{"_id":"6406a6d1ec59b7474403ef46","slug":"holika-dahan-today-fog-of-gaiety-tomorrow-rohtak-news-c-17-1-87159-2023-03-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: होलिका दहन आज, उल्लास का फाग कल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: होलिका दहन आज, उल्लास का फाग कल
विज्ञापन
रोहतक । उत्साह, उमंग व रंगों भरी होली का पावन त्योहार मंगलवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। महिलाएं सुबह से ही होली का व्रत रखते हुए होलिका पूजन करेंगी और एक-दूसरे को रंग लगाकर होली का पर्व मनाएंगी। साथ ही सायंकाल होलिका दहन करते हुए व्रत को पूरा करेंगी। लेकिन पंड़ितों के अनुसार होली पूजन सोमवार सांय 8 बजे किया जाएगा, जबकि शहरवासी मंगलवार को होली पर्व मनाएंगे।
होली का पर्व जहां लोगों के लिए खुशियां व आनंद लेकर आता है, वहीं यह पर्व महिलाओं के लिए काफी खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की रक्षा के लिए व्रत रखती है और सुबह नहा धोकर प्रभु का सिमरण करती हैं। इसके बाद पूजन सामग्री के साथ महिलाएं एकत्रित होकर होली पूजा के लिए जाती हैं। होली के गीत गाते हुए महिलाएं होली पूजन करते हुए एक-दूसरे को होली की बधाई देती हैं। साथ ही होली के रंग लगाकर छोटे अपने बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं। होली के दिन सायंकाल पूरे विधि विधान के साथ होलिका दहन किया जाता है, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ एकत्रित होती है। माना जाता है कि होलिका दहन के दौरान उसमें कच्चे चने, सूखा गोला सहित अन्य चीजें भुनकर उन्हें खाने से बीमारियां ठीक हो जाती है। वहीं, होलिका दहन के साथ ही उसके बीच से एक लकड़ी को प्रहलाद मानकर निकाला जाता है। इसके साथ ही महिलाओं का व्रत भी पूर्ण होताहै, जबकि कुछ महिलाएं चंद्र पूजन के साथ अपना व्रत पूरा करती हैं।
होली पर्व की प्राचीन कथा
होली की कथा अनुसार भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद का जन्म राक्षसराज हिरणयकश्यप के घर होता है। बचपन से ही विष्णु की भक्ति करने के कारण राक्षसराज उसे मारने का भरपूर प्रयास करते है, लेकिन हर बार विफल हो जाते हैं। ऐसे में राक्षसराज की बहन होलिका कहती है कि वह प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर चिता पर बैठ जाएगी, क्योंकि उसे वरदान मिला हुआ है कि अग्रि उसे जला नहीं सकती। अपनी बहन की बात मानकर राक्षसराज ऐसा ही करता है। जैसे ही होलिका भक्त प्रहलाद को लेकर चिता पर बैठती है और चिता में आग लगाई जाती है, उसी समय भक्त प्रहलाद भगवान विष्णु का सिमरण करने लगते हैं। भगवान की माया से भक्त प्रहलाद को कुछ नहीं होता, जबकि होलिका उस चिता में जलकर राख हो जाती है। इसलिए इस पर्व को धर्म की अधर्म पर विजय के रूप में भी मनाया जाता है।
विज्ञापन
होली के अगले दिन खेला जाएगा फाग का
होली का पर्व दो दिन तक चलता है, जिसमें पहले दिन होली का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं दूसरे दिन फाग खेलने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जिसमें देवर-भाभी आपस में होली का पर्व खेलते हैं। देवर जहां रंग लगाता है तो भाभी उसे कोरड़े से पीटती है। फाग खेलने के बाद देवर अपनी भाभी को मिठाई भी उपहार स्वरूप देता है। कुछ स्थानों पर तो होली के दिन ढोल- ताशे बजवाए जाते है और डीजे लगाकर गानों के ऊपर नाचते हुए रंगों का यह पर्व मनाया जाता है।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
होलिका दहन शुभ मुहूर्त में करना चाहिए। पंडित मनोज मिश्रा के अनुसार होलिका दहन छह मार्च को रात 8 बजे किया जाएगा। जबकि शहरवासी सात मार्च को व्रत करेंगे और सायंकाल होलिका दहन कार्यक्रम किया जाएगा। मंगलवार को शाम 6 बजकर 12 मिनट से रात 8 बजकर 39 मिनट तक होलिका दहन का समय रहेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार गुरु और शनि खुद की राशि में व शुक्र उच्च स्थिति में है। इतना ही नहीं, केदार, हंस, मालव्य, चतुष्चक्र और महाभाग्य नाम जैसे बड़े योग भी बन रहा हैं, जो काफी सालों बाद आया है।
ये है पूजन विधि
होलिका दहन से पहले होली पूजन का विशेष विधान है। इस दिन सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद होलिका पूजन वाले स्थान पर जाए और पूर्व या उत्तर दिशा में मुंह करके बैठ जाएं। इसके बाद पूजन में गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं बनाए। साथ ही रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, हल्दी, मूंग, मीठे बताशे, गुलाल, रंग, सात प्रकार के अनाज, गेंहू की बालियां, होली पर बनने वाले पकवान, एक लोटा जल व मिष्ठान के साथ होलिका पूजन किया जाता है। इसके साथ ही भगवान नरसिंह की पूजा भी करनी चाहिए। होलिका पूजा के बाद होली की परिक्रमा करनी चाहिए और होली में जौ या गेहूं की बाली, चना, मूंग, चावल, नारियल, गन्ना, बताशे आदि चीजें डालनी चाहिए।
विज्ञापन
होली का पर्व जहां लोगों के लिए खुशियां व आनंद लेकर आता है, वहीं यह पर्व महिलाओं के लिए काफी खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की रक्षा के लिए व्रत रखती है और सुबह नहा धोकर प्रभु का सिमरण करती हैं। इसके बाद पूजन सामग्री के साथ महिलाएं एकत्रित होकर होली पूजा के लिए जाती हैं। होली के गीत गाते हुए महिलाएं होली पूजन करते हुए एक-दूसरे को होली की बधाई देती हैं। साथ ही होली के रंग लगाकर छोटे अपने बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं। होली के दिन सायंकाल पूरे विधि विधान के साथ होलिका दहन किया जाता है, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ एकत्रित होती है। माना जाता है कि होलिका दहन के दौरान उसमें कच्चे चने, सूखा गोला सहित अन्य चीजें भुनकर उन्हें खाने से बीमारियां ठीक हो जाती है। वहीं, होलिका दहन के साथ ही उसके बीच से एक लकड़ी को प्रहलाद मानकर निकाला जाता है। इसके साथ ही महिलाओं का व्रत भी पूर्ण होताहै, जबकि कुछ महिलाएं चंद्र पूजन के साथ अपना व्रत पूरा करती हैं।
विज्ञापन
होली पर्व की प्राचीन कथा
होली की कथा अनुसार भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद का जन्म राक्षसराज हिरणयकश्यप के घर होता है। बचपन से ही विष्णु की भक्ति करने के कारण राक्षसराज उसे मारने का भरपूर प्रयास करते है, लेकिन हर बार विफल हो जाते हैं। ऐसे में राक्षसराज की बहन होलिका कहती है कि वह प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर चिता पर बैठ जाएगी, क्योंकि उसे वरदान मिला हुआ है कि अग्रि उसे जला नहीं सकती। अपनी बहन की बात मानकर राक्षसराज ऐसा ही करता है। जैसे ही होलिका भक्त प्रहलाद को लेकर चिता पर बैठती है और चिता में आग लगाई जाती है, उसी समय भक्त प्रहलाद भगवान विष्णु का सिमरण करने लगते हैं। भगवान की माया से भक्त प्रहलाद को कुछ नहीं होता, जबकि होलिका उस चिता में जलकर राख हो जाती है। इसलिए इस पर्व को धर्म की अधर्म पर विजय के रूप में भी मनाया जाता है।
विज्ञापन
होली के अगले दिन खेला जाएगा फाग का
होली का पर्व दो दिन तक चलता है, जिसमें पहले दिन होली का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं दूसरे दिन फाग खेलने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जिसमें देवर-भाभी आपस में होली का पर्व खेलते हैं। देवर जहां रंग लगाता है तो भाभी उसे कोरड़े से पीटती है। फाग खेलने के बाद देवर अपनी भाभी को मिठाई भी उपहार स्वरूप देता है। कुछ स्थानों पर तो होली के दिन ढोल- ताशे बजवाए जाते है और डीजे लगाकर गानों के ऊपर नाचते हुए रंगों का यह पर्व मनाया जाता है।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
होलिका दहन शुभ मुहूर्त में करना चाहिए। पंडित मनोज मिश्रा के अनुसार होलिका दहन छह मार्च को रात 8 बजे किया जाएगा। जबकि शहरवासी सात मार्च को व्रत करेंगे और सायंकाल होलिका दहन कार्यक्रम किया जाएगा। मंगलवार को शाम 6 बजकर 12 मिनट से रात 8 बजकर 39 मिनट तक होलिका दहन का समय रहेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार गुरु और शनि खुद की राशि में व शुक्र उच्च स्थिति में है। इतना ही नहीं, केदार, हंस, मालव्य, चतुष्चक्र और महाभाग्य नाम जैसे बड़े योग भी बन रहा हैं, जो काफी सालों बाद आया है।
ये है पूजन विधि
होलिका दहन से पहले होली पूजन का विशेष विधान है। इस दिन सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद होलिका पूजन वाले स्थान पर जाए और पूर्व या उत्तर दिशा में मुंह करके बैठ जाएं। इसके बाद पूजन में गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं बनाए। साथ ही रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, हल्दी, मूंग, मीठे बताशे, गुलाल, रंग, सात प्रकार के अनाज, गेंहू की बालियां, होली पर बनने वाले पकवान, एक लोटा जल व मिष्ठान के साथ होलिका पूजन किया जाता है। इसके साथ ही भगवान नरसिंह की पूजा भी करनी चाहिए। होलिका पूजा के बाद होली की परिक्रमा करनी चाहिए और होली में जौ या गेहूं की बाली, चना, मूंग, चावल, नारियल, गन्ना, बताशे आदि चीजें डालनी चाहिए।