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Rohtak News: रबी की फसलों के लिए खाद का संकट, भटकते फिर रहे किसान
Sat, 12 Oct 2024 05:25 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sat, 12 Oct 2024 05:25 AM IST
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
सांपला। रबी फसलों की बिजाई का सीजन आ चुका है। खाद की कमी ने जिले के किसानों को चिंता में डाल दिया है। हाल में फसल विजय का समय आ गया है। गेहूं जौ, चना, सरसों आदि फसलों की बिजाई में डीएपी की जरूरत पड़ती है, लेकिन कस्बे व ग्रामीण क्षेत्र में खुली खाद बीज की दुकानों पर किसानों को डीएपी नहीं मिल रहा है। इसके लिए किसानों को खाद बीज की दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
शुक्रवार को कस्बे में खाद लेने आए रविंद्र कुमार जय भगवान ओमप्रकाश नरेश कुमार आदि ने बताया कि वे पिछले कई दिन से इलाके के नजदीकी गांव कस्बे की दुकानों पर खाद मिलने की उम्मीद पर जाते हैं, लेकिन उन्हें डीएपी नहीं मिल पा रहा। वहीं, खाद और कृषि उत्पादों के व्यापारी भी सीजन के बावजूद उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति न कर पाने से निराशा है। दुकानदारों का कहना है कि यही एक अच्छा सीजन होता है। हर वर्ष सीजन में खाद की किल्लत बन जाती है। किसान भी मायूस है।
जिले में 10000 हेक्टेयर में सरसों एक लाख 5000 हेक्टेयर में गेहूं 2000 हेक्टेयर में चना, जौ के अलावा अन्य फसलों की बिजाई की जाती है। हाल में सरसों, जौ, चने की बिजाई का समय है। 1 नवंबर से गेहूं की बिजाई शुरू हो जाएगी। सीजन के टाइम पर कभी डीएपी तो कभी यूरिया खाद के लिए किसानों की मारा-मारी रहती है। अधिकारी भी अभी यह स्पष्ट नहीं बता पा रहे कि किसानों को डीएसपी खाद कब तक मिल जाएगी।
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सांपला। रबी फसलों की बिजाई का सीजन आ चुका है। खाद की कमी ने जिले के किसानों को चिंता में डाल दिया है। हाल में फसल विजय का समय आ गया है। गेहूं जौ, चना, सरसों आदि फसलों की बिजाई में डीएपी की जरूरत पड़ती है, लेकिन कस्बे व ग्रामीण क्षेत्र में खुली खाद बीज की दुकानों पर किसानों को डीएपी नहीं मिल रहा है। इसके लिए किसानों को खाद बीज की दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
शुक्रवार को कस्बे में खाद लेने आए रविंद्र कुमार जय भगवान ओमप्रकाश नरेश कुमार आदि ने बताया कि वे पिछले कई दिन से इलाके के नजदीकी गांव कस्बे की दुकानों पर खाद मिलने की उम्मीद पर जाते हैं, लेकिन उन्हें डीएपी नहीं मिल पा रहा। वहीं, खाद और कृषि उत्पादों के व्यापारी भी सीजन के बावजूद उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति न कर पाने से निराशा है। दुकानदारों का कहना है कि यही एक अच्छा सीजन होता है। हर वर्ष सीजन में खाद की किल्लत बन जाती है। किसान भी मायूस है।
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जिले में 10000 हेक्टेयर में सरसों एक लाख 5000 हेक्टेयर में गेहूं 2000 हेक्टेयर में चना, जौ के अलावा अन्य फसलों की बिजाई की जाती है। हाल में सरसों, जौ, चने की बिजाई का समय है। 1 नवंबर से गेहूं की बिजाई शुरू हो जाएगी। सीजन के टाइम पर कभी डीएपी तो कभी यूरिया खाद के लिए किसानों की मारा-मारी रहती है। अधिकारी भी अभी यह स्पष्ट नहीं बता पा रहे कि किसानों को डीएसपी खाद कब तक मिल जाएगी।
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