कुलबीर व कृष्ण ने बताया कि जेएलएन के निकट स्थित गांव रिठाल के खेतों से यह राष्ट्रीय राजमार्ग निकल रहा है। निर्माण कार्य जोरों पर है लेकिन सिंचाई विभाग की ओर से स्थापित जिस मोगे से यहां के खेतों को पानी मिल रहा था, वह अवरुद्ध है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलिया नंबर 30971 है। इसके नीचे से जेएलएन के मोगा नंबर 230 से करीब पांच सौ एकड़ कृषि भूमि को पानी मिलता रहा है। यह मोगा जसिया माइनर से जोड़ा गया है। सिंचाई जल संकट के चलते कुछ स्थानीय किसानों ने जेएलएन के साथ ट्यूबवेल लगाए हैं। जिनकी पाइप लाइन राष्ट्रीय राजमार्ग को पार करते हुए खेतों तक पहुंचाई गई है। मजबूरी में लगाए गए यह ट्यूबवेल किसानों को काफी महंगे पड़े हैं। जिन खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है वहां की फसल हर सीजन में चौपट हो रही है। सिंचाई विभाग संबंधित किसानों को उगाही का बिल भेज रहा है। किसान जुर्माने से बचने के लिए यह बिल अदा करने पर विवश हैं।
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किसान कुलबीर व कृष्ण ने बताया कि जेएलएन के निकट स्थित गांव रिठाल के खेतों से यह राष्ट्रीय राजमार्ग निकल रहा है। निर्माण कार्य जोरों पर है लेकिन सिंचाई विभाग की ओर से स्थापित जिस मोगे से यहां के खेतों को पानी मिल रहा था, वह अवरुद्ध है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलिया नंबर 30971 है। इसके नीचे से जेएलएन के मोगा नंबर 230 से करीब पांच सौ एकड़ कृषि भूमि को पानी मिलता रहा है। यह मोगा जसिया माइनर से जोड़ा गया है। सिंचाई जल संकट के चलते कुछ स्थानीय किसानों ने जेएलएन के साथ ट्यूबवेल लगाए हैं। जिनकी पाइप लाइन राष्ट्रीय राजमार्ग को पार करते हुए खेतों तक पहुंचाई गई है। मजबूरी में लगाए गए यह ट्यूबवेल किसानों को काफी महंगे पड़े हैं। जिन खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है वहां की फसल हर सीजन में चौपट हो रही है। सिंचाई विभाग संबंधित किसानों को उगाही का बिल भेज रहा है। किसान जुर्माने से बचने के लिए यह बिल अदा करने पर विवश हैं।
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