{"_id":"649f48c3c945b3da3a0dd7c5","slug":"faced-with-culture-got-an-opportunity-to-enhance-skills-rohtak-news-c-17-roh1018-189053-2023-07-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: संस्कृति से हुए रूबरू, हुनर निखारने का मिला अवसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: संस्कृति से हुए रूबरू, हुनर निखारने का मिला अवसर
Sat, 01 Jul 2023 02:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sat, 01 Jul 2023 02:57 AM IST
विज्ञापन
रोहतक। राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में टाबर उत्सव में हरियाणवी संस्कृति पर मूर्ति शिल्प, क्ले मॉडलिंग, रिलीफ एवं स्कल्पचर, पेपर क्विलिंग व बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट चीजें बनाई गईं। 30 दिनों में विद्यार्थियों को कला के माध्यम से हरियाणवी संस्कृति, हड़प्पा सभ्यता व अपने इतिहास के बारे में जानने का अवसर मिला व एक से बेहतर एक कलाकृतियां बनाईं। शुक्रवार को टाबर उत्सव का विधिवत समापन किया गया। टाबर उत्सव में विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें जिला शिक्षा अधिकारी मनजीत मलिक, जिला शिक्षा अधिकारी दलजीत सिंह, डीपीसी आशा दहिया, उपजिला शिक्षा अधिकारी रेनू खत्री व जितेंद्र खत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि कला के माध्यम से अपनी संस्कृति व इतिहास को जानना अनोखा है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा और भविष्य में इसके माध्यम से कमाई भी कर सकते हैं। इससे आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। प्रधानाचार्य ओकेश लता व कोऑर्डिनेटर सुनीता अहलावत ने विद्यार्थियों द्वारा बनाई कलाकृतियों की प्रशंसा की। इस अवसर पर बीईओ रंजना दलाल, कला प्रवक्ता डॉ. अमृता दलाल, पवन कुमार, अजय राणा, रघुवेंद्र मलिक संगरक्षक कार्यकर्ता हरियाणवी संस्कृति और एबीआरसी आदि उपस्थित रहे।
यह बोले छात्र
टाबर उत्सव के माध्यम से कला के बारे में जानने को मिला। इससे पहले कलाकृति के बारे में कुछ भी नहीं पता था, लेकिन अब कला के बारे में जानने के साथ कमाई करने का साधन भी मिल गया। टाबर उत्सव में ही हमारी कलाकृतियों को पसंद किया जाने लगा और कुछ कलाकृतियों को खरीदा गया। इन कलाकृतियों के जरिए हम अपनी पढ़ाई के साथ माता-पिता की भी मदद कर सकते हैं।
नरसिंह, छात्र
कला के माध्यम से अपनी संस्कृति के बारे में जानना एक अलग अनुभव रहा। कला के जरिए इतिहास के बारे में जानने को मिलेगा कभी सोचा भी नहीं था। टाबर उत्सव में मिट्टी से लेकर पीओपी तक सब चीजों से कलाकृतियां बनाना सीखा। भविष्य में भी ऐसे शिविर लगने चाहिए ताकि हमें नई-नई चीजें सीखने को मिलें। टाबर उत्सव के माध्यम से पता चला कि कला से प्रेम करना कितना और इसे सीखना कितना अच्छा होता है।
विज्ञापन
- भारत, छात्र
कलाकृतियां बनाने के साथ दिमाग एकदम तरोताजा हो जाता है। टाबर उत्सव से पता चला कि हम भी कला के बारे में जान सकते हैं और इस क्षेत्र में काम कर सकते हैं। अभी से हम अपनी कला के माध्यम से कमाई कर अपनी पढ़ाई खुद कर सकते हैं। समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए। पढ़ाई के साथ अन्य चीजें सीखने का अवसर मिलता है।
- हिमांशु, छात्र
विज्ञापन
यह बोले छात्र
टाबर उत्सव के माध्यम से कला के बारे में जानने को मिला। इससे पहले कलाकृति के बारे में कुछ भी नहीं पता था, लेकिन अब कला के बारे में जानने के साथ कमाई करने का साधन भी मिल गया। टाबर उत्सव में ही हमारी कलाकृतियों को पसंद किया जाने लगा और कुछ कलाकृतियों को खरीदा गया। इन कलाकृतियों के जरिए हम अपनी पढ़ाई के साथ माता-पिता की भी मदद कर सकते हैं।
विज्ञापन
नरसिंह, छात्र
कला के माध्यम से अपनी संस्कृति के बारे में जानना एक अलग अनुभव रहा। कला के जरिए इतिहास के बारे में जानने को मिलेगा कभी सोचा भी नहीं था। टाबर उत्सव में मिट्टी से लेकर पीओपी तक सब चीजों से कलाकृतियां बनाना सीखा। भविष्य में भी ऐसे शिविर लगने चाहिए ताकि हमें नई-नई चीजें सीखने को मिलें। टाबर उत्सव के माध्यम से पता चला कि कला से प्रेम करना कितना और इसे सीखना कितना अच्छा होता है।
विज्ञापन
- भारत, छात्र
कलाकृतियां बनाने के साथ दिमाग एकदम तरोताजा हो जाता है। टाबर उत्सव से पता चला कि हम भी कला के बारे में जान सकते हैं और इस क्षेत्र में काम कर सकते हैं। अभी से हम अपनी कला के माध्यम से कमाई कर अपनी पढ़ाई खुद कर सकते हैं। समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए। पढ़ाई के साथ अन्य चीजें सीखने का अवसर मिलता है।
- हिमांशु, छात्र