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Rohtak News: पीजीआई में आईं लेप्रोस्कॉपी की चार मशीनें, मरीजों का इंतजार होगा कम
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रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्नातकोत्तर चिकित्सा विज्ञान (पीजीआईएमएस) में पेट से जुड़ी बीमारियों वाले मरीजों को अब दूरबीन विधि से इलाज के लिए अब लंबा इंतजार नहीं करना होगा। संस्थान ने नई लेप्रोस्कोपी की चार मशीनें मंगाई है। इससे रोजाना औसतन 20 से ज्यादा मरीजों की सर्जरी की जाती है।
अभी तक संस्थान में पहले से मौजूद लेप्रोस्कॉपी मशीन की मदद से ऑपरेशन किए जाते रहे हैं। मशीनें काफी पुरानी हो गई थीं। अक्सर मशीनों में समस्या रहती थी। ऐसे में दूरबीन विधि से इलाज कराने वाले मरीजों को मशीन के सही होने का इंतजार करना पड़ता था। इससे लंगा इंतजार हो जाता था। इसे को देखते हुए संस्थान ने नई मशीनें मंगाई हैं।
दूरबीन विधि से इलाज में बहुत कम चीरा लगाने पर ही इलाज संभव हो जाता है, साथ ही पुरानी मशीन से नई मशीन से अव्वल दर्जे की हैं। मशीन की खास बात यह है कि इसमें हाई डेफिनेशन से भी बेहतर गुणवत्ता का कैमरा लगा हुआ है, जो इलाज के दौरान मॉनिटर पर बिल्कुल साफ नजर आता है। मॉड्यूलर ओटी को दो, गायनी और यूरोलॉजी को एक-एक मशीनें दी गई हैं।
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इस समस्या के सबसे ज्यादा आते हैं मरीज
लेप्रोस्कॉपी से इलाज के लिए सबसे ज्यादा मरीज हर्निया और किडनी स्टोन के आते हैं। इसके बाद सामान्य सर्जरी के मरीज रहते हैं। पेट में होने वाली सर्जरी में ज्यादातर लेप्रोस्कॉपी का ही प्रयोग किया जाता है। लेप्रोस्कॉपी सर्जरी में छोटे से छोटा चीरा लगाकर उसमें पतली रोशनी वाली ट्यूब (लेप्रोस्कोप) डाली जाती है। लेप्रोस्कॉपी में लगे हाई डेफिनिशन से भी बेहतर कैमरे से पेट के अंदर की छवि को देखते हैं। इसमें रिकॉर्ड भी किया जा सकता है। लेप्रोस्कॉपी की मदद से मॉनिटर पर सर्जरी करने वाले अंग को देखकर ऑपरेशन कर सकते हैं। इसमें मरीज को कोई परेशानी नहीं आती है।
लेप्रोस्कॉपी की चार मशीनें मंगाई गई हैं। यह मशीनें अत्याधुनिक हैं। दूरबीन विधि से इलाज कराने वाले मरीजों को इससे फायदा मिलेगा। अब पेट से जुड़ी सर्जरी के मरीजों को और बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।
-डॉ. एसके सिंघल, निदेशक, पीजीआईएमएस।
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अभी तक संस्थान में पहले से मौजूद लेप्रोस्कॉपी मशीन की मदद से ऑपरेशन किए जाते रहे हैं। मशीनें काफी पुरानी हो गई थीं। अक्सर मशीनों में समस्या रहती थी। ऐसे में दूरबीन विधि से इलाज कराने वाले मरीजों को मशीन के सही होने का इंतजार करना पड़ता था। इससे लंगा इंतजार हो जाता था। इसे को देखते हुए संस्थान ने नई मशीनें मंगाई हैं।
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दूरबीन विधि से इलाज में बहुत कम चीरा लगाने पर ही इलाज संभव हो जाता है, साथ ही पुरानी मशीन से नई मशीन से अव्वल दर्जे की हैं। मशीन की खास बात यह है कि इसमें हाई डेफिनेशन से भी बेहतर गुणवत्ता का कैमरा लगा हुआ है, जो इलाज के दौरान मॉनिटर पर बिल्कुल साफ नजर आता है। मॉड्यूलर ओटी को दो, गायनी और यूरोलॉजी को एक-एक मशीनें दी गई हैं।
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इस समस्या के सबसे ज्यादा आते हैं मरीज
लेप्रोस्कॉपी से इलाज के लिए सबसे ज्यादा मरीज हर्निया और किडनी स्टोन के आते हैं। इसके बाद सामान्य सर्जरी के मरीज रहते हैं। पेट में होने वाली सर्जरी में ज्यादातर लेप्रोस्कॉपी का ही प्रयोग किया जाता है। लेप्रोस्कॉपी सर्जरी में छोटे से छोटा चीरा लगाकर उसमें पतली रोशनी वाली ट्यूब (लेप्रोस्कोप) डाली जाती है। लेप्रोस्कॉपी में लगे हाई डेफिनिशन से भी बेहतर कैमरे से पेट के अंदर की छवि को देखते हैं। इसमें रिकॉर्ड भी किया जा सकता है। लेप्रोस्कॉपी की मदद से मॉनिटर पर सर्जरी करने वाले अंग को देखकर ऑपरेशन कर सकते हैं। इसमें मरीज को कोई परेशानी नहीं आती है।
लेप्रोस्कॉपी की चार मशीनें मंगाई गई हैं। यह मशीनें अत्याधुनिक हैं। दूरबीन विधि से इलाज कराने वाले मरीजों को इससे फायदा मिलेगा। अब पेट से जुड़ी सर्जरी के मरीजों को और बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।
-डॉ. एसके सिंघल, निदेशक, पीजीआईएमएस।