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देर रात तक डीसी आवास पर डटे जलभराव से परेशान किसान

Fri, 23 Jul 2021 01:45 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 23 Jul 2021 01:45 AM IST
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Farmers upset due to waterlogging at DC residence till late night
डीसी आवास के बाहर बैठे किसान। संवाद
हाल ही में हुई तेज बारिश के कारण कई गांवों के खेतों में पानी भर गया है। काफी फसल बर्बाद हो गई है, बाकी तबाह होने के कगार पर है। करौंथा और डीघल गांवों के किसान वीरवार शाम सात बजे उपायुक्त से मिलने उनके आवास पर पहुंचे। स्टाफ ने बताया कि वह बाहर हैं, सुबह 10 बजे आएंगे। किसानों ने आवास के बाहर ही गद्दे बिछाए और बोले कि सुबह मिलकर ही जाएंगे। इससे पहले सुबह मायना और खेड़ी साध गांवों के किसानों ने भी खेतों में जलभराव को लेकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। खराब हुई फसलों की स्पेशल गिरदावरी करवाकर मुआवजा देने की मांग की।
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गांव डीघल के पूर्व सरपंच मांगे राम और रणबीर सिंह ने बताया कि डीघल और करौंथा गांवों के करीब चार हजार एकड़ खेतों में तीन से चार फुट तक पानी भरा है। केसीबी ड्रेन के ओवरफ्लो होने से यह समस्या आई है। ड्रेन की लंबे समय से डी-सिल्टंग नहीं कराई गई, उसमें पांच फुट तक सिल्ट भरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुलताना गांव वालों ने जेई से मिलकर ड्रेन में मिट्टी डाल कर रास्ता बना लिया है, जिस कारण पानी निकल नहीं पा रहा है। पहले वह उपायुक्त झज्जर से मिले क्योंकि डीघल वहां पड़ता है। पर वहां बताया गया कि कुलताना रोहतक में है तो शाम को यहां उपायुक्त से मिलने पहुंचे। सुबह सबसे पहले कुलताना गए लेकिन वहां के लोगों ने अभद्र व्यवहार किया और जेई झूठे आश्वासन देता रहा। इस मौके पर करौंथा के सुखबीर और देवेंद्र समेत कई किसान थे। किसानों ने सड़क पर ही गद्दे डाल लिए और वहीं रात गुजारने की तैयारी कर ली थी।
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वहीं, गांव खेड़ी साध निवासी जय प्रकाश, दिलावर सिंह, राकेश आर्या, अशोक गहलोत आदि किसानों ने सुबह लघु सचिवालय पहुंच कर उपायुक्त को बताया कि गांव की करीब 500 एकड़ फसल पूरी तरह पानी में डूबी हुई है। सभी जगह चार फुट तक पानी भरा है। खेड़ी के साथ-साथ कारोर रोड पर भी जलभराव है। खेड़ी साध से पहरावर रोड के बीच सारा क्षेत्र पानी से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि खेड़ी साध से नौनंद की दिशा में ड्रेन बनी हुई है। लेकिन उसमें अवरोधक और अतिक्रमण हैं। अगर ड्रेन की सफाई हो जाए तो खेतों में जलभराव की समस्या से निजात मिल सकती है। मायना गांव के पवन राठी, विजेंदर, राकेश आदि किसानों ने कहा कि ज्यादा बारिश के चलते दो-तीन दिनों से लगभग पूरे गांव की फसल पानी में डूब चुकी है। अब फसल के उबरने के आसार भी नहीं दिख रहे हैं। किसानों के 15-20 हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च हो चुके हैं। उन्होंने उपायुक्त से मांग की कि वे तुरंत स्पेशल गिरदावरी के आदेश दें ताकि प्रभावित किसानों को मुआवजा मिल सके।
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किलोई में 50-60 एकड़ प्रभावित
गांव किलोई खास और किलोई दोपाना 50-60 एकड़ फसल पानी में डूबी है। एक किसान सुभाष का खेत सबसे ज्यादा प्रभावित है, उसके खेत में करीब ढाई फुट तक पानी खड़ा है। किलोई दोपाना निवासी राजकुमार ने बताया कि रिठाल और किलोई की सीमा पर ड्रेन बनी है। लेकिन सबसे आखिरी खेत काफी ऊंचा है, इसलिए पानी की निकासी नहीं होती। गांव के किसानों ने इस बार अगेता धान लगाया था ताकि पौधे बड़े हो जाएं और जलभराव की चपेट में न आएं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, पूरी फसल प्रभावित है। हर साल यहां यह समस्या आती है, अब तक कोई स्थायी हल नहीं हो सका है।
कंसाला में 300 एकड़ में जलभराव
गांव कंसाला के पूर्व सरपंच प्रतिनिधि परमजीत सिंह ने बताया कि गांव में करीब 300 एकड़ खेतों में पानी भर गया है। धान और बाजरा की फसलें बिल्कुल खराब हो चुकी हैं। हर बार तेज बारिश के बाद यह समस्या आती है, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
मुंगाण में पंप नहीं
गांव मुंगाण के पूर्व सरपंच सुनील ने बताया कि करीब 100 एकड़ रकबा जलभराव से प्रभावित है। यहां जल निकासी के लिए पाइपें डाली गई हैं, लेकिन पंप नहीं मिल रहा है। वीरवार को अर्जी दी है, कल-परसों तक पंप मिलने की उम्मीद है।

पोलंगी में 15 साल से समस्या
गांव पोलंगी के पूर्व सरपंच संजय ने बताया कि गांव के करीब 250 एकड़ में बारिश का पानी भरा है। 15 साल से यह समस्या है। हर साल किसानों का करीब चार करोड़ रुपये का नुकसान होता है। आसन गांव की तरफ ड्रेन है, एक बार वहां से पानी की निकासी की योजना बनाई गई, लेकिन सिरे नहीं चढ़ी।
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