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किसानों ने मेयर दफ्तर के बाहर फूंकीं कृषि कानूनों की प्रतियां
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कृषि कानून के विरोध में नगर निगम कार्यालय के गेट पर कानून की प्रतियां जलाते किसान नेता।। अमर उज?
किसान संगठनों ने शनिवार को संपूर्ण क्रांति दिवस मनाया। इस दिन को काला दिवस बताते हुए नगर निगम स्थित मेयर मनमोहन गोयल के कार्यालय के बाहर कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।
लोकनायक जय प्रकाश नारायण ने 70 के दशक में पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान से तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ संपूर्ण क्रांति का लोकप्रिय नारा दिया था। संयुक्त किसान मोर्चा ने भी अब इसी नारे को किसान आंदोलन का आधार बनाया है। पांच जून 2020 को केंद्र सरकार कृषि अध्यादेश लाई थी, इसलिए शनिवार को किसान संगठनों ने काला दिवस मनाया। सभी संगठनों के लोग पहले हुडा पार्क में इकट्ठे हुए, फिर वहां से करीब साढ़े बारह बजे ट्रैक्टर ट्रॉलियों, गाड़ियों, दोपहिया वाहनों से नगर निगम पहुंचे। वहां लगभग पौना घंटा प्रदर्शन चला, उसके बाद तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां फूंकी गईं। प्रदर्शन में अन्य संगठनों के अलावा महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों को किसान सभा के इंद्रजीत सिंह, सीटू के विनोद, भारतीय किसान यूनियन (अंबावता) के अनिल नांदल और भाकियू चढूनी के राजू मकड़ौली ने संबोधित किया। वक्ताओं ने मांग की कि तीनों कानून रद्द कर एमएसपी गारंटी कानून लागू किया जाए, बिजली बिल 2020 वापस हो। वक्ताओं ने किसानों और मजदूरों का आह्वान किया कि वे आंदोलन में अपनी हाजिरी बढ़ाएं। तय रणनीति के तहत बॉर्डर पर भी किसानों की संख्या बढ़ाई जाए। प्रदर्शन का संचालन प्रीत सिंह ने किया। इस मौके पर वीरेंद्र हुड्डा, हरि स्वरूप हुड्डा, अतर सिंह हुड्डा, ओमप्रकाश कादियान, खेमचंद, रामकिशन नौणंद, ओमपाल, सुंदर सिंह, संजीव सिंह, अनीता, राहुल, रामनिवास, रणधीर काला, चांद सिंह कुंडू, योगेश दांगी भी मौजूद थे।
किलोई मंडी में गेहूं खरीद को दिया एक दिन
भाकियू (अंबावता) के प्रदेश प्रधान अनिल नांदल ने बताया कि शनिवार को भी किलोई मंडी में गेहूं की खरीद नहीं हुई। शनिवार को सभी किसान संगठन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में व्यस्त थे। अब प्रशासन को रविवार का समय दिया गया है। अगर रविवार को भी गेहूं की खरीद नहीं होती है तो सोमवार सुबह सभी संगठनों के साथ विचार कर आंदोलन शुरू किया जाएगा। किसान ट्रॉलियों में गेहूं लेकर लघु सचिवालय पहुंचेंगे।
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लोकनायक जय प्रकाश नारायण ने 70 के दशक में पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान से तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ संपूर्ण क्रांति का लोकप्रिय नारा दिया था। संयुक्त किसान मोर्चा ने भी अब इसी नारे को किसान आंदोलन का आधार बनाया है। पांच जून 2020 को केंद्र सरकार कृषि अध्यादेश लाई थी, इसलिए शनिवार को किसान संगठनों ने काला दिवस मनाया। सभी संगठनों के लोग पहले हुडा पार्क में इकट्ठे हुए, फिर वहां से करीब साढ़े बारह बजे ट्रैक्टर ट्रॉलियों, गाड़ियों, दोपहिया वाहनों से नगर निगम पहुंचे। वहां लगभग पौना घंटा प्रदर्शन चला, उसके बाद तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां फूंकी गईं। प्रदर्शन में अन्य संगठनों के अलावा महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों को किसान सभा के इंद्रजीत सिंह, सीटू के विनोद, भारतीय किसान यूनियन (अंबावता) के अनिल नांदल और भाकियू चढूनी के राजू मकड़ौली ने संबोधित किया। वक्ताओं ने मांग की कि तीनों कानून रद्द कर एमएसपी गारंटी कानून लागू किया जाए, बिजली बिल 2020 वापस हो। वक्ताओं ने किसानों और मजदूरों का आह्वान किया कि वे आंदोलन में अपनी हाजिरी बढ़ाएं। तय रणनीति के तहत बॉर्डर पर भी किसानों की संख्या बढ़ाई जाए। प्रदर्शन का संचालन प्रीत सिंह ने किया। इस मौके पर वीरेंद्र हुड्डा, हरि स्वरूप हुड्डा, अतर सिंह हुड्डा, ओमप्रकाश कादियान, खेमचंद, रामकिशन नौणंद, ओमपाल, सुंदर सिंह, संजीव सिंह, अनीता, राहुल, रामनिवास, रणधीर काला, चांद सिंह कुंडू, योगेश दांगी भी मौजूद थे।
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किलोई मंडी में गेहूं खरीद को दिया एक दिन
भाकियू (अंबावता) के प्रदेश प्रधान अनिल नांदल ने बताया कि शनिवार को भी किलोई मंडी में गेहूं की खरीद नहीं हुई। शनिवार को सभी किसान संगठन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में व्यस्त थे। अब प्रशासन को रविवार का समय दिया गया है। अगर रविवार को भी गेहूं की खरीद नहीं होती है तो सोमवार सुबह सभी संगठनों के साथ विचार कर आंदोलन शुरू किया जाएगा। किसान ट्रॉलियों में गेहूं लेकर लघु सचिवालय पहुंचेंगे।
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