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कोविड-19 में भी असरकारक है हेपेटाइटिस की दवा
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हेपेटाइटिस की दवा कोविड-19 संक्रमण के इलाज में भी असरकारक है। पिछले करीब डेढ़ साल में पीजीआई में आए तीन हजार हेपेटाइटिस मरीजों में से 10 को छोड़ सभी कोविड-19 संक्रमण से सुरक्षित रहे। संक्रमित हुए 10 मरीज भी इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ हो गए। पीजीआई की ओर से हेपेटाइटिस मरीजों पर किया गया शोध यही बयां कर रहा है। इस शोध में महामारी से लड़ाई को और आसान बनाने की राह दिखाई है। यही वजह है कि इस दिशा में शोध अभी भी जारी है। संस्थान के दो वरिष्ठ चिकित्सक इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए गहन अध्ययन कर रहे हैं।
दरअसल, मार्च 2020 में कोरोना संक्रमण ने देश में पांव पसारने शुरू किए। इसके चलते लॉकडाउन भी लगाना पड़ा। इस स्थिति में काला पीलिया के मरीजों का इलाज बीच में छूटने का डर बन गया। इस स्थिति से मरीजों के इलाज के लिए सरकार ने विशेष व्यवस्था की। इसके तहत मरीजों को एक बार में तीन महीने की दवा जारी की गई। यही नहीं, दवा मरीज के घर पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इसके लिए दवा कोरियर करने के साथ आशा वर्कर के जरिये मरीज तक पहुंचाई गई। इससे मरीज हेपेटाइटिस की दवा लगातार लेता रहा। इन मरीजों की स्थिति पर पीजीआई के गेस्ट्रोएंट्रोलाजिस्ट विभाग ने लगातार नजर रखी। पिछले डेढ़ साल में तीन हजार मरीजों को फॉलोअप किया गया। इस दौरान इनमें से 10 मरीजों को छोड़कर सभी कोविड-19 से सुरक्षित मिले। इसकी वजह दवा का असर बताया गया है। हेपेटाइटिस यानी काला पीलिया के इलाज की दवा इम्यून सिस्टम को मजबूत बना रही है। यही कोरोना का इलाज है। संक्रमित हुए हेपेटाइटिस के 10 मरीज भी दवा लेने के बाद स्वास्थ्य हो गए। इनमें से पांच हेपेटाइटिस बी व पांच हेपेटाइटिस सी के मरीज शामिल हैं। इन्हें महामारी की गंभीर स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा।
पीजीआई में अभी जारी है दवा पर शोध
कोविड काल में हेपेटाइटिस मरीजों पर नजर आए दवा के असर ने चौंकाने वाले तथ्य दिए हैं। इस कारण पीजीआई में इस पर अब भी शोध जारी है। मेडिसिन विभाग के दो वरिष्ठ चिकित्सक दवा से सुरक्षा को लेकर गहन अध्ययन कर रहे हैं। इस अध्ययन की शुरुआत में संक्रमित मरीजों को सात दिन तक हेपेटाइटिस की दवा दी गई। इसके बाद मरीज निगेटिव पाया गया। अब दवा की और बारीकी से जांच की जा रही है। यह शोध सफल रहा तो संभवत: हम महामारी का सटीक इलाज तलाशने में सफल होंगे।
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मॉडर्न ट्रीटमेंट सेंटर में है 5500 केस
पीजीआई में काला पीलिया के इलाज के लिए मॉडर्न ट्रीटमेंट सेंटर बनाया गया है। यह प्रदेेश का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां गेस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट विभाग के तहत चल रहे इस सेंटर में वर्तमान में हेपेटाइटिस के 5500 केस हैं। हेपेटाइटिस सी का 84 दिन का इलाज है। इसके बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है। हेपेटाइटिस बी के मरीजों को जीवन भर समय-समय पर अपनी जांच कराना जरूरी है। इन मरीजों के लिए पीजीआई में रोजाना ओपीडी खुली रहती है। यहां मरीज की जांच व दवा सब फ्री है।
हेपेटाइटिस के मरीजों का इलाज बगैर रुके लगातार जारी है। कोरोना काल में भी मरीजों को दवा समय पर मुहैया कराई गई। उन्हें घर तक दवा पहुंचाने की व्यवस्था की गई। यही नहीं, पिछले डेढ़ साल में हेपेटाइटिस के मरीजों पर कोरोना संक्रमण का असर नहीं देखा गया है। हेपेटाइटिस का इलाज ले रहे 10 मरीज संक्रमित हुए थे। वे भी इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ हैं।
-डॉ. प्रवीण मल्होत्रा, एचओडी गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग, पीजीआईएमएस
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दरअसल, मार्च 2020 में कोरोना संक्रमण ने देश में पांव पसारने शुरू किए। इसके चलते लॉकडाउन भी लगाना पड़ा। इस स्थिति में काला पीलिया के मरीजों का इलाज बीच में छूटने का डर बन गया। इस स्थिति से मरीजों के इलाज के लिए सरकार ने विशेष व्यवस्था की। इसके तहत मरीजों को एक बार में तीन महीने की दवा जारी की गई। यही नहीं, दवा मरीज के घर पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इसके लिए दवा कोरियर करने के साथ आशा वर्कर के जरिये मरीज तक पहुंचाई गई। इससे मरीज हेपेटाइटिस की दवा लगातार लेता रहा। इन मरीजों की स्थिति पर पीजीआई के गेस्ट्रोएंट्रोलाजिस्ट विभाग ने लगातार नजर रखी। पिछले डेढ़ साल में तीन हजार मरीजों को फॉलोअप किया गया। इस दौरान इनमें से 10 मरीजों को छोड़कर सभी कोविड-19 से सुरक्षित मिले। इसकी वजह दवा का असर बताया गया है। हेपेटाइटिस यानी काला पीलिया के इलाज की दवा इम्यून सिस्टम को मजबूत बना रही है। यही कोरोना का इलाज है। संक्रमित हुए हेपेटाइटिस के 10 मरीज भी दवा लेने के बाद स्वास्थ्य हो गए। इनमें से पांच हेपेटाइटिस बी व पांच हेपेटाइटिस सी के मरीज शामिल हैं। इन्हें महामारी की गंभीर स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा।
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पीजीआई में अभी जारी है दवा पर शोध
कोविड काल में हेपेटाइटिस मरीजों पर नजर आए दवा के असर ने चौंकाने वाले तथ्य दिए हैं। इस कारण पीजीआई में इस पर अब भी शोध जारी है। मेडिसिन विभाग के दो वरिष्ठ चिकित्सक दवा से सुरक्षा को लेकर गहन अध्ययन कर रहे हैं। इस अध्ययन की शुरुआत में संक्रमित मरीजों को सात दिन तक हेपेटाइटिस की दवा दी गई। इसके बाद मरीज निगेटिव पाया गया। अब दवा की और बारीकी से जांच की जा रही है। यह शोध सफल रहा तो संभवत: हम महामारी का सटीक इलाज तलाशने में सफल होंगे।
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मॉडर्न ट्रीटमेंट सेंटर में है 5500 केस
पीजीआई में काला पीलिया के इलाज के लिए मॉडर्न ट्रीटमेंट सेंटर बनाया गया है। यह प्रदेेश का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां गेस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट विभाग के तहत चल रहे इस सेंटर में वर्तमान में हेपेटाइटिस के 5500 केस हैं। हेपेटाइटिस सी का 84 दिन का इलाज है। इसके बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है। हेपेटाइटिस बी के मरीजों को जीवन भर समय-समय पर अपनी जांच कराना जरूरी है। इन मरीजों के लिए पीजीआई में रोजाना ओपीडी खुली रहती है। यहां मरीज की जांच व दवा सब फ्री है।
हेपेटाइटिस के मरीजों का इलाज बगैर रुके लगातार जारी है। कोरोना काल में भी मरीजों को दवा समय पर मुहैया कराई गई। उन्हें घर तक दवा पहुंचाने की व्यवस्था की गई। यही नहीं, पिछले डेढ़ साल में हेपेटाइटिस के मरीजों पर कोरोना संक्रमण का असर नहीं देखा गया है। हेपेटाइटिस का इलाज ले रहे 10 मरीज संक्रमित हुए थे। वे भी इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ हैं।
-डॉ. प्रवीण मल्होत्रा, एचओडी गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग, पीजीआईएमएस