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सरकार की बेरूखी के विरोध में किसानों ने मनाया काला दिवस

Thu, 27 May 2021 12:10 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 27 May 2021 12:10 AM IST
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Farmers celebrated Black Day in protest against the government's indifference
किसान आंदोलन को शुरू हुए छह माह बीतने और करीब 450 किसानों की मौत के बाद भी केंद्र सरकार की बेरुखी के विरोध में किसान व अन्य संगठन बुधवार को मुखर हुए। संगठनों ने काला दिवस मनाया। कई जगह रोष प्रदर्शन किए गए और पीएम व सीएम के पुतले फूंके गए। गांवों में लोगों ने घरों पर काले झंडे या काले कपड़े लगाकर विरोध जताया, कई गांवों में पुतले भी फूंके गए। सभी टोल प्लाजा पर भी पुतले फूंके गए।
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किसान सभा, महिला समिति, सीटू, एसएफआई, डीवाईएफआई और भारतीय किसान यूनियन के एक ग्रुप ने मानसरोवर पार्क के बाहर रोष प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पार्क के बाहर मानव शृंखला बनाई और उसके बाद मोदी सरकार का पुतला फूंका। किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, सीटू के प्रदेश महासचिव जय भगवान और विनोद ने कहा कि मोदी सरकार ने चोर दरवाजे से कृषि कानून थोप दिए हैं। श्रम कानूनों को कंपनियों के हित में तब्दील कर लेबर कोड थोप दिए। किसानों ने आवाज बुलंद की तो उन्हें कुचलने को सरकार ने सभी मर्यादाओं को पार कर दिया। पर किसान आंदोलन ने पूरी तरह शांतिपूर्ण रास्ते पर कायम रहे हुए सरकार के लोकतंत्र विरोधी चेहरे को पूरी दुनिया के सामने दिखा दिया। उन्होंने कहा कि श्रमिक वर्ग को दो मोर्चो पर लड़ना पड़ रहा है, पूंजीपति वर्ग और उसकी सरकार से और खतरनाक कोरोना से। उन्होंने मांग की कि कृषि कानून वापस लिए जाएं, चार लेबर कोड रद्द हों, आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस हों, बिजली बिल रद्द हो, छह माह तक सभी जरूरतमंदों को दस किलो अनाज प्रति व्यक्ति मुफ्त दिया जाए, सभी के खातों में 7500 रुपये डाले जाएं। इस दौरान महिला समिति की जगमति सांगवान, सविता, राजकुमारी दहिया, भाकियू के विजेंद्र हुड्डा, नौजवान सभा के संदीप सिंह, एसएफआई के प्रशांत, सीटू के विनोद कुमार, भवन निर्माण कामगार यूनियन के संजीव सिंह, सीटू की पूजा राठी, प्रदुमन, शैलेंद्र, विजेंद्र, विकास, अमित व साकिब भी मौजूद रहे। उधर, भारतीय किसान यूनियन (अंबावता) के प्रदेश प्रधान अनिल नांदल की अगुवाई में किसान नई अनाज मंडी में इकट्ठे हुए। वहां से कच्चा बेरी रोड, पुराना बस स्टैंड, छोटूराम चौक होते हुए मानसरोवर पार्क पहुंचे। वहां काले झंडे लेकर किसानों ने रोष प्रदर्शन किया। नांदल ने कहा कि सरकार कोरोना का डर दिखाकर किसान आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रही है, पर अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होगी। जब तक कृषि कानून रद्द नहीं होते, देश का किसान शांतिपूर्वक आंदोलन करता रहेगा। देश भर के किसान आंदोलन में भाग ले रहे हैं, इसकी झलक सरकार ने पिछले दिनों हिसार में हुए आंदोलन में देख ली होगी। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन पीएम नरेंद्र मोदी ने शपथ ली थी, जो पूरे देश के लिए काला दिवस कहा जा सकता है। संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को बातचीत के लिए पत्र लिखा है, पर सरकार की कोई रुचि नहीं है। इस अवसर पर संगठन सचिव चांद सिंह कुंडू, जिला प्रधान रणधीर काला भी मौजूद थे।
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