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Rohtak News: गेट नंबर 6 पर तीन घंटे जड़ा ताला, आईडी कार्ड दिखाने पर प्रवेश की मिली अनुुमति
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24सीटीके12..पीजीआई से श्रीनगर का गेट बंद होने पर पीजीआई गार्ड से बात करते निवासी। संवाद
रोहतक। कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर की हत्या के बाद से अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रेजिडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर हैं। शुक्रवार रात डीन ऑफिस के पास अज्ञात वाहन चालक के आने और धमकी देने के बाद वह कैंपस क्लोज करने की मांग पर अड़ गए हैं। इस मुद्दे को लेकर शनिवार को आपातकालीन विभाग में सेवाएं नहीं दीं। दोपहर 12 से तीन बजे तक गेट नंबर 6 पर ताला जड़कर रोष जताया। बाद में लोकल आईडी कार्ड दिखाने पर आगंतुकों को आवागमन करने दिया गया।
छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टर्स के विरोध के बीच सहायक प्रोफेसरों ने स्वयं करीब 300 मरीजों की जांच की। वहीं, शुक्रवार रात को हुई घटना को लेकर पीजीआई निदेशक डॉ. एसएस लोहचब और आरडीए (रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन) के जिला प्रधान डॉ. प्रज्वल की बैठक हुई। बैठक में सुरक्षा को लेकर एसोसिएशन की ओर से पीजीआई परिसर में कैमरे लगवाने सहित सुझाव दिए।
शनिवार सुबह करीब 10 बजे रेजिडेंट डॉक्टर और पीजी छात्र एकत्रित हुए। सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नारेबाजी शुरू कर दी। पीजीआई निदेशक और आरडीए की बैठक में परिसर से लगने वाले सभी मार्गाें को बंद करने की मांग पर सहमति न बनने पर करीब 12 बजे श्रीनगर कॉलोनी से लगने वालेे कैंपस के गेट नंबर छह पर ताला जड़ दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कैंपस से जुड़ने वाले सभी मार्गों को बंद करना ही होगा। शाम होते ही यहां से असामाजिक तत्व आते हैं और कई बार डॉक्टरों से दुर्व्यवहार करते है। शुक्रवार रात को हुई घटना इसका प्रमाण है।
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स्टाफकर्मी चार किलोमीटर घूमकर पहुंचे
गेट पर ताला जड़ने के बाद श्रीनगर कॉलोनीवासी और क्वार्टर में रहने वाले पीजीआई स्टाफ की मुसीबत बढ़ गई। रेलवे क्राॅसिंग पार कर अशोका चौक होते हुए करीब 4 किलोमीटर का फेरा लगाकर स्टाफकर्मी सीधे निदेशक कार्यालय पहुंचे और रास्ता खोलने की मांग की।
इन रास्तों से है आपत्ति
पीजीआईएमएस पहुंचने के लिए वैसे तो छोटे बड़े मिलाकर कुल छह रास्ते हैं। लेकिन, डॉक्टरों को दो मार्गों को लेकर ज्यादा चिंतित हैं। एक मेडिकल मोड़ से होते हुए गांधी कैंप और आदर्श नगर को जोड़ने वाला रास्ता और दूसरा कैंपस से लगता श्रीनगर कॉलोनी से लगने वाला गेट नंबर छह है।
इन्होंने बयां की अपनी परेशानी
याद भी नहीं है कि कितने दशक से हम यहां रह रहे हैं और इस रास्ते प्रयोग कर रहे हैं। इस रास्ते को बंद करने का कोई तुक नहीं बनता है। रास्ता बंद करने सिर्फ कॉलोनीवासी परेशान होंगे और कुछ नहीं। इसे तत्काल खोलना ही होगा।
-दिलबाग सिंह, श्रीनगर कॉलोनी
मैं अभी करीब 12:30 बजे दोपहर पीजीआई प्रांगण से होते हुए बाजार गया था। यह रास्ता हमेशा खुला रहता है। लौटा तो गेट पर ताला लगा मिला। छह नंबर गेट का प्रयोग सैकड़ों कॉलोनीवासी करते हैं। इसे बंद नहीं किया जा सकता।
-पुलकित, श्रीनगर कॉलोनी
दो मिनट का रास्ता अब 15 मिनट में होगा तय : पार्षद
वार्ड 19 के पार्षद दीपू नागपाल ने कहा कि यह रास्ता कैंपस का है। संस्थान के 14जे क्वार्टर में रहने वाले कर्मचारियों के लिए मुख्य रास्ता है। इसमें नर्सिंग स्टाफ व संस्थान तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा यहां प्राथमिक पाठशाला व आसपास के इलाके में रहने वाले लोगों का भी आना जाना रहता है। इस संबंध में संस्थान के अधिकारियों से बात की जाएगी। फिलहाल रास्ता बंद होने से लोगों को परेशानी हो रही है। 2 मिनट का रास्ता 10 से 15 मिनट का हो गया है। गेट नंबर छह का ताला लगने से अशोका चौक होते हुए लोगों को पीजीआई जाना पड़ रहा है।
पीजीआईएमएस आज नहीं बना है। इसकी मर्यादा रखना हम डॉक्टरों और इससे जुड़ने वाले विद्यार्थियों की भी जिम्मेदारी है। हम विद्यार्थियों के अभिभावक की तरह हैं। उनकी सुरक्षा हमारी भी चिंता है। फिलहाल आरडीए (रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन) से सकारात्मक चर्चा हुई है। उनकी ज्यादातर मांगों पर सहमति बनी है। सभी के हित में फैसला होगा। गेट नंबर छह से लोकल आईडी कार्ड दिखाने के बाद लोगों को आने-जाने दिया जा रहा है।
-डॉ. एसएस लोहचब, निदेशक, पीजीआईएमएस
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छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टर्स के विरोध के बीच सहायक प्रोफेसरों ने स्वयं करीब 300 मरीजों की जांच की। वहीं, शुक्रवार रात को हुई घटना को लेकर पीजीआई निदेशक डॉ. एसएस लोहचब और आरडीए (रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन) के जिला प्रधान डॉ. प्रज्वल की बैठक हुई। बैठक में सुरक्षा को लेकर एसोसिएशन की ओर से पीजीआई परिसर में कैमरे लगवाने सहित सुझाव दिए।
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शनिवार सुबह करीब 10 बजे रेजिडेंट डॉक्टर और पीजी छात्र एकत्रित हुए। सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नारेबाजी शुरू कर दी। पीजीआई निदेशक और आरडीए की बैठक में परिसर से लगने वाले सभी मार्गाें को बंद करने की मांग पर सहमति न बनने पर करीब 12 बजे श्रीनगर कॉलोनी से लगने वालेे कैंपस के गेट नंबर छह पर ताला जड़ दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कैंपस से जुड़ने वाले सभी मार्गों को बंद करना ही होगा। शाम होते ही यहां से असामाजिक तत्व आते हैं और कई बार डॉक्टरों से दुर्व्यवहार करते है। शुक्रवार रात को हुई घटना इसका प्रमाण है।
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स्टाफकर्मी चार किलोमीटर घूमकर पहुंचे
गेट पर ताला जड़ने के बाद श्रीनगर कॉलोनीवासी और क्वार्टर में रहने वाले पीजीआई स्टाफ की मुसीबत बढ़ गई। रेलवे क्राॅसिंग पार कर अशोका चौक होते हुए करीब 4 किलोमीटर का फेरा लगाकर स्टाफकर्मी सीधे निदेशक कार्यालय पहुंचे और रास्ता खोलने की मांग की।
इन रास्तों से है आपत्ति
पीजीआईएमएस पहुंचने के लिए वैसे तो छोटे बड़े मिलाकर कुल छह रास्ते हैं। लेकिन, डॉक्टरों को दो मार्गों को लेकर ज्यादा चिंतित हैं। एक मेडिकल मोड़ से होते हुए गांधी कैंप और आदर्श नगर को जोड़ने वाला रास्ता और दूसरा कैंपस से लगता श्रीनगर कॉलोनी से लगने वाला गेट नंबर छह है।
इन्होंने बयां की अपनी परेशानी
याद भी नहीं है कि कितने दशक से हम यहां रह रहे हैं और इस रास्ते प्रयोग कर रहे हैं। इस रास्ते को बंद करने का कोई तुक नहीं बनता है। रास्ता बंद करने सिर्फ कॉलोनीवासी परेशान होंगे और कुछ नहीं। इसे तत्काल खोलना ही होगा।
-दिलबाग सिंह, श्रीनगर कॉलोनी
मैं अभी करीब 12:30 बजे दोपहर पीजीआई प्रांगण से होते हुए बाजार गया था। यह रास्ता हमेशा खुला रहता है। लौटा तो गेट पर ताला लगा मिला। छह नंबर गेट का प्रयोग सैकड़ों कॉलोनीवासी करते हैं। इसे बंद नहीं किया जा सकता।
-पुलकित, श्रीनगर कॉलोनी
दो मिनट का रास्ता अब 15 मिनट में होगा तय : पार्षद
वार्ड 19 के पार्षद दीपू नागपाल ने कहा कि यह रास्ता कैंपस का है। संस्थान के 14जे क्वार्टर में रहने वाले कर्मचारियों के लिए मुख्य रास्ता है। इसमें नर्सिंग स्टाफ व संस्थान तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा यहां प्राथमिक पाठशाला व आसपास के इलाके में रहने वाले लोगों का भी आना जाना रहता है। इस संबंध में संस्थान के अधिकारियों से बात की जाएगी। फिलहाल रास्ता बंद होने से लोगों को परेशानी हो रही है। 2 मिनट का रास्ता 10 से 15 मिनट का हो गया है। गेट नंबर छह का ताला लगने से अशोका चौक होते हुए लोगों को पीजीआई जाना पड़ रहा है।
पीजीआईएमएस आज नहीं बना है। इसकी मर्यादा रखना हम डॉक्टरों और इससे जुड़ने वाले विद्यार्थियों की भी जिम्मेदारी है। हम विद्यार्थियों के अभिभावक की तरह हैं। उनकी सुरक्षा हमारी भी चिंता है। फिलहाल आरडीए (रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन) से सकारात्मक चर्चा हुई है। उनकी ज्यादातर मांगों पर सहमति बनी है। सभी के हित में फैसला होगा। गेट नंबर छह से लोकल आईडी कार्ड दिखाने के बाद लोगों को आने-जाने दिया जा रहा है।
-डॉ. एसएस लोहचब, निदेशक, पीजीआईएमएस

24सीटीके12..पीजीआई से श्रीनगर का गेट बंद होने पर पीजीआई गार्ड से बात करते निवासी। संवाद