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एक हजार में से 24 नवजात नहीं जी पाते एक सप्ताह

Wed, 05 Oct 2016 02:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Wed, 05 Oct 2016 02:07 AM IST
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health department, medical, new born baby, death, servy, rohtak
एक हजार में से 36 बच्चे नहीं मना पाते हैं पहला जन्मदिन
 प्रदेश में जन्म लेने वाले एक हजार नवजात में से 24 शिशु एक सप्ताह भी जीवित नहीं रह पाते। एक हजार में से 36 बच्चे पहला जन्मदिन नहीं मना पाते। इसकी मुख्य वजह घर में कराई जाने वाली डिलीवरी और जच्चा-बच्चा को रखे जाने वाले स्थान की साफ-सफाई नहीं होना है। इस पर नियंत्रण पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों से चिकित्सा संस्थानों में ही डिलीवरी कराने के लिए जागरूक करता है।
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इन आंकड़ों का खुलासा किया है स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप ने। वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि समय के अनुसार यह आंकड़ा काफी सख्ती के बाद आया है। पहले एक साल में एक हजार में से नवजात बच्चों के मरने वालों की संख्या 42 थी। यही वजह थी पहले बच्चे के जन्म के बाद छठी मनाई जाती थी। सातवें दिन बच्चे को परिवार का सदस्य माना जाता था। पहले छह दिन बच्चे के बचने की संभावना कम होती थी। लेकिन अब व्यवस्थाओं के चलते इन आंकड़ों में कमी आई है। पहले राख में डिलीवरी कराना, घर में डिलीवरी, जच्चा-बच्चा को अलग रखना, बगैर हाथ धोए बच्चे को छूना आदि कई समस्याएं थी।
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रोहतक में आज भी दो फीसदी डिलीवरी होती है घर में

डिप्टी सिविल सर्जन के अनुसार विभाग की सख्ती के बावजूद रोहतक जिले में अब भी दो फीसदी डिलीवरी घराें में होती है। जबकि देश में डिलीवरी के दौरान एक लाख जच्चा में से 127 की मौत हो जाती है। अकेले रोहतक जिले में एक लाख में से 70 महिलाओं की डिलीवरी के दौरान मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में हर साल छह लाख 10 हजार महिलाएं गर्भवती होती हैं, जिससे पांच लाख 40 हजार बच्चे प्रति वर्ष पैदा होते हैं। इनमें से 11 फीसदी बच्चे घर पर पैदा होते हैं। 10 साल पहले जच्चा की डिलीवरी के दौरान मौत का आंकड़ा 20 फीसदी था। अब स्वास्थ्य विभाग की सख्ती और जागरूकता की वजह से इसमें कमी आई है। स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष रोहतक के पाड़ा मोहल्ला में घर में डिलीवरी करा रही दाई को पुलिस के हवाले किया था।
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