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सीएए का मिला लाभ: पाकिस्तान में बेटियां सुरक्षित नहीं थीं, हिन्दुस्तान में पहले सुरक्षा मिली और अब नागरिकता

Wed, 03 Jul 2024 10:26 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 03 Jul 2024 10:26 PM IST
सार

रोहतक के मदीना में रह रहे पाकिस्तान से आए हिंदू परिवार को सीएए के तहत नागरिकता मिल गई है। 2005 में 45 दिन के वीजा पर समझौता एक्सप्रेस से पाकिस्तान के पंजाब से हिंदू परिवार आया था। मदीना गांव में पूर्व विधायक ने शरण दी थी। परिवार खेतीबाड़ी कर अपना गुजर बसर करता है।

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Hindu family who came from Pakistan and settled in Rohtak got citizenship under CAA
चंडीगढ़ कार्यालय में नागरिकता का प्रमाण पत्र देते डायरेक्टर ललित जैन। - फोटो : संवाद

विस्तार

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से 19 साल पहले रोहतक आकर बसे हिंदू परिवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत बुधवार को नागरिकता मिल गई। परिवार के तीन सदस्यों ने चंडीगढ़ जाकर भारत की नागरिकता हासिल की। नागरिकता मिलने पर परिवार के मुखिया हंसराज ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, पाकिस्तान में उनकी बेटियां सुरक्षित नहीं थीं।
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इसलिए वे 19 साल पहले हिन्दुस्तान आ गए थे। यहां आकर न सिर्फ उनके परिवार को सुरक्षा मिली, बल्कि बेटे और बेटियों के रिश्ते भी हो गए। अब नागकिता मिलने के बाद वे भी पूरी तरह हिन्दुस्तानी हो गए हैं।
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हंसराज ने बताया उनके पिता फूल सिंह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लायलपुर जिले में रहते थे। 2005 में पूरा परिवार 45 दिन के टूरिस्ट वीजा पर समझौता एक्सप्रेस से भारत आया था। यहां आकर उनका परिवार वापस नहीं लौटा। रोहतक के मदीना गांव में पूर्व विधायक आनंद सिंह दांगी ने उन्हें शरण दी और अपने खेत में काम दिया।
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जान बचाने के लिए छोड़ आए तीन किले जमीन
हंसराज बताते हैं पाकिस्तान में उनके पास तीन किले जमीन थी, लेकिन वहां उनकी जान सुरक्षित नहीं थी। इसलिए वे जमीन छोड़कर परिवार सहित भारत आ गए। बताया कि पिता फूल सिंह के अलावा उस समय परिवार में 12 सदस्य थे। लश्कर दास, हंसदास, सुगरा व मां मारो देवी ने 2017 में भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया। उस समय यह शर्त थी कि पाकिस्तान से परिवार 11 साल पहले भारत आया हो। चार दिसंबर 2019 को जिला प्रशासन ने चारों को नागरिकता दे दी।

पिता और मां की हो चुकी मौत
हंसराज के पिता फूल सिंह और मां पठानो देवी की मौत हो चुकी है। बहन और भतीजी की शादी हांसी व सिरसा में हो चुकी है। हंसराज ने खुद करनाल में शादी की है। परिवार के तीन सदस्य भाई तारिक लाल, बहन बंतो देवी व भतीजे राजेश कुमार को अब सीएए के तहत भारत की नागरिकता मिली है।

 
पाकिस्तान के स्कूल में नहीं लिखा जाता था हिंदू नाम
हंसराज बताते हैं वह और उसका भाई लक्ष्मण पाकिस्तान में स्कूल गए तो वहां हिंदू नाम नहीं लिखा गया। उसका नाम हंसदास व उसके भाई का नाम लश्कर दास लिख गया। इतना ही नहीं, कक्षा में जहां वे बैठते थे, उधर की हवा भी आती तो शिक्षक साइड में बैठा देते थे। वहां बहन-बेटियां तक सुरक्षित नहीं थीं। 10 साल की लड़की तक का अपहरण हो जाता था। हंसराज बताते हैं अब तो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बहुत कम हिंदू बचे हैं।
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