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Rohtak News: राज्यपाल के निर्देश पर भी मॉडल स्कूल के पानी की जांच नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय में राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष जिस पानी को क्षण भर मुंह में नहीं रख सके थे, वही बच्चों को अभी तक पिलाया जा रहा है। राज्यपाल के निर्देश के बावजूद दो दिन में इस पानी की जांच हुई न ही फिल्टर बदला गया। ऐसी बेफिक्री आम बच्चों के कारण तो नहीं?
शहर के सेक्टर-3 स्थित मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय में राज्यपाल प्रो. घोष ने 27 अक्तूबर को दौरा किया था। अफसरों ने प्रदेश की पहली निपुण वाटिका से लेकर स्कूल की व्यवस्थाओं को शानदार तरीके से वर्णन किया था। राज्यपाल ने इसकी तारीफ भी की थी।
राज्यपाल के भाव उस वक्त बदले थे, जब उन्होंने पीने का पानी चखा। स्वाद ऐसा था कि प्रो. घोष एक घूंट पीने की हिम्मत नहीं कर सके। उसे तुरंत थूक दिया था। उन्होंने जिला उपायुक्त सचिन गुप्ता व जिला शिक्षा अधिकारी मनजीत मलिक को पानी की तुरंत जांच कराने के निर्देश दिए थे।
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यह भी कहा था कि अगर वाटर फिल्टर ठीक से काम नहीं कर रहा हो तो दूसरी मशीन लगवा दें। यही नहीं, राज्यपाल छत पर रखी टंकी देखने भी गए। ढक्कन खोलकर उसका हाल भी देखा। उन्हें शक था कि कहीं टंकी में कुछ गिर तो नहीं गया, जिसके कारण पानी खतरनाक लग रहा है।
राज्यपाल के निर्देश के बाद अभिभावकों और बच्चों को यह भरोसा था कि इसकी तत्काल जांच होगी। बच्चों को भी शुद्ध पानी मिलेगा। मगर, दो दिन बीत गए, शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रबंधन ने राज्यपाल के निर्देशों पर कुछ नहीं किया। सामान्य टीडीएस की जांच तक नहीं कराई।
जल्द कराएंगे सभी स्कूलों के पानी की जांच: मलिक
जिला शिक्षा अधिकारी मनजीत मलिक ने कहा कि विद्यालय के वाटर कूलर में नया आरओ कुछ दिन पहले ही लगाया गया था। इसके फिल्टर में गंदगी आ गई थी, जिसे साफ नहीं किया गया था। जल्द ही राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय समेत अन्य स्कूलों के भी पानी की जांच कराएंगे।
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रोहतक। राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय में राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष जिस पानी को क्षण भर मुंह में नहीं रख सके थे, वही बच्चों को अभी तक पिलाया जा रहा है। राज्यपाल के निर्देश के बावजूद दो दिन में इस पानी की जांच हुई न ही फिल्टर बदला गया। ऐसी बेफिक्री आम बच्चों के कारण तो नहीं?
शहर के सेक्टर-3 स्थित मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय में राज्यपाल प्रो. घोष ने 27 अक्तूबर को दौरा किया था। अफसरों ने प्रदेश की पहली निपुण वाटिका से लेकर स्कूल की व्यवस्थाओं को शानदार तरीके से वर्णन किया था। राज्यपाल ने इसकी तारीफ भी की थी।
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राज्यपाल के भाव उस वक्त बदले थे, जब उन्होंने पीने का पानी चखा। स्वाद ऐसा था कि प्रो. घोष एक घूंट पीने की हिम्मत नहीं कर सके। उसे तुरंत थूक दिया था। उन्होंने जिला उपायुक्त सचिन गुप्ता व जिला शिक्षा अधिकारी मनजीत मलिक को पानी की तुरंत जांच कराने के निर्देश दिए थे।
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यह भी कहा था कि अगर वाटर फिल्टर ठीक से काम नहीं कर रहा हो तो दूसरी मशीन लगवा दें। यही नहीं, राज्यपाल छत पर रखी टंकी देखने भी गए। ढक्कन खोलकर उसका हाल भी देखा। उन्हें शक था कि कहीं टंकी में कुछ गिर तो नहीं गया, जिसके कारण पानी खतरनाक लग रहा है।
राज्यपाल के निर्देश के बाद अभिभावकों और बच्चों को यह भरोसा था कि इसकी तत्काल जांच होगी। बच्चों को भी शुद्ध पानी मिलेगा। मगर, दो दिन बीत गए, शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रबंधन ने राज्यपाल के निर्देशों पर कुछ नहीं किया। सामान्य टीडीएस की जांच तक नहीं कराई।
जल्द कराएंगे सभी स्कूलों के पानी की जांच: मलिक
जिला शिक्षा अधिकारी मनजीत मलिक ने कहा कि विद्यालय के वाटर कूलर में नया आरओ कुछ दिन पहले ही लगाया गया था। इसके फिल्टर में गंदगी आ गई थी, जिसे साफ नहीं किया गया था। जल्द ही राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय समेत अन्य स्कूलों के भी पानी की जांच कराएंगे।