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पांच साल बाद समुद्र की तरह मैदानी इलाकों में बना निम्न दाब क्षेत्र, 10 से फिर सक्रिय होगा विक्षोभ
Sat, 07 Mar 2020 03:45 PM IST
रोहतक ब्यूरो
भूपेंद्र आट्टा, रोहतक
भूपेंद्र आट्टा, रोहतक
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 07 Mar 2020 03:45 PM IST
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मार्च के पहले हफ्ते में लगातार तीन दिन हुई बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की फसलों को तबाह कर दिया है। शुक्रवार को दोपहर तीन बजे के करीब अचानक काली घटा छाने के बाद झमाझम बादल बरसे, जिनसे शुक्रवार शाम साढ़े पांच बजे तक रोहतक में 28.7 एमएम बारिश दर्ज की गई, जबकि तीन दिनों में रोहतक में 78.4 एमएम बारिश हुई। हवा की गति 41.6 किलोमीटर प्रति घंटा रही।मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि मार्च में इतनी अधिक बारिश 2015 के बाद अब हुई है।
इस बारिश का मुख्य कारण चक्रवाती परिसंचरण का निमभन दाब क्षेत्र में बदलना है, जो आम तौर पर समुद्री इलाकों में होता है। मैदानी क्षेत्रों में इससे पहले निमभन दबाव का क्षेत्र मार्च 2015 में बना था। तब एक मार्च को रोहतक में 55 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। लाइव वेदर ऑफ इंडिया एनजीओ के सीईओ और मौसम एक्सपर्ट नवदीप दहिया ने बताया कि निमभन दबाव क्षेत्र ने अरब सागर से चक्रवाती परिसंचरण से अधिक नमी खिंची और घने बादल बने।
करीब 150 से 200 किलोमीटर के व्यास में बने लो प्रेशर का केंद्र बिंदु राजस्थान के बीकानेर के पास रहा, जिसके चलते उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बादल फैलते चले गए और लगातार तीन दिन रूक-रूक कर बारिश हुई। कई जगहों पर ओले भी पड़े। बारिश के बाद शुक्रवार शाम से हवा में नमी होने के कारण धुंध छा गई और तापमान गिरकर 13 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से 7 मार्च तक मौसम खराब रहेगा। उसके बाद मौसम साफ हो जाएगा।
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इस बारिश का मुख्य कारण चक्रवाती परिसंचरण का निमभन दाब क्षेत्र में बदलना है, जो आम तौर पर समुद्री इलाकों में होता है। मैदानी क्षेत्रों में इससे पहले निमभन दबाव का क्षेत्र मार्च 2015 में बना था। तब एक मार्च को रोहतक में 55 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। लाइव वेदर ऑफ इंडिया एनजीओ के सीईओ और मौसम एक्सपर्ट नवदीप दहिया ने बताया कि निमभन दबाव क्षेत्र ने अरब सागर से चक्रवाती परिसंचरण से अधिक नमी खिंची और घने बादल बने।
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करीब 150 से 200 किलोमीटर के व्यास में बने लो प्रेशर का केंद्र बिंदु राजस्थान के बीकानेर के पास रहा, जिसके चलते उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बादल फैलते चले गए और लगातार तीन दिन रूक-रूक कर बारिश हुई। कई जगहों पर ओले भी पड़े। बारिश के बाद शुक्रवार शाम से हवा में नमी होने के कारण धुंध छा गई और तापमान गिरकर 13 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से 7 मार्च तक मौसम खराब रहेगा। उसके बाद मौसम साफ हो जाएगा।
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इस कारण होती है बारिश
बारिश होने से पहले चक्रवाती हवा एक व्यास क्षेत्र में घूमती है, जो नमी को खिंचकर बादल बनाती है। इसकी सबसे पहली इकाई चक्रवाती परिसंचरण होती है, उसके बाद निमभन दाब क्षेत्र का नंबर आता है। इसके बाद क्रमानुसार वेल मार्क लॉ प्रेशर, डिप्रेशन, डीप डिप्रेशन, साइक्लोन, सुपर साइक्लोन इत्यादि इकाइयां आती हैं। इसके कारण मौसम में परिवर्तन होता है।
आठ तारीख से घटेगा न्यूनतम तापमान
मौसम एक्सपर्ट के अनुसार 8 मार्च से 10 मार्च तक न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। न्यूनतम तापमान इकाई के अंक में आ सकता है। एक्सपर्ट ने बताया कि 6 मार्च को अधिकतम तापमान 17.8 डिग्री रहा, अगर दिन में धूप न निकलती तो कोल्ड डे रह सकता था। हवा में नमी और बादलों की गर्मी के कारण न्यूनतम तापमान ज्यादा नहीं गिरा। न्यूनतम तापमान 13.4 डिग्री रहा।
10 को फिर फिर सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभ
मौसम विभाग के मुताबिक 10 मार्च को एक बार फिर पश्चिमी विक्षोभ आ रहा है, जो इतना सक्रिय तो नहीं होगा, लेकिन इसके असर से कई जगह तेज बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है।
इस मार्च में हो चुकी 87.4 एमएम बारिश
एक मार्च को जिले में 9.3 एमएम बारिश हुई थी, इसके बाद चार मार्च को आए पश्चिमी विक्षोभ से चार मार्च को 35.3, पांच मार्च को 14.4 और छह मार्च को 28.7 एमएम बारिश दर्ज की गई। इस मार्च के छह दिनों में कुल 87.4 एमएम बारिश हो चुकी है, जो फसलों के लिए काफी नुकसान दायक है। बता दें कि दो साल पहले मार्च में कोई बारिश नहीं हुई थी।
किसानों को ही नहीं, बाजार पर भी पड़ेगा असर
बारिश के कारण जिलेभर में किसानों की फसलें तबाह हुई हैं, जिस कारण किसानों को तो नुकसान हुआ ही है, लेकिन इससे आने वाले समय में बाजार पर भी असर पड़ता दिख रहा है। व्यापारियों ने भी किसान की फसल तबाह होने पर चिंता जाहिर की है। किसान और शहर का व्यापार आपस में जुड़ा हुआ है। किसान के पास पैसा होगा तभी वह बाजार में पहुंचेगा।
आठ तारीख से घटेगा न्यूनतम तापमान
मौसम एक्सपर्ट के अनुसार 8 मार्च से 10 मार्च तक न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। न्यूनतम तापमान इकाई के अंक में आ सकता है। एक्सपर्ट ने बताया कि 6 मार्च को अधिकतम तापमान 17.8 डिग्री रहा, अगर दिन में धूप न निकलती तो कोल्ड डे रह सकता था। हवा में नमी और बादलों की गर्मी के कारण न्यूनतम तापमान ज्यादा नहीं गिरा। न्यूनतम तापमान 13.4 डिग्री रहा।
10 को फिर फिर सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभ
मौसम विभाग के मुताबिक 10 मार्च को एक बार फिर पश्चिमी विक्षोभ आ रहा है, जो इतना सक्रिय तो नहीं होगा, लेकिन इसके असर से कई जगह तेज बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है।
इस मार्च में हो चुकी 87.4 एमएम बारिश
एक मार्च को जिले में 9.3 एमएम बारिश हुई थी, इसके बाद चार मार्च को आए पश्चिमी विक्षोभ से चार मार्च को 35.3, पांच मार्च को 14.4 और छह मार्च को 28.7 एमएम बारिश दर्ज की गई। इस मार्च के छह दिनों में कुल 87.4 एमएम बारिश हो चुकी है, जो फसलों के लिए काफी नुकसान दायक है। बता दें कि दो साल पहले मार्च में कोई बारिश नहीं हुई थी।
किसानों को ही नहीं, बाजार पर भी पड़ेगा असर
बारिश के कारण जिलेभर में किसानों की फसलें तबाह हुई हैं, जिस कारण किसानों को तो नुकसान हुआ ही है, लेकिन इससे आने वाले समय में बाजार पर भी असर पड़ता दिख रहा है। व्यापारियों ने भी किसान की फसल तबाह होने पर चिंता जाहिर की है। किसान और शहर का व्यापार आपस में जुड़ा हुआ है। किसान के पास पैसा होगा तभी वह बाजार में पहुंचेगा।