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अर्थशास्त्री बिटिया ने बदला अजायब खास का चुनावी गणित
ब्यूरो/ अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 16 Jan 2016 02:29 AM IST
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जैसा नाम, वैसी जंग। अजायब खास की खास चुनावी जंग। यहां अर्थशास्त्र से एम. ए. कर रही एक बेटी ने दशकों पुराना चुनावी गणित बदल दिया है। रिटायर्ड फौजी की बेटी मनीषा चुनावी मैदान में चाची-ताई को पूरी टक्कर दे रही है
पंचायत की 1660 वोटों को लेकर तीन प्रत्याशी पूरा गुणा-भाग बैठा रहे हैं। अजायब खास पंचायत महिलाओं के लिए आरक्षित है। यहां का चुनावी माहौल कुछ जुदा दिख रहा है। पूर्व सरपंच बिजेंद्र ने अपनी पत्नी नवीता को चुनावी जंग में उतारा है तो दूसरी प्रत्याशी सुरेश की पत्नी सुनीता हैं
इनके बीच ही रिटायर्ड फौजी सुरेंद्र की 22 वर्षीय बेटी मनीषा खूब जोड़ तोड़ बैठा रही है। त्रिकोणीय चुनावी जंग में दो तजुर्बे वाली महिलाएं हैं तो एक एमडीयू स्टूडेंट। ऐसा नहीं है कि मनीषा अपने पिता के बलबूते ही मैदान में हो, वह खुद भी अपनी सहेलियों के साथ चुनाव प्रचार के लिए जाती रही
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दावा है कि अगर वह सरपंच बनती है तो वह अपनी अर्थशास्त्र की पढ़ाई का पूरा इस्तेमाल करके सबसे पहले गांव का ऐसा बजट तैयार करेगी, जिससे विकास में कोई रुकावट नहीं आए। लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए तैयार करना प्राथमिकता है।
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पंचायत की 1660 वोटों को लेकर तीन प्रत्याशी पूरा गुणा-भाग बैठा रहे हैं। अजायब खास पंचायत महिलाओं के लिए आरक्षित है। यहां का चुनावी माहौल कुछ जुदा दिख रहा है। पूर्व सरपंच बिजेंद्र ने अपनी पत्नी नवीता को चुनावी जंग में उतारा है तो दूसरी प्रत्याशी सुरेश की पत्नी सुनीता हैं
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इनके बीच ही रिटायर्ड फौजी सुरेंद्र की 22 वर्षीय बेटी मनीषा खूब जोड़ तोड़ बैठा रही है। त्रिकोणीय चुनावी जंग में दो तजुर्बे वाली महिलाएं हैं तो एक एमडीयू स्टूडेंट। ऐसा नहीं है कि मनीषा अपने पिता के बलबूते ही मैदान में हो, वह खुद भी अपनी सहेलियों के साथ चुनाव प्रचार के लिए जाती रही
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दावा है कि अगर वह सरपंच बनती है तो वह अपनी अर्थशास्त्र की पढ़ाई का पूरा इस्तेमाल करके सबसे पहले गांव का ऐसा बजट तैयार करेगी, जिससे विकास में कोई रुकावट नहीं आए। लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए तैयार करना प्राथमिकता है।