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किसानों ने लघु सचिवालय के बाहर 50 पैसे प्रति किलो गेहूं बेच किया प्रदर्शन
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किलोई मंडी में गेहूं की लिफ्टिंग बंद होने के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (अंबावता) ने शनिवार को लघु सचिवालय पर गेहूं बेचकर प्रदर्शन किया। संगठन के दो नेताओं ने भूख हड़ताल भी शुरू की। शाम चार बजे प्रशासन ने गाड़ी भेजकर लोडिंग शुरू करवाई, तब अनशन समाप्त किया गया।
किलोई मंडी में खरीद सीजन के दौरान करीब दस हजार क्विंटल गेहूं नहीं बिक सका था, जिसे लेकर किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। सरकारी खरीद खत्म होने के बाद जिला प्रशासन पोर्टल खुलवा नहीं सकता था। इसलिए समस्या का समाधान करने के मकसद से प्रशासन ने एक प्राइवेट मिलर से खरीद करवा दी। गेहूं के रेट और बाकी चीजों को लेकर दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया, लेकिन करीब सात हजार क्विंटल गेहूं तो मिल पहुंच गया, उसके बाद मिलर ने कहा कि अभी गाड़ी नहीं है। किसानों ने ट्रॉलियों से गेहूं पहुंचाने की पेशकश की, लेकिन बात नहीं बनी। जिसके बाद किसान ट्रॉली में गेहूं लेकर लघु सचिवालय के बाहर पहुंचे और ढेरी लगाकर गेहूं बेचने लगे। यूनियन के प्रदेश प्रधान अनिल नांदल और जिला प्रधान रणधीर काला भूख हड़ताल पर बैठ गए। किसानों ने सरकार पर बेकद्री का आरोप लगाते हुए 50 पैसे प्रति किलो के हिसाब से गेहूं बेचा।
ढाई सौ किलो गेहूं बिका, एक कट्टा बुजुर्ग महिला को दान दिया
नांदल ने बताया कि करीब ढाई सौ किलो गेहूं बिका और एक कट्टा बुजुर्ग महिला को दान दिया गया। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक उनका गेहूं नहीं बिकता, वे लघु सचिवालय पर ऐसे ही गेहूं बेचकर प्रदर्शन करेंगे। नांदल ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन गेहूं की खरीद करवाना तो दूर, उनके फोन तक नहीं उठा रहा है। इसलिए उन्हें आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ा है। शाम करीब चार बजे डीएसपी हेडक्वार्टर गोरखपाल ने किसानों को बताया कि गेहूं की लोडिंग शुरू हो गई है तो आंदोलन खत्म हुआ। इस मौके पर सुमित, प्रवीण, दीपक, ईश्वर, संदीप, बबला, रामकिशन, बिजेंदर, देवेंद्र, बबली, प्रवेश व राहुल भी मौजूद थे।
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किलोई मंडी में खरीद सीजन के दौरान करीब दस हजार क्विंटल गेहूं नहीं बिक सका था, जिसे लेकर किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। सरकारी खरीद खत्म होने के बाद जिला प्रशासन पोर्टल खुलवा नहीं सकता था। इसलिए समस्या का समाधान करने के मकसद से प्रशासन ने एक प्राइवेट मिलर से खरीद करवा दी। गेहूं के रेट और बाकी चीजों को लेकर दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया, लेकिन करीब सात हजार क्विंटल गेहूं तो मिल पहुंच गया, उसके बाद मिलर ने कहा कि अभी गाड़ी नहीं है। किसानों ने ट्रॉलियों से गेहूं पहुंचाने की पेशकश की, लेकिन बात नहीं बनी। जिसके बाद किसान ट्रॉली में गेहूं लेकर लघु सचिवालय के बाहर पहुंचे और ढेरी लगाकर गेहूं बेचने लगे। यूनियन के प्रदेश प्रधान अनिल नांदल और जिला प्रधान रणधीर काला भूख हड़ताल पर बैठ गए। किसानों ने सरकार पर बेकद्री का आरोप लगाते हुए 50 पैसे प्रति किलो के हिसाब से गेहूं बेचा।
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ढाई सौ किलो गेहूं बिका, एक कट्टा बुजुर्ग महिला को दान दिया
नांदल ने बताया कि करीब ढाई सौ किलो गेहूं बिका और एक कट्टा बुजुर्ग महिला को दान दिया गया। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक उनका गेहूं नहीं बिकता, वे लघु सचिवालय पर ऐसे ही गेहूं बेचकर प्रदर्शन करेंगे। नांदल ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन गेहूं की खरीद करवाना तो दूर, उनके फोन तक नहीं उठा रहा है। इसलिए उन्हें आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ा है। शाम करीब चार बजे डीएसपी हेडक्वार्टर गोरखपाल ने किसानों को बताया कि गेहूं की लोडिंग शुरू हो गई है तो आंदोलन खत्म हुआ। इस मौके पर सुमित, प्रवीण, दीपक, ईश्वर, संदीप, बबला, रामकिशन, बिजेंदर, देवेंद्र, बबली, प्रवेश व राहुल भी मौजूद थे।
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