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हेपेटाइटिस-सी का उपचार आसान, अब बी से लड़ने की तैयारी
ब्यूरो/ अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 20 Jan 2016 02:09 AM IST
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काला पीलिया के मरीजों के लिए ये राहत भरी खबर है। हरियाणा सरकार और रोहतक पीजीआई के प्रयासों से काला पीलिया का उपचार अब महज 42 हजार रुपये में हो सकेगा। वहीं एससी और बीपीएल परिवार वालों के लिए यह उपचार नि:शुल्क है। इससे पहले पीड़ितों को इसके लिए दो गुना राशि देनी पड़ती थी।
प्रदेश सरकार की ओर से चलाए जा रहे जीवन रेखा योजना के तहत छह माह से ज्यादा समय में होने वाले उपचार के लिए 90 हजार रुपये चुकाने होते थे। साथ ही पीड़ित को 12 से 24 इंजेक्शन लगते थे। वहीं इन इंजेक्शन की कीमत एक से सवा दो लाख रुपये थी।
हालांकि अब 42 हजार रुपये की तीन माह की गोलियों के साथ इसका उपचार संभव है। पीजीआई में मरीजों का उपचार कर रहे एवं जीवन रेखा योजना के प्रमुख नोडल अधिकारी एवं विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि नई गोलियां सिर्फ 15 दिन पहले देश में लाई गईं।
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सबसे पहले हरियाणा सरकार ने इन्हें मरीजों के लिए उपलब्ध करा दिया है। वहीं अब तक 1900 मरीजों का फ्री स्कीम के तहत और लगभग इतने ही मरीजों का रियायती दरों पर पंजीकरण हो चुका है।
करीब 1400 मरीज उपचार करवा चुके हैं। मरीजों की सुविधा के लिए स्पेशल हेपेटाइटिस-सी हेल्पलाइन 8950012900 भी चलाई गई है। इसके अलावा हेपेटाइटिस बी के लिए भी पीजीआई में विशेष उपचार शुरू कर दिया गया है।
हेपेटाइटिस बी के मरीजों का रजिस्ट्रेशन सबसे पहले रोहतक पीजीआई में
डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि देश में पहली बार रोहतक पीजीआई में हेपेटाइटिस बी से पीड़ित मरीजों का रजिस्ट्रेशन शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि 15 दिन में 150 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। डॉ. प्रवीण ने बताया कि हेपेटाइटिस सी की तुलना में बी का इलाज सस्ता है।
इस उपचार दो साल चलता है और इसका प्रति माह का खर्च 1500 रुपये आता है। पिछले पांच साल में हर ओपीडी में चार से पांच मरीज हेपेटाइटिस सी के सामने आ रहे हैं तो दो से तीन हैपेटाइटिस बी के मिल रहे हैं। हेपेटाइटिस बी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए डॉ. मल्होत्रा ने इसका हर शुक्रवार को सीआरएस ओपीडी के कमरा 138 में इसका विशेष क्लीनिक शुरू किया।
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प्रदेश सरकार की ओर से चलाए जा रहे जीवन रेखा योजना के तहत छह माह से ज्यादा समय में होने वाले उपचार के लिए 90 हजार रुपये चुकाने होते थे। साथ ही पीड़ित को 12 से 24 इंजेक्शन लगते थे। वहीं इन इंजेक्शन की कीमत एक से सवा दो लाख रुपये थी।
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हालांकि अब 42 हजार रुपये की तीन माह की गोलियों के साथ इसका उपचार संभव है। पीजीआई में मरीजों का उपचार कर रहे एवं जीवन रेखा योजना के प्रमुख नोडल अधिकारी एवं विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि नई गोलियां सिर्फ 15 दिन पहले देश में लाई गईं।
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सबसे पहले हरियाणा सरकार ने इन्हें मरीजों के लिए उपलब्ध करा दिया है। वहीं अब तक 1900 मरीजों का फ्री स्कीम के तहत और लगभग इतने ही मरीजों का रियायती दरों पर पंजीकरण हो चुका है।
करीब 1400 मरीज उपचार करवा चुके हैं। मरीजों की सुविधा के लिए स्पेशल हेपेटाइटिस-सी हेल्पलाइन 8950012900 भी चलाई गई है। इसके अलावा हेपेटाइटिस बी के लिए भी पीजीआई में विशेष उपचार शुरू कर दिया गया है।
हेपेटाइटिस बी के मरीजों का रजिस्ट्रेशन सबसे पहले रोहतक पीजीआई में
डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि देश में पहली बार रोहतक पीजीआई में हेपेटाइटिस बी से पीड़ित मरीजों का रजिस्ट्रेशन शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि 15 दिन में 150 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। डॉ. प्रवीण ने बताया कि हेपेटाइटिस सी की तुलना में बी का इलाज सस्ता है।
इस उपचार दो साल चलता है और इसका प्रति माह का खर्च 1500 रुपये आता है। पिछले पांच साल में हर ओपीडी में चार से पांच मरीज हेपेटाइटिस सी के सामने आ रहे हैं तो दो से तीन हैपेटाइटिस बी के मिल रहे हैं। हेपेटाइटिस बी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए डॉ. मल्होत्रा ने इसका हर शुक्रवार को सीआरएस ओपीडी के कमरा 138 में इसका विशेष क्लीनिक शुरू किया।