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पहले कोविड फिर पोस्ट कोविड, अब ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस का अटैक

Fri, 21 May 2021 12:55 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 21 May 2021 12:55 AM IST
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First Kovid then Post Kovid, now Black Fungus and White Fungus Attack
वर्ष 2020 की तुलना में 2021 आम जनता पर अधिक भारी पड़ रहा है। अब तक मरीज कोविड व पोस्ट कोविड की समस्या से जूझ रहा था, लेकिन अब ब्लैक व व्हाइट फंगस भी लोगों के लिए समस्या बन गया है। बेवजह दिए जा रहे एंटीबायोटिक, स्टेरॉयड व अनकंट्रोल शुगर ब्लैक फंगस के साथ व्हाइट फंगस की समस्या को बढ़ा रहा है। पीजीआईएमएस में ब्लैक फंगस के साथ व्हाइट फंगस के मरीज भी उपचाराधीन हैं।
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प्रदेश के प्रमुख कोविड-19 के नोडल अधिकारी एवं पीसीसीएम विभागाध्यक्ष पीजीआईएमएस डॉ. ध्रुव चौधरी ने बताया कि सामान्य रूप से व्हाइट फंगस कोई नई बीमारी नहीं है। लेकिन इस समय यह भी अधिक सामने आ रही है। हमारे आईसीयू में इसके कई मरीज हैं, इसका अभी डाटा एकत्रित नहीं किया गया है। यह एक सामान्य समस्या है। यह समस्या उस समय विकट हो जाती है जब उपचार के अभाव में यह रक्त में मिल जाती है। व्हाइट फंगस मुंह में होता है। यह समस्या उन्हीं मरीजों को होती है, जिनको अधिक एंटीबायोटिक, स्टेरॉयड दिया होता है। इसके साथ ही यह समस्या मुंह की सफाई न रखने वाले, ओरल हाइजिन के प्रति लापरवाह लोगों में व अनकंट्रोल शुगर के मरीज में मिलती है। समस्या है कि कोरोना के चक्कर में कई डॉक्टर बगैर मतलब एंटीबायोटिक व स्टेरॉयड मरीज को दे रहे हैं। इसके लिए एंटी फंगल ड्रग है और यह दवा पीजीआईएमएस में उपलब्ध है। ब्लैक फंगस के एंटी फंगल इंजेक्शन की कुछ डोज हमारे पास ईएनटी विभाग में है। संस्थान ने 580 की और हरियाणा सरकार ने 12 हजार इंजेक्शन की डिमांड सरकार को भेज दी है। डॉ. चौधरी ने बताया कि ब्लैक फंगस के मरीज को तकरीबन एक माह इंजेक्शन देना होता है। यदि बाहर से मरीज इंजेक्शन लाता है तो कम से कम 35 हजार रुपये प्रतिदिन का खर्च आता है। अब समस्या यह हो रही है कि सरकार ने एंटी फंगल इंजेक्शन पर सख्ती कर दी है तो निजी अस्पताल भी मरीजों को पीजीआईएमएस भेजने लगे हैं।
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गांवों तक पहुंच रहा कोरोना, जून के मध्यांतर में मिलेगी राहत
कोरोना संक्रमण को लेकर डॉ. ध्रुव चौधरी ने बताया कि गांवों तक संक्रमण फैल रहा है। कोरोना का डबल म्यूटेशन बी. 1. 617.2 म्यूटेंट है। अभी लॉकडाउन चल रहा है, यदि यह खुलता है तो समस्या फिर बढ़ेगी। फिलहाल चल रहे लॉकडाउन का असर मिड जून में देखने को मिलेगा। समस्या है कि संक्रमण गांवों में पहुंच चुका है, लेकिन ग्रामीण मान नहीं रहे हैं।
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