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Haryana: प्राचार्य डॉ. सुकामा व डॉ. बख्शी ने राष्ट्रपति से ग्रहण किया पद्मश्री सम्मान, ये है समाज में योगदान

Thu, 06 Apr 2023 01:24 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक/करनाल (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक/करनाल (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Thu, 06 Apr 2023 01:24 AM IST
सार

गुरुकुल रुड़की की प्राचार्य डॉ. सुकामा को आर्य समाज की शिक्षा को फैलान में अद्वितीय योगदान के लिए सम्मान मिला है। वहीं करनाल में रहकर डॉ. बख्शी ने देश को सीओ-0238 गन्ना प्रजाति दी थी।

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Haryana residents Dr Sukama and Dr Bakshi Ram receive Padma Shri from the President Draupadi Murmu
प्राचार्य डॉ. सुकामा व डॉ. बख्शी ने राष्ट्रपति से ग्रहण किया पद्मश्री सम्मान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रोहतक के रुड़की गांव के विश्ववारा कन्या गुरुकुल की प्राचार्य डॉ. सुकामा आचार्य करनाल स्थित गन्ना प्रजनन संस्थान के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के पूर्व अध्यक्ष और गन्ना उत्पादन में देश को अग्रणी बनाने वाले डॉ. बख्शी राम को बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री सम्मान से नवाजा। 

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झज्जर के गांव आकपुर में पैदा हुई डॉ. सुकामा को महिला सशक्तीकरण और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया है। उन्होंने अपना जीवन आर्य समाज की शिक्षा को फैलाने के लिए समर्पित किया है। 
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कौन हैं डॉ. सुकामा
विश्ववारा कन्या गुरुकुल रुड़की की प्राचार्य डॉ. सुकामा का जन्म झज्जर के गांव आकपुर में एक अक्तूबर 1961 को हुआ था। इनकी माता का नाम वेदकौर और पिता का नाम राजेंद्र देव सिंह है।
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यह है शिक्षा
डॉ. सुकामा की शैक्षणिक उपलब्धी सूची काफी लंबी है। इसमें शास्त्री से लेकर पीएचडी तक की पढ़ाई शामिल है। श्रीमद दयानंदार्थ विद्यापीठ झज्जर से वर्ष 1978 में शास्त्री, 1980 में व्याकरणाचार्य, 1982 में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार से संस्कृत में स्नातकोत्तर, 1984 में श्रीमद दयानंदार्थ विद्यापीठ, झज्जर से वोदाचार्य, 1987 में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार से वैदिक इंद्र देवता महर्षि दयानंद के वेदभाष्य के परिप्रेक्ष्य में पीएचडी करने के अलावा वर्ष 1999 में कुसुमलता आर्य प्रतिष्ठान, साहिबाबाद का प्रकाशन किया।

व्यक्तित्व
डॉ. सुकामा प्राचीन गुरुकुल परंपरा में उच्च शिक्षा प्राप्त करके ब्रह्मचर्य दीक्षा ली और गुरुकुल पद्धति से कन्याओं को शिक्षित और संस्कारवार बना रही हैं। कर्मशील, परोपकारी एवं कर्तव्यपरायण जीवन, आपकी सादगी, सहनशीलता, विनम्रता, उदारता, समर्पण, उत्तम शिक्षण, कला का गुण इन्हें उच्च व्यक्तित्व के रूप में प्रतिष्ठित करते हैं। भारतीय संस्कृति के प्रचार, गुरुकुल पद्धति की प्राचीन परंपरा के प्रसार, नारी उत्थान व यज्ञीय जीवन के आदर्श को निर्वहन करने का पवित्र संकल्प धारण किया है।

Haryana residents Dr Sukama and Dr Bakshi Ram receive Padma Shri from the President Draupadi Murmu
प्राचार्य डॉ. सुकामा व डॉ. बख्शी राम। - फोटो : अमर उजाला

गुरुकुल संचालन
वर्ष 1988 में डॉ. सुकामा ने उत्तर प्रदेश के अमरोहा जनपद में आचार्य डॉ. सुमेधा के साथ श्रीमद दयानंद कन्या गुरुकुल महाविद्यालय चोटीपुरा की स्थापना की। वर्ष 2017 (30 वर्ष) तक इसकी संचालन किया। वर्ष 2018 में रोहतक के रुड़की में विश्ववारा कन्या गुरुकुल का शुभारंभ किया। इन्हें कई सम्मान और पुरस्कार मिल चुके हैं।

करनाल में रहकर डॉ. बख्शी ने देश को दी थी सीओ-0238 गन्ना प्रजाति
हरियाणा और पंजाब में करीब 60 से 70 प्रतिशत सहित उत्तर भारत में औसतन करीब 52 प्रतिशत से अधिक किसानों तक पहुंची सीओ-0238 गन्ना प्रजाति के लिए डॉ. बख्शी राम को जाना जाता है। उनके ही नेतृत्व वाली वैज्ञानिकों की टीम ने गन्ना प्रजनन संस्थान के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र करनाल में इस प्रजाति को 2009 में जारी किया था। उन्हें पद्मश्री मिलने से करनाल केंद्र के वैज्ञानिकों में खुशी की लहर है।

गन्ना प्रजनन संस्थान के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र करनाल के अध्यक्ष डॉ. एसके पांडेय ने बताया था कि डॉ. बख्शी राम ने करनाल अनुसंधान केंद्र में करीब 24 सालों तक कार्य किया है। वह बतौर वैज्ञानिक यहां आए थे, फिर वरिष्ठ वैज्ञानिक बने और फिर प्रधान वैज्ञानिक।

इसके बाद वह अनुसंधान केंद्र के अध्यक्ष बने। उनकी अगुवाई वाली टीम ने गन्ने की कई प्रजातियां देश को दी। जिन्होंने गन्ना उत्पादन क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव लाकर गन्ना उत्पादन बढ़ाया। सीओ-0238 इन सभी प्रजातियों में ऐसी प्रजाति है, जो उत्तर भारत में अधिकांश किसानों तक पहुंची।

गन्ना उत्पादक क्षेत्र में औसतन 52 प्रतिशत में अकेले इसी प्रजाति का एकाधिकार हो गया। हरियाणा और पंजाब में तो ये प्रजाति 60 से 70 प्रतिशत किसानों की पहली पसंद बनी है। डॉ. बख्शी राम ने 2014 तक करनाल क्षेत्रीय गन्ना अनुसंधान केंद्र में बतौर अध्यक्ष कार्य किया।

इसके बाद वह गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर चले गए। वहां से वह कोयंबटूर गन्ना प्रजनन संस्थान के निदेशक बने। डॉ. बख्शी को पद्मश्री मिलने की खबर से करनाल केंद्र में खुशी की लहर है, उनके साथ कार्य कर चुके वैज्ञानिकों को भी गर्व की अनुभूति हो रही है। 

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